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उत्तर प्रदेश
पुराने कुएं का रहस्य जानने पहुंची ASI टीम सहारनपुर में निरीक्षण शुरू
Ratna Netam
7 Sept 2026 8:25 PM IST

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सहारनपुर। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में मस्जिद के ध्वस्तीकरण के बाद मलबे के नीचे मिली रहस्यमयी संरचना की जांच शुरू हो गई है। सोमवार को लखनऊ से पुरातत्व विभाग और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण से जुड़े अधिकारियों की टीम मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने सीढ़ी के जरिए करीब 20 फीट नीचे उतरकर संरचना का बारीकी से निरीक्षण किया। शुरुआती जांच में यह कुएं जैसी संरचना दिखाई दी है और निर्माण शैली के आधार पर इसके करीब **200 से 250 साल पुराना** होने की संभावना जताई गई है। हालांकि अधिकारियों ने साफ किया है कि अंतिम निष्कर्ष वैज्ञानिक और विस्तृत जांच के बाद ही निकाला जा सकता है।
सीढ़ी लगाकर अंदर उतरे अधिकारी
जांच के दौरान सहायक पुरातत्व अधिकारी मनोज कुमार यादव खुद सीढ़ी के सहारे संरचना के अंदर उतरे। उन्होंने करीब 10 मिनट तक अंदर रहकर ईंटों की बनावट, दीवारों और निर्माण में इस्तेमाल सामग्री का निरीक्षण किया।
अधिकारियों ने संरचना की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी भी की। इसके अलावा अंदर से मिट्टी और ईंटों के अवशेषों के नमूने लिए गए हैं। इनकी जांच से संरचना की उम्र और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को समझने में मदद मिल सकती है।
करीब 20 फीट गहरी है संरचना
अधिकारियों के मुताबिक यह संरचना करीब **20 फीट गहरी** है। हालांकि अंदर काफी मलबा भरा हुआ है, इसलिए अभी इसका पूरा स्वरूप स्पष्ट नहीं हो पाया है।
पहली नजर में यह कुएं जैसी गोलाकार संरचना दिखाई देती है। जांच में इस्तेमाल की गई ईंटों का आकार लगभग 20×10×5 सेंटीमीटर पाया गया है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसके निर्माण में **लखौरी ईंटों** का इस्तेमाल किया गया है। इस तरह की पतली ईंटों का इस्तेमाल पुराने दौर की इमारतों में व्यापक रूप से होता था।
चूना-सुरखी और प्लास्टर भी मिला
जांच के दौरान अधिकारियों ने पाया कि ईंटों को जोड़ने के लिए चूना और सुरखी से बने मसाले का इस्तेमाल किया गया है। ऊपरी सतह से करीब तीन फीट नीचे चूने के प्लास्टर की पतली परत भी मिली है।
इन्हीं निर्माण तकनीकों के आधार पर शुरुआती तौर पर संरचना को उत्तर मध्यकालीन या बाद के मध्यकालीन दौर से संबंधित माना जा रहा है। कुछ रिपोर्टों में इसकी संभावित उम्र करीब 200 से 250 वर्ष बताई गई है।
हालांकि यह सिर्फ प्रारंभिक आकलन है। पुरातत्व अधिकारियों ने किसी निश्चित काल या शासक से इसे जोड़ने से इनकार किया है।
शाहजहां काल से जोड़ने के दावे पर क्या बोले अधिकारी?
संरचना मिलने के बाद इसे मुगल काल और यहां तक कि शाहजहां के समय से जोड़कर भी दावे किए जा रहे हैं। इस पर अधिकारियों ने सावधानी बरतने की बात कही है।
मनोज कुमार यादव ने स्पष्ट किया कि केवल संभावनाओं के आधार पर इतिहास तय नहीं किया जा सकता। किसी संरचना की वास्तविक उम्र और उसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से होता था, यह प्रमाणों के आधार पर ही निर्धारित किया जाएगा।
कुएं को लेकर आमने-सामने दावे
संरचना मिलने के बाद इसके इतिहास को लेकर अलग-अलग दावे भी सामने आए हैं। पूर्व बजरंग दल पदाधिकारी विकास त्यागी ने दावा किया है कि यहां मस्जिद से पहले मंदिर मौजूद होने की संभावना हो सकती है।
दूसरी ओर कांग्रेस सांसद इमरान मसूद का कहना है कि कुआं मस्जिद का ही हिस्सा था और इसका इस्तेमाल नमाज से पहले वजू के लिए पानी उपलब्ध कराने में होता था।
फिलहाल इनमें से किसी दावे को ASI की जांच ने प्रमाणित नहीं किया है।
मलबा हटने के दौरान मिला था कुआं
कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित मस्जिद को अदालत से जुड़ी प्रक्रिया के बाद 5 सितंबर को ध्वस्त किया गया था। इसके बाद मलबा हटाने के दौरान जमीन के नीचे यह संरचना दिखाई दी।
रविवार को संरचना मिलने के बाद प्रशासन ने तत्काल इलाके की बैरिकेडिंग कर दी थी। इसके बाद पुरातत्व विशेषज्ञों को इसकी जांच के लिए बुलाया गया।
वैज्ञानिक जांच से खुलेगा असली इतिहास
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि यह संरचना वास्तव में कितनी पुरानी है और इसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जाता था। अगर यह कुआं था तो संभव है कि किसी समय यह पानी का स्रोत रहा हो और बाद में अनुपयोगी होने पर इसे मिट्टी या मलबे से भर दिया गया हो।
हालांकि अभी इस संभावना पर भी कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला गया है। आगे यहां खुदाई कराई जाएगी या नहीं, इसका फैसला प्रशासन और संबंधित विभाग करेंगे।
फिलहाल शुरुआती जांच से इतना जरूर सामने आया है कि जमीन के नीचे मौजूद संरचना पुरानी निर्माण शैली की है। लेकिन इसकी सटीक उम्र, ऐतिहासिक संबंध और उपयोग का पता विस्तृत वैज्ञानिक जांच के बाद ही चल सकेगा।
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