मुजफ्फरनगर : पत्नी पर मिट्टी का तेल डालकर उसे जिंदा जलाकर हत्या करने के मामले में अदालत ने दोषी पति को **मौत की सजा** सुनाई है। अदालत ने मामले की गंभीरता, हत्या के तरीके और अभियोजन की ओर से पेश किए गए साक्ष्यों को देखते हुए दोषी को मृत्युदंड दिया। कोर्ट ने घटना को बेहद गंभीर और क्रूर मानते हुए कहा कि दोषी का अपराध कड़ी से कड़ी सजा के योग्य है।
इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से गवाहों के बयान, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य साक्ष्य अदालत के सामने पेश किए गए। लंबी सुनवाई के बाद कोर्ट ने पति को पत्नी की हत्या का दोषी पाया और सजा का ऐलान किया।
पत्नी पर डाला था मिट्टी का तेल
अभियोजन के मुताबिक पति-पत्नी के बीच घरेलू विवाद चल रहा था। घटना वाले दिन भी दोनों के बीच कहासुनी हुई थी। विवाद बढ़ने के बाद आरोपी पति ने पत्नी पर मिट्टी का तेल डाल दिया और आग लगा दी।
आग लगते ही महिला गंभीर रूप से झुलस गई। घटना के बाद आसपास मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। महिला को गंभीर हालत में इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे बचाने की कोशिश की।
महिला का शरीर बुरी तरह झुलस चुका था। बाद में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इसके बाद मामले में हत्या की धाराएं जोड़कर जांच आगे बढ़ाई गई।
मृतका के बयान ने निभाई अहम भूमिका
मामले की सुनवाई के दौरान महिला द्वारा अस्पताल में दिए गए बयान को महत्वपूर्ण साक्ष्य के तौर पर अदालत के सामने रखा गया। गंभीर रूप से झुलसी महिला ने कथित तौर पर घटना के लिए अपने पति को जिम्मेदार ठहराया था।
अभियोजन पक्ष ने दलील दी कि महिला का बयान परिस्थितियों और मेडिकल साक्ष्यों से मेल खाता है। इसके अलावा मामले से जुड़े दूसरे गवाहों के बयान भी अदालत के सामने रखे गए।
कोर्ट ने उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद आरोपी पति को हत्या का दोषी करार दिया।
कोर्ट ने अपराध को माना बेहद गंभीर
दोषी की सजा पर बहस के दौरान अभियोजन पक्ष ने अधिकतम सजा देने की मांग की। अदालत के सामने अपराध के तरीके और परिस्थितियों का उल्लेख किया गया।
कोर्ट ने माना कि पत्नी पर ज्वलनशील पदार्थ डालकर आग लगाने की घटना अत्यंत गंभीर प्रकृति की है। मामले की परिस्थितियों और उपलब्ध साक्ष्यों को देखते हुए अदालत ने दोषी को मृत्युदंड सुनाने का फैसला किया।
इसके साथ ही अदालत ने मामले में लागू अन्य धाराओं के तहत भी सजा और जुर्माने का आदेश दिया।
बचाव पक्ष ने मांगी थी कम सजा
सजा पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दोषी के लिए नरमी बरतने की मांग की। बचाव पक्ष की ओर से आरोपी की पारिवारिक और दूसरी परिस्थितियों का हवाला देते हुए मृत्युदंड के बजाय कम सजा देने का अनुरोध किया गया।
दूसरी तरफ अभियोजन ने अपराध को बेहद क्रूर बताते हुए कहा कि दोषी को अधिकतम सजा दी जानी चाहिए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अभियोजन के पक्ष को स्वीकार करते हुए मौत की सजा सुनाई।
मृत्युदंड की आगे भी होती है न्यायिक समीक्षा
किसी निचली अदालत द्वारा मौत की सजा सुनाए जाने के बाद कानूनी प्रक्रिया वहीं समाप्त नहीं होती। भारतीय कानून के तहत मृत्युदंड को लागू करने से पहले संबंधित हाईकोर्ट से उसकी पुष्टि आवश्यक होती है।
दोषी को भी फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत में अपील करने का अधिकार होता है। हाईकोर्ट मामले के साक्ष्यों, दोषसिद्धि और सजा की समीक्षा कर सकता है। इसके बाद भी कानून में आगे अपील और अन्य संवैधानिक विकल्प उपलब्ध हो सकते हैं।
घरेलू विवाद ने लिया खौफनाक रूप
इस मामले में पति-पत्नी के बीच का विवाद आखिरकार एक महिला की मौत की वजह बन गया। अभियोजन पक्ष के अनुसार आरोपी ने गुस्से में पत्नी पर मिट्टी का तेल डालकर आग लगा दी थी।
अदालत के फैसले के बाद पीड़ित परिवार ने न्याय मिलने की बात कही। वहीं अभियोजन पक्ष ने कहा कि मजबूत साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर दोषी को सजा दिलाई जा सकी।
यह मामला घरेलू हिंसा के गंभीर परिणामों को भी सामने लाता है। किसी भी पारिवारिक विवाद में हिंसा न केवल एक व्यक्ति की जान ले सकती है, बल्कि पूरे परिवार को लंबे समय तक प्रभावित कर सकती है।