मंडी। हिमाचल में किसी के गुम होते ही पुलिस को सीधे एफआईआर दर्ज करनी होगी। सुप्रीम कोर्ट ने लापता मामलों में एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने मिसिंग पर्सन मामलों में बिना समय गंवाए सीधे एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं, जिसके चलते हिमाचल प्रदेश में पुलिस की पुरानी व्यवस्था में बदलाव हो गया है। हिमाचल में किसी व्यस्क के भी लापता होने के बाद इससे पहले सीधे एफआईआर करने का प्रावधान नहीं था और मिसिंग रिपोर्ट होने के 24 घंटे बीतने के बाद ही मामला पंजीकृत किया जाता था। लापता व्यक्तियों, खासकर बच्चों और महिलाओं के मामलों में पुलिस की भूमिका और कानूनी प्रक्रिया में महत्त्वपूर्ण बदलाव आया है। पहले वयस्कों के मामलों में प्रारंभिक जांच के बाद ही एफआईआर दर्ज की जाती थी। सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेशों ने इसे अब बदल दिया है। बीते 22 मई को सुप्रीम कोर्ट ने आदेश में पूूरे देश के पुलिस स्टेशनों को निर्देश दिया कि मिसिंग व्यक्ति की कोई भी सूचना मिलते ही तुरंत एफआईआर दर्ज की जाए।
इसमें प्रारंभिक जांच का इंतजार नहीं किया जाएगा। इन मामलों में सीधे मानव तस्करी और अपहरण की धाराओं में दर्ज किए जाएंगे। यह बदलाव लापता व्यक्तियों की तलाश को तेज और संवेदनशील बनाने के लिए है, ताकि अपराध की आशंका में तुरंत जांच शुरू हो सके।नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़े बताते हैं कि लापता होने वाले व्यक्तियों में से करीब 88 फीसदी को रिकवर कर लिया जाता है 12 प्रतिशत मामलों में ही लापता व्यक्ति मिल नहीं पाता है। राज्य पुलिस का दावा है कि 87 से 88 प्रतिशत मामलों में व्यक्ति ट्रेस हो जाते हैं। मंडी के एसपी विनोद कुमार ने बताया कि मिसिंग रिपोर्ट होते ही एफआईआर पहले की जाएगी और उसके बाद जांच शुरू होगी। हिमाचल पुलिस मुख्यालय से भी इस सबंध में आदेश प्राप्त हुए हैं उसके बाद प्रारंभिक छानबीन के बाद एफआईआर दर्ज करने की प्रथा को बंद कर दिया गया है।