1909 की ईंटों ने खोला राज सहारनपुर कलेक्ट्रेट मस्जिद के नीचे क्या मिला?
सहारनपुर। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित पुरानी मस्जिद के नीचे मिली संरचना को लेकर जांच तेज हो गई है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की तो वहां मिली ईंटों और निर्माण सामग्री ने पुराने इतिहास की ओर इशारा किया। शुरुआती जांच में कुछ ईंटों पर **1909 का निशान** मिलने की बात सामने आई है, जिसके बाद यह सवाल उठने लगा है कि जमीन के नीचे मौजूद यह संरचना आखिर कितनी पुरानी है और इसका इस्तेमाल किस उद्देश्य के लिए किया जाता था।
हालांकि अधिकारियों का कहना है कि अभी किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। संरचना की वास्तविक उम्र और इतिहास जानने के लिए वैज्ञानिक जांच की जा रही है।
मलबा हटाने के दौरान सामने आई संरचना
सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित मस्जिद को हटाने की प्रक्रिया के बाद जब मलबा हटाया जा रहा था, तभी जमीन के नीचे एक पुरानी संरचना दिखाई दी। देखने में यह कुएं जैसी गोलाकार संरचना लग रही थी।
संरचना मिलने के बाद प्रशासन ने इलाके को सुरक्षित कर दिया और पुरातत्व विशेषज्ञों को जांच के लिए बुलाया गया। लखनऊ से पहुंची ASI की टीम ने मौके का निरीक्षण किया और अंदर उतरकर संरचना की बनावट को देखा।
करीब 20 फीट गहरी संरचना की जांच
जांच के दौरान अधिकारियों ने सीढ़ी के माध्यम से करीब 20 फीट नीचे उतरकर निरीक्षण किया। वहां मौजूद ईंटों, दीवारों और निर्माण सामग्री के नमूने जुटाए गए।
प्रारंभिक जांच में लखौरी ईंटों जैसी पुरानी निर्माण शैली दिखाई देने की बात सामने आई। इसके अलावा चूना-सुरखी के मसाले और प्लास्टर के अवशेष भी मिले हैं।
पुरातत्व विशेषज्ञों के अनुसार ऐसी निर्माण तकनीक पुराने समय की इमारतों में इस्तेमाल होती थी। हालांकि सिर्फ निर्माण शैली के आधार पर किसी संरचना की निश्चित उम्र तय नहीं की जा सकती।
1909 की ईंटों ने बढ़ाई उत्सुकता
जांच के दौरान कुछ ईंटों पर 1909 का अंक दिखाई देने की बात सामने आई है। इससे यह संकेत मिलता है कि कम से कम कुछ निर्माण सामग्री 20वीं सदी की शुरुआत की हो सकती है।
इन ईंटों को लेकर अब विशेषज्ञ विस्तृत जांच करेंगे। यह पता लगाया जाएगा कि ये ईंटें उसी मूल संरचना का हिस्सा हैं या बाद में किसी मरम्मत या निर्माण के दौरान लगाई गई थीं।
अगर जांच में यह स्पष्ट होता है कि ईंटें उसी संरचना की हैं तो इससे इसके निर्माण काल को समझने में मदद मिल सकती है।
इतिहास को लेकर अलग-अलग दावे
संरचना मिलने के बाद इसके इतिहास को लेकर अलग-अलग दावे सामने आने लगे हैं। कुछ लोगों का कहना है कि यह किसी पुराने धार्मिक या ऐतिहासिक निर्माण का हिस्सा हो सकता है, जबकि कुछ लोग इसे मस्जिद परिसर से जुड़ी पुरानी व्यवस्था बता रहे हैं।
हालांकि ASI की जांच ने अभी तक किसी भी दावे को प्रमाणित नहीं किया है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी निष्कर्ष से पहले तथ्य और वैज्ञानिक प्रमाण जरूरी हैं।
वजू के लिए इस्तेमाल होने की भी चर्चा
कुछ लोगों का दावा है कि यह संरचना मस्जिद में नमाज से पहले वजू के लिए पानी उपलब्ध कराने वाली व्यवस्था हो सकती है। वहीं कुछ अन्य लोग इसे अलग ऐतिहासिक संरचना से जोड़कर देख रहे हैं।
पुरातत्व विशेषज्ञ अब यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि इसका मूल उपयोग क्या था। इसके लिए संरचना की बनावट, पानी के स्रोत, अंदरूनी हिस्से और आसपास के पुराने रिकॉर्ड की जांच की जा सकती है।
वैज्ञानिक जांच से खुलेगा रहस्य
ASI की टीम अब मिले हुए नमूनों और निर्माण सामग्री के आधार पर आगे की जांच करेगी। पुरानी ईंटों, मसाले और प्लास्टर की जांच से संरचना के समय और उपयोग को समझने में मदद मिल सकती है।
अधिकारियों का कहना है कि किसी भी ऐतिहासिक दावे को प्रमाणों के आधार पर ही स्वीकार किया जाएगा। केवल अनुमान या स्थानीय दावों के आधार पर इतिहास तय नहीं किया जा सकता।
फिलहाल सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर के नीचे मिली यह संरचना लोगों के लिए उत्सुकता का विषय बनी हुई है। 1909 अंक वाली ईंटों ने इस रहस्य को और गहरा कर दिया है। अब सबकी नजर ASI की विस्तृत रिपोर्ट पर है, जिससे पता चलेगा कि जमीन के नीचे दफन यह राज वास्तव में कितना पुराना है और इसका इतिहास क्या है।