सोहना में अमरूत-2 योजना ठप, 102 करोड़ का इंतजार

Update: 2026-07-28 11:45 GMT

गुरुग्राम। सोहना क्षेत्र में लोगों को स्वच्छ नहरी पानी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई जनस्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग की अमरूत-दो योजना अब तक धरातल पर नहीं उतर पाई है। वर्ष 2022 में तैयार की गई यह महत्वाकांक्षी योजना करीब चार साल बाद भी मंजूरी और फंड के इंतजार में अटकी हुई है। योजना के तहत सोहना शहर और आसपास के 13 गांवों को नहरी पेयजल उपलब्ध कराया जाना था, लेकिन फिलहाल यह योजना कागजों तक ही सीमित दिखाई दे रही है।

अटल कायाकल्प एवं शहरी परिवर्तन मिशन यानी अमरूत-दो योजना के तहत क्षेत्र में पेयजल व्यवस्था को मजबूत करने की योजना बनाई गई थी। इसके लिए जनस्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग ने करीब 102 करोड़ रुपये का प्रस्ताव तैयार किया था। इस योजना का उद्देश्य लोगों को भूजल पर निर्भरता से राहत दिलाना और स्वच्छ नहरी पानी उपलब्ध कराना था।

योजना के अनुसार सोहना शहर के अलावा आसपास के गांवों लोहटकी, सांप की नगली, लाखुवास, खाइकाबालूदा, रायपुर, जखोपुर, सिरसका सहित कुल 13 गांवों को नहरी पानी की सुविधा मिलनी थी। इसके लिए करीब 93 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाई जानी है। विभाग की ओर से इस पाइपलाइन में डीआई पाइप का इस्तेमाल करने की योजना बनाई गई है, जिससे पानी की आपूर्ति बेहतर तरीके से हो सके।

इसके अलावा घामड़ोज स्थित वाटर ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता बढ़ाने का भी प्रस्ताव है। वर्तमान में इसकी क्षमता 27 एमएलडी है, जिसे बढ़ाकर 32 एमएलडी करने की योजना बनाई गई है। अधिकारियों का कहना है कि योजना पूरी होने के बाद सोहना क्षेत्र के शहरी और ग्रामीण इलाकों में पेयजल संकट को काफी हद तक दूर किया जा सकेगा।

हालांकि, योजना को लेकर अभी तक कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है। विभाग ने इसका डिटेल एस्टीमेट तैयार कर उच्च अधिकारियों को भेज दिया है, लेकिन मंजूरी और फंड उपलब्ध नहीं होने के कारण टेंडर प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई है। इसके चलते करोड़ों रुपये की योजना वर्षों से लंबित पड़ी हुई है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय से क्षेत्र में पेयजल की समस्या बनी हुई है। गर्मी के मौसम में कई इलाकों में पानी की किल्लत और गुणवत्ता को लेकर लोगों को परेशानी उठानी पड़ती है। ऐसे में अमरूत-दो योजना से लोगों को काफी उम्मीदें थीं, लेकिन योजना में देरी के कारण लोगों को अभी भी पुराने जल स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।

विभागीय अधिकारियों के अनुसार योजना का पूरा एस्टीमेट तैयार कर भेजा जा चुका है। फंड जारी होते ही टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। जनस्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग के कनिष्ठ अभियंता खुर्शीद ने बताया कि योजना को लेकर सभी जरूरी औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं। बजट मिलते ही काम शुरू कराया जाएगा।

अधिकारियों का यह भी कहना है कि फिलहाल कुछ गांवों में नहरी पानी की आपूर्ति की जा रही है, लेकिन पूरी योजना लागू होने के बाद 13 गांवों और सोहना शहर के लोगों को नियमित और बेहतर पेयजल सुविधा मिल सकेगी।

क्षेत्रवासियों की नजर अब सरकार और विभाग की ओर है कि 102 करोड़ रुपये की यह योजना कब धरातल पर उतरेगी। लोगों को उम्मीद है कि लंबे समय से अटकी अमरूत-दो योजना को जल्द मंजूरी मिलेगी और पेयजल संकट से राहत मिल सकेगी।

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