लाडा-सारली फ्रंटियर हाईवे मुआवजा घोटाला, ईडी ने 2.69 करोड़ की संपत्तियां कुर्क की
Itanagar ईटानगर। अरुणाचल प्रदेश के बहुचर्चित लाडा-सारली फ्रंटियर हाईवे परियोजना से जुड़े कथित मुआवजा घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय ने बड़ी कार्रवाई की है। ईडी के ईटानगर सब-जोनल कार्यालय ने धनशोधन निवारण अधिनियम 2002 के तहत न्याकपो यांगफो की 2.69 करोड़ रुपए मूल्य की दो अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क (प्रोविजनली अटैच) किया है। ईडी के मुताबिक यह कार्रवाई लाडा-सारली फ्रंटियर हाईवे परियोजना के पैकेज-4 और पैकेज-5 के तहत भूमि अधिग्रहण मुआवजे के आकलन और वितरण में कथित अनियमितताओं से जुड़े मामले में की गई है।
कुर्क की गई संपत्तियों में पपुम पारे जिले के बालिजन सर्किल स्थित तारासो गांव में 7,950 वर्ग मीटर जमीन शामिल है, जिसकी कीमत लगभग 1.59 करोड़ रुपए आंकी गई है। इसके अलावा चेस्सा गांव में 3,440 वर्ग मीटर भूमि और दो मछली तालाब भी कुर्क किए गए हैं, जिनकी कीमत करीब 1.10 करोड़ रुपए बताई गई है। ईडी ने यह जांच अरुणाचल प्रदेश के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो, ईटानगर द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। एफआईआर में कई सरकारी अधिकारियों और निजी लाभार्थियों पर परियोजना के तहत भूमि अधिग्रहण मुआवजे के आकलन, स्वीकृति और भुगतान में बड़े पैमाने पर अनियमितता तथा सरकारी धन के दुरुपयोग के आरोप लगाए गए थे।
जांच में सामने आया कि न्याकपो यांगफो परियोजना के लाभार्थियों में शामिल था और उसे पैकेज-IV तथा पैकेज-V के तहत कुल 3.36 करोड़ रुपये का मुआवजा मिला था। हालांकि तथ्य खोज समिति और पुनः सत्यापन प्रक्रिया के दौरान तैयार लाभार्थी-वार तुलनात्मक रिपोर्ट में पाया गया कि उसे लगभग 3.25 करोड़ रुपये का अतिरिक्त अथवा अपात्र मुआवजा दिया गया। ईडी के अनुसार यह अतिरिक्त भुगतान बांस, अन्य सामान्य पेड़ों तथा एसपीटी भवन (SPT Building) के नाम पर किया गया था, जो भौतिक सत्यापन के दौरान मौके पर मौजूद नहीं पाए गए।
जांच में यह भी पता चला कि 5 जून 2025 को 1.89 करोड़ रुपए का मुआवजा प्राप्त करने के अगले ही दिन, यानी 6 जून 2025 को न्याकपो यांगफो ने 1.59 करोड़ रुपए खर्च कर तारासो गांव में 7,950 वर्ग मीटर जमीन खरीदी। इसी तरह 22 जुलाई 2025 को 1.46 करोड़ रुपए का अतिरिक्त मुआवजा मिलने के बाद उसने 23 जुलाई 2025 को 1.10 करोड़ रुपए देकर चेस्सा गांव में जमीन और दो मछली तालाब खरीदे।
ईडी ने दावा किया है कि जांच के दौरान कथित अपराध से अर्जित धन और इन संपत्तियों की खरीद के बीच सीधा और स्पष्ट वित्तीय संबंध स्थापित हुआ है। इसी आधार पर कुल 2.69 करोड़ रुपए मूल्य की इन संपत्तियों को पीएमएलए के तहत अस्थायी रूप से कुर्क किया गया है। एजेंसी ने कहा कि मामले में शामिल अन्य लाभार्थियों की भूमिका की भी जांच जारी है, जिन्हें परियोजना के तहत कथित रूप से अतिरिक्त या अपात्र मुआवजा मिला था। जांच के दायरे में अन्य लाभार्थियों और संबंधित अधिकारियों को भी शामिल किया गया है।