जंतर-मंतर प्रदर्शन: हत्या, लूट और आर्म्स एक्ट समेत गंभीर मामलों वाले लोग चिन्हित

AI तकनीक से पुलिस की पड़ताल, जंतर-मंतर भीड़ में अपराधियों की पहचान

Update: 2026-07-30 14:36 GMT
Delhi दिल्ली: जंतर-मंतर पर 20 से 25 जुलाई के बीच हुए प्रदर्शन को लेकर दिल्ली पुलिस ने बड़ा दावा किया है। पुलिस के मुताबिक, फेस रिकग्निशन तकनीक की मदद से प्रदर्शन में शामिल भीड़ में 2,873 ऐसे लोगों की पहचान की गई है, जिनके खिलाफ पहले से आपराधिक मामले दर्ज हैं।
पुलिस के अनुसार, इन लोगों में हत्या, हत्या के प्रयास, डकैती, लूट, रेप, अपहरण, आर्म्स एक्ट और अन्य गंभीर अपराधों से जुड़े आरोपी शामिल हैं। आंकड़ों के मुताबिक, पहचाने गए लोगों में 101 लोग हत्या के मामलों से जुड़े हैं, जबकि 62 लोगों पर हत्या के प्रयास के मामले दर्ज हैं। इसके अलावा 284 लोग डकैती और लूट, 61 लोग रेप, छह लोग पॉक्सो, 229 लोग आर्म्स एक्ट, 135 लोग स्नैचिंग और 19 लोग किडनैपिंग जैसे मामलों में आरोपी बताए गए हैं।
हालांकि, दिल्ली पुलिस ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि ये सभी लोग प्रदर्शन के दौरान किसी हिंसा या उपद्रव में शामिल थे। पुलिस का कहना है कि इन मामलों की आगे जांच की जाएगी और यह पता लगाया जाएगा कि किसी व्यक्ति की मौजूदगी का प्रदर्शन में उसकी भूमिका से क्या संबंध है।
फेस रिकग्निशन सिस्टम के जरिए पुलिस किसी स्थान पर मौजूद लोगों के चेहरों का अपने आपराधिक रिकॉर्ड वाले डेटाबेस में मौजूद तस्वीरों से मिलान करती है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज होना और उसका अपराध साबित होना अलग-अलग कानूनी स्थिति है। इस मामले के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या किसी प्रदर्शन में आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोगों की मौजूदगी मात्र से पूरे आंदोलन या भीड़ की प्रकृति तय की जा सकती है। कानून के अनुसार, किसी व्यक्ति को दोषी अदालत के फैसले के बाद ही माना जाता है।
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