मोक्षित कारपोरेशन 2023 का घोटाले की तर्ज पर 1000 करोड़ से अधिक का भ्रष्टाचार
प्लेसमेंट एजेंसी के जरिए संविदा से आया हितेश साहू सीजीएमएससी का बन बैठा है सर्वेसर्वा
नए मेडिकल कालेजों में दबाव बनाकर अस्पतालों में लगने वाले उपकरण व फर्नीचर की खरीदी में मनमानी
सरकारी अस्पताल में इंजेक्शन-दवाई और ज़रूरी उपकरण नहीं, दूसरी तऱफ फिजूल करोड़ों की खरीदी का खेल
प्रदेश में आयुर्वेदक दवाई एवं जीवन उपयोगी दवाएं अस्पतालों से लगभग गायब, मंत्री का दबाव भी काम नहीं आया
रायपुर (जसेरि) । CGMSC में मोक्षित कारपोरेशन के तर्ज पर करोड़ों घोटाले की कहानी फिर से शुरू हो गई है। CGMSC में साज सजावट औऱ मेडिकल उपकरणों के नाम पर इन सामानों की बाज़ार से अधिक दर में मनमाना तरीक़ों से खरीदी की गई । जबकि प्रदेश में आयुर्वेद दवाई और अन्य तरह की दवाईऔ का अभाव है। सभी सरकारी अस्पताल में इंजेक्शन-दवाई और ज़रूरी मेडिकल उपकरण उपलब्ध नहीं है। अपने कर्मचारियों को दबाव डालकर पाँच मेडिकल कॉलेज में मनमाना तरीके से मशीनें अन्य उपकरण ष्टद्दद्वह्यष् रूष्ठ अपने करीबी संविधान प्लेसमेंट एजेंसी के द्वारा नियुक्त हितेश साहू के देख रेख में अनाप-शनाप मार्केट रेट बता कर महंगे दर पर साजो सामान, उपकरणों की ख़रीदी किया गया। मोक्षित कारपोरेशन के घोटाले के समय भी हितेश साहू ने अपना हुनर दिखाया था । 2022-2023 में 1000 करोड़ का बड़ा घोटाला कर चुका।
हितेश साहू ने मोक्षित कार्पोरेशन और अधिकारी-कर्मचारियों के साथ मिलकर 1000 करोड़ से अधिक का भ्रष्टाचार किया था। उसी तर्ज पर हितेश साहू अपने कर्मचारियों पर दबाव डाल कर अस्पतालों की मशीन खरीदी, लैब रिजेंट खरीदी, टेस्ट कीट खरीदी, और नए 5 मेडिकल कालेजों हेतु मशीनरी उपकरण फर्नीचर व साज-सज्जा के सामानों को स्तरहीन बाजार दर से कई सौ गुना अधिक दाम पर खरीदा है। इश खरादी में कई सौ करोड़ की कमीशनखोरी किया गया है। जिसकी जांच कब होगी। इन सभी का मास्टर माइंड हितेश साहू है जोकि संविदा प्लेसमेंट एजेंसी के व्दारा नियुक्त हुआ है औऱ सीजीएमएससी का बास बन बैठा है, उसे सीजीएमएससी से कब हटाया जाएगा।