बड़वानी: गणेश उत्सव से पहले बड़वानी में प्रशासन ने पीओपी से बनी गणेश प्रतिमाओं पर पूरी तरह रोक लगा दी है। प्रतिबंध के बाद मिट्टी की मूर्तियों की मांग बढ़ी है, जबकि लागत बढ़ने से इनके दाम भी करीब 30 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं।
पीओपी की मूर्तियों पर प्रशासन ने लगाया प्रतिबंध
मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले में इस बार गणेश उत्सव पर्यावरण अनुकूल तरीके से मनाने पर जोर दिया जा रहा है। 14 सितंबर से शुरू होने वाले गणेश उत्सव को देखते हुए जिला प्रशासन ने प्लास्टर ऑफ पेरिस यानी पीओपी से गणेश प्रतिमाओं के निर्माण पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया है। अब प्रतिमाओं के लिए प्राकृतिक मिट्टी और गैर-विषाक्त रंगों के इस्तेमाल को प्राथमिकता दी जाएगी।
कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी जयति सिंह ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण के पुराने आदेश के आधार पर यह निर्देश जारी किया है। आदेश के मुताबिक जिले की पूरी राजस्व सीमा में गणेश चतुर्थी और नवरात्रि के लिए पीओपी से गणेश और दुर्गा प्रतिमाएं बनाने पर रोक रहेगी।
मिट्टी की मूर्तियों के दाम में आया उछाल
पीओपी पर रोक का असर इस बार मूर्तियों की कीमतों पर भी देखने को मिल रहा है। प्राकृतिक मिट्टी से तैयार प्रतिमाओं के दाम औसतन करीब 30 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। पिछले वर्ष लगभग 17 हजार रुपये में मिलने वाली 8 फीट की प्रतिमा अब करीब 25 हजार रुपये में बुक की जा रही है।
इसी तरह 6 फीट की प्रतिमाओं की कीमत भी बढ़ी है। पहले जिन प्रतिमाओं के लिए करीब 7 से 10 हजार रुपये खर्च होते थे, अब उनकी कीमत लगभग 13 से 15 हजार रुपये तक पहुंच गई है। मूर्तिकारों के मुताबिक मिट्टी, रस्सी और दूसरे कच्चे माल की कीमत बढ़ने से निर्माण लागत बढ़ी है।
बड़ी प्रतिमाओं की मांग घटी, छोटी मूर्तियां पसंद
इस बार गणेश पंडालों के आयोजकों की पसंद में भी बदलाव दिखाई दे रहा है। बड़ी प्रतिमाओं की बुकिंग पहले के मुकाबले कम हुई है। खास तौर पर 8 फीट की प्रतिमाओं की मांग में करीब 15 से 20 प्रतिशत तक गिरावट बताई जा रही है।
इसके विपरीत छोटी और मध्यम आकार की मूर्तियों की मांग अधिक बनी हुई है। आयोजकों का कहना है कि मध्यम आकार की प्रतिमाओं को पंडालों में स्थापित करना अपेक्षाकृत आसान होता है। साथ ही इनके परिवहन और विसर्जन में भी कम परेशानी होती है। यही कारण है कि इस साल कई आयोजक बड़े आकार की प्रतिमाओं के बजाय छोटी या मध्यम प्रतिमाओं को प्राथमिकता दे रहे हैं।
कच्चे माल की बढ़ती कीमत से मूर्तिकार परेशान
मूर्तिकारों का कहना है कि सिर्फ प्रशासनिक प्रतिबंध ही कीमत बढ़ने की वजह नहीं है, बल्कि मूर्तियां तैयार करने में इस्तेमाल होने वाले सामान की लागत भी बढ़ गई है। मूर्तिकार पूराराम के मुताबिक रस्सी की कीमत करीब 300 रुपये तक पहुंच गई है, जबकि मिट्टी एक ट्रॉली के लिए लगभग 4 से 5 हजार रुपये में मिल रही है।
एक अन्य मूर्तिकार गोकुल गोले ने बताया कि 6 फीट की प्रतिमाओं का निर्माण ज्यादा किया जा रहा है, लेकिन उनकी बुकिंग उम्मीद के मुताबिक नहीं हो रही। आसपास की तहसीलों से भी पहले की तुलना में कम ऑर्डर मिलने की बात सामने आई है। इससे स्थानीय मूर्तिकारों के सामने लागत निकालने और बिक्री बनाए रखने की चुनौती बढ़ गई है।
नियम तोड़ने पर कार्रवाई की चेतावनी
प्रशासन ने पीओपी प्रतिमाओं के निर्माण पर रोक के साथ नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी भी दी है। जारी आदेश में कहा गया है कि प्रतिबंध का उल्लंघन करने वाले लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं और अन्य कानूनी प्रावधानों के तहत अभियोजन की कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन का जोर ऐसी प्रतिमाओं को बढ़ावा देने पर है, जिनसे पर्यावरण और जनस्वास्थ्य पर कम असर पड़े। गणेश उत्सव के दौरान बड़ी संख्या में प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाता है, इसलिए मिट्टी से बनी प्रतिमाओं को पर्यावरण के लिहाज से बेहतर विकल्प माना जा रहा है।
इस तरह बड़वानी में इस बार गणेश उत्सव से पहले पीओपी पर प्रतिबंध ने मूर्तियों के बाजार का पूरा समीकरण बदल दिया है। एक तरफ पर्यावरण अनुकूल प्रतिमाओं को बढ़ावा मिल रहा है, तो दूसरी तरफ बढ़ी हुई लागत के कारण मिट्टी की मूर्तियां महंगी हो गई हैं। छोटी और मध्यम प्रतिमाओं की बढ़ती मांग से यह संकेत मिल रहा है कि आयोजक कीमत, स्थापना और विसर्जन की सुविधा को ध्यान में रखते हुए इस बार अपेक्षाकृत छोटे आकार की प्रतिमाओं का चुनाव कर रहे हैं।