जामनगर : देशभर में नीट-यूजी परीक्षा में अनियमितताओं और पेपर लीक को लेकर उठे विवाद के बीच अब गुजरात की प्रतिष्ठित गुजरात आयुर्वेद यूनिवर्सिटी, जामनगर भी सवालों के घेरे में आ गई है। यूनिवर्सिटी में बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एंड सर्जरी (BAMS) तृतीय वर्ष की परीक्षा के दौरान शल्य तंत्र-1 (Shalya Tantra-1) विषय का प्रश्नपत्र लीक होने का आरोप लगाया गया है। इस मामले के सामने आने के बाद छात्रों और छात्र संगठनों ने परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए जांच की मांग की है।
जानकारी के अनुसार, गुजरात आयुर्वेद यूनिवर्सिटी से संबद्ध 20 से अधिक आयुर्वेदिक कॉलेजों के करीब 2000 छात्र 20 जुलाई को BAMS तृतीय वर्ष की परीक्षा में शामिल हुए थे। परीक्षा खत्म होने के बाद छात्रों के बीच चर्चा शुरू हुई कि परीक्षा में पूछे गए कई सवाल पहले ही सोशल मीडिया और व्हाट्सऐप ग्रुपों पर वायरल हो चुके थे। इसके बाद पेपर लीक की आशंका जताई जाने लगी।
छात्रों और छात्र संगठनों का दावा है कि परीक्षा से पहले व्हाट्सऐप ग्रुपों पर शल्य तंत्र-1 विषय से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रश्न और उनके बिंदु साझा किए गए थे। उनका आरोप है कि परीक्षा में पूछे गए कुल 12 प्रश्नों में से 11 प्रश्न ऐसे थे, जो परीक्षा शुरू होने से पहले ही व्हाट्सऐप पर वायरल हो चुके थे। प्रश्नों में इतनी अधिक समानता मिलने के बाद छात्रों ने परीक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए।
मामले को लेकर एनएसयूआई और यूथ कांग्रेस से जुड़े छात्र नेताओं ने भी विरोध जताया है। उनका कहना है कि यदि परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र या उससे संबंधित सामग्री लीक हुई है तो यह हजारों छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
छात्रों का कहना है कि वे लंबे समय से मेहनत कर परीक्षा की तैयारी करते हैं। ऐसे में अगर कुछ लोगों की वजह से परीक्षा की गोपनीयता प्रभावित होती है तो मेहनती छात्रों के साथ अन्याय होता है। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से यह भी मांग की है कि परीक्षा प्रणाली को और अधिक सुरक्षित बनाया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
वहीं, इस मामले को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से अभी जांच की प्रक्रिया शुरू किए जाने की बात कही जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि आरोपों की गंभीरता को देखते हुए पूरे मामले की जानकारी जुटाई जा रही है। यदि जांच में किसी भी तरह की अनियमितता सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
गौरतलब है कि हाल के समय में देशभर में प्रतियोगी और शैक्षणिक परीक्षाओं की पारदर्शिता को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। नीट-यूजी परीक्षा विवाद के बाद केंद्र और राज्य सरकारें परीक्षा प्रक्रिया को सुरक्षित बनाने के लिए कई कदम उठाने की बात कह चुकी हैं। ऐसे समय में गुजरात आयुर्वेद यूनिवर्सिटी की परीक्षा को लेकर सामने आया यह मामला भी चिंता बढ़ाने वाला है।
फिलहाल छात्रों की नजर विश्वविद्यालय प्रशासन की जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई है। यह स्पष्ट नहीं है कि वास्तव में प्रश्नपत्र लीक हुआ था या केवल कुछ प्रश्नों के वायरल होने की वजह से भ्रम की स्थिति बनी। जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकेगी। अधिकारियों का कहना है कि छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए निष्पक्ष जांच की जाएगी और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।