यूपी। आम जनता की बात छोड़िए, आगरा में आईजी रेंज के बंगले की जमीन तक सुरक्षित नहीं है। छह बीघा से अधिक क्षेत्रफल में बने इस बंगले के एक हिस्से की जमीन का सौदा दो बार कर दिया गया। मामला पुलिस तक पहुंच चुका है। सौदा करने वालों ने तहसील में मिलीभगत से अपने नाम नामांतरण भी करा लिया। जिस कंपनी से जमीन का सौदा किया गया, उसके डायरेक्टर ने रकाबगंज थाने में धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कराया है। इसमें जमीन का सौदा कराने वाले तीन लोगों को नामजद किया गया है। जिनके नाम सौदे में शामिल हैं, वे अभी इस मुकदमे में नामजद नहीं हुए हैं। खास बात यह है कि मुकदमा दर्ज कराने वाले व्यक्ति के खिलाफ भी नाई की मंडी थाने में पहले से मुकदमा दर्ज है, जिसमें वही लोग नामजद हैं, जिन्होंने बाद में दूसरे सौदे में उनका नाम लिया।

बालूगंज में आईजी रेंज का बंगला स्थित है। पहले यहां डीआईजी रेंज का पद था, जो आगरा और अलीगढ़ मंडलों को देखता था। यह बंगला लगभग 6 बीघा 16 बिस्वा भूमि पर बना है। वर्ष 1957 से यह जमीन पुलिस विभाग के अधिकार क्षेत्र में है। खेवट संख्या 15 में हबीब-उर-रहमान का नाम दर्ज था, जबकि शेष भूमि नजूल घोषित है। अभिलेखों में पहले खलीलुल रहमान खां को भूस्वामी दर्शाया गया, फिर वसीयत के आधार पर धौलपुर हाउस निवासी इकबाल खां, फैसल खां, मोहम्मद सलीम खां, इरशाद खां, दिलशाद खां और फिरोज खां के नाम नामांतरण दर्ज हुआ।

सदर तहसील में नामांतरण के लिए इन लोगों ने जमीन पर कब्जा दिखाया, जिसे आधार बनाकर मार्च 2024 में नामांतरण करवा लिया गया। तत्कालीन आईजी रेंज दीपक कुमार ने अगस्त 2024 में तहसीलदार (न्यायिक) को पत्र भेजकर आपत्ति दर्ज की। उन्होंने मंडलायुक्त और डीएम को भी अवगत कराते हुए नामांतरण निरस्त करने की मांग की। गौर करने वाली बात यह है कि नामांतरण कराने वालों के खिलाफ अब तक पुलिस ने कोई मुकदमा दर्ज नहीं किया है, जबकि जमीन दो बार बेची जा चुकी है। जांच का विषय यह भी है कि तहसील कर्मियों ने कब्जा दिखाकर कैसे नामांतरण कर दिया और उनके खिलाफ क्या कार्रवाई हुई।


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