गांधीधाम। गुजरात के कांडला में स्वच्छ और हरित ऊर्जा की दिशा में एक महत्वपूर्ण परियोजना की शुरुआत होने जा रही है। दीनदयाल पोर्ट अथॉरिटी (DPA), कांडला और असम पेट्रो-केमिकल्स लिमिटेड (APCL) के सहयोग से 150 टन प्रतिदिन यानी 150 TPD क्षमता वाला ई-मेथनॉल प्लांट स्थापित किया जाएगा। परियोजना का शिलान्यास समारोह 26 सितंबर 2026 को गांधीधाम स्थित DPA एग्जिबिशन ग्राउंड में आयोजित किया जाएगा।इस परियोजना की आधारशिला गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल तथा असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की मौजूदगी में रखी जाएगी। परियोजना को भारत में ग्रीन फ्यूल उत्पादन और समुद्री क्षेत्र में कार्बन उत्सर्जन कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में पेश किया गया है।समारोह में कच्छ-मोरबी के सांसद विनोदभाई चावड़ा, गांधीधाम की विधायक मालतीबेन माहेश्वरी, दीनदयाल पोर्ट अथॉरिटी के चेयरमैन सुशील कुमार सिंह और असम पेट्रो-केमिकल्स लिमिटेड के चेयरमैन बिकुल डेका सहित अन्य प्रतिनिधि भी मौजूद रहेंगे।
जनवरी में हुआ था समझौता
दीनदयाल पोर्ट अथॉरिटी और असम पेट्रो-केमिकल्स लिमिटेड के बीच इस परियोजना के लिए जनवरी 2026 में समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए थे। समझौते के तहत कांडला पोर्ट पर 150 TPD क्षमता वाला ई-मेथनॉल उत्पादन संयंत्र स्थापित करने की योजना बनाई गई।इस परियोजना में 1,200 करोड़ रुपये से अधिक के पूंजी निवेश का अनुमान है। परियोजना से करीब 3,500 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना भी जताई गई है।समझौते के तहत दोनों संस्थाओं की अलग-अलग जिम्मेदारियां तय की गई हैं। DPA बंदरगाह पर पाइपलाइन कनेक्टिविटी, स्टोरेज और ईंधन हैंडलिंग से संबंधित बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराएगा, जबकि असम पेट्रो-केमिकल्स लिमिटेड ग्रीन मेथनॉल उत्पादन सुविधा स्थापित करेगा।इस व्यवस्था का उद्देश्य उत्पादन से लेकर भंडारण और समुद्री ईंधन के रूप में इस्तेमाल तक एक एकीकृत ग्रीन फ्यूल वैल्यू चेन विकसित करना है।
क्या है ई-मेथनॉल?
ई-मेथनॉल को इलेक्ट्रो-मेथनॉल भी कहा जाता है। इसका उत्पादन ग्रीन हाइड्रोजन और कैप्चर किए गए कार्बन डाइऑक्साइड का उपयोग करके किया जा सकता है। यदि इस प्रक्रिया के लिए आवश्यक बिजली नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से आती है, तो पारंपरिक जीवाश्म ईंधन आधारित मेथनॉल की तुलना में इसका कार्बन प्रभाव कम किया जा सकता है।ई-मेथनॉल को खास तौर पर समुद्री परिवहन, भारी उद्योग और रासायनिक उत्पादन जैसे क्षेत्रों में वैकल्पिक ईंधन के रूप में देखा जा रहा है। इन क्षेत्रों में सीधे विद्युतीकरण की अपनी तकनीकी और व्यावहारिक सीमाएं हैं।वैश्विक शिपिंग उद्योग भी ऐसे वैकल्पिक ईंधनों पर काम कर रहा है, जिनके जरिए जहाजों से होने वाले ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम किया जा सके। इसी वजह से ग्रीन मेथनॉल और ई-मेथनॉल की भूमिका पर लगातार चर्चा बढ़ी है।
कांडला पोर्ट की भूमिका होगी महत्वपूर्ण
भारत के पश्चिमी तट पर स्थित कांडला का दीनदयाल पोर्ट देश के प्रमुख बंदरगाहों में शामिल है। बड़ी मात्रा में माल ढुलाई और समुद्री व्यापार को देखते हुए यहां वैकल्पिक समुद्री ईंधन का बुनियादी ढांचा तैयार करने को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।कांडला को ग्रीन हाइड्रोजन और उससे जुड़े ईंधनों के उत्पादन तथा इस्तेमाल के केंद्र के रूप में विकसित करने के प्रयास भी किए जा रहे हैं।ई-मेथनॉल प्लांट के स्थापित होने के बाद यहां उत्पादन के साथ उसके भंडारण और समुद्री ईंधन के रूप में आपूर्ति के लिए आवश्यक सुविधाएं विकसित करने की योजना है।इससे भविष्य में मेथनॉल आधारित ईंधन इस्तेमाल करने वाले जहाजों को कांडला में बंकरिंग सुविधा उपलब्ध कराने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।
ग्रीन शिपिंग को मिलेगा बढ़ावा
भारत के व्यापार का बड़ा हिस्सा समुद्री मार्गों से संचालित होता है। ऐसे में बंदरगाह और जहाजरानी क्षेत्र में उत्सर्जन कम करना देश के दीर्घकालिक पर्यावरणीय लक्ष्यों से भी जुड़ा हुआ है।केंद्र सरकार बंदरगाहों पर नवीकरणीय ऊर्जा के इस्तेमाल, वैकल्पिक समुद्री ईंधन और ग्रीन पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न पहल कर रही है।ई-मेथनॉल परियोजना इसी व्यापक रणनीति से जुड़ी है। इसका उद्देश्य केवल ईंधन का उत्पादन करना नहीं, बल्कि बंदरगाह के भीतर उत्पादन, स्टोरेज, हैंडलिंग और जहाजों तक आपूर्ति की व्यवस्था विकसित करना भी है।अगर यह मॉडल सफल रहता है तो भविष्य में अन्य बंदरगाहों पर भी ग्रीन फ्यूल से जुड़े ऐसे बुनियादी ढांचे के विस्तार की संभावनाएं बन सकती हैं।
असम और गुजरात के बीच औद्योगिक सहयोग
यह परियोजना असम और गुजरात के बीच औद्योगिक सहयोग का भी उदाहरण है। असम पेट्रो-केमिकल्स लिमिटेड लंबे समय से मेथनॉल उत्पादन के क्षेत्र में काम कर रही है। कंपनी की नामरूप स्थित उत्पादन इकाई मेथनॉल और फॉर्मेलिन उत्पादन से जुड़ी है।कांडला परियोजना के जरिए कंपनी पारंपरिक मेथनॉल से आगे बढ़कर ग्रीन और ई-मेथनॉल उत्पादन के क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बढ़ाने की दिशा में काम करेगी।दूसरी ओर DPA अपने बंदरगाह बुनियादी ढांचे का इस्तेमाल ग्रीन फ्यूल वैल्यू चेन विकसित करने के लिए करेगा।
रोजगार और निवेश की भी संभावना
इस परियोजना का महत्व पर्यावरण और ऊर्जा तक सीमित नहीं है। बड़े पूंजी निवेश के कारण निर्माण, इंजीनियरिंग, संचालन, लॉजिस्टिक्स और अन्य संबंधित क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ने की संभावना है।परियोजना में 1,200 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश प्रस्तावित है और इससे लगभग 3,500 प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने का अनुमान है।हालांकि रोजगार की वास्तविक संख्या परियोजना के निर्माण, संचालन और उससे जुड़ी सप्लाई चेन के विस्तार पर निर्भर करेगी।
26 सितंबर को होगा औपचारिक शिलान्यास
26 सितंबर को गांधीधाम में होने वाला शिलान्यास समारोह इस परियोजना को निर्माण की दिशा में आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण चरण होगा। गुजरात और असम के मुख्यमंत्रियों के साथ केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्री की मौजूदगी में इसकी आधारशिला रखी जाएगी।150 TPD क्षमता वाला प्रस्तावित ई-मेथनॉल प्लांट भारत में ग्रीन फ्यूल उत्पादन, बंदरगाह आधारित स्वच्छ ऊर्जा ढांचे और समुद्री क्षेत्र के डीकार्बोनाइजेशन से जुड़ी कोशिशों का हिस्सा है।परियोजना के आगे बढ़ने के साथ कांडला पोर्ट में ग्रीन मेथनॉल उत्पादन और बंकरिंग से जुड़ा एकीकृत ढांचा विकसित करने की योजना है। इससे दीनदयाल पोर्ट की भूमिका पारंपरिक कार्गो हैंडलिंग के साथ भविष्य के वैकल्पिक समुद्री ईंधनों के केंद्र के रूप में भी बढ़ सकती है।
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