कंधे को चीरकर मुंह से बाहर निकला सरिया, मौत को छूकर लौटा 13 साल का बच्चा
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सूरत: गुजरात के सूरत शहर स्थित उन (Unn) इलाके के मिस्वाहुन नगर से एक बेहद खौफनाक और रूह कंपा देने वाला हादसा सामने आया है. यहां स्थित महमुदिया मदरसे में पढ़ने वाला 10 साल का नाजिश मोहम्मद उर्फ नाजिम तीसरी मंजिल से नीचे गिर गया. बच्चा सीधे पास में बन रही एक निर्माणाधीन इमारत के पिलर से बाहर निकले लोहे के सरिये (रॉड) पर जा गिरा.
हादसा इतना भीषण था कि लोहे का सरिया बच्चे के कंधे और गर्दन के पिछले हिस्से को चीरते हुए सीधे मुंह के रास्ते बाहर निकल आया. हालांकि, स्थानीय नागरिकों की सूझबूझ और सूरत के न्यू सिविल अस्पताल के डॉक्टरों की मुस्तैदी के चलते करीब 1 घंटे तक चले बेहद जटिल ऑपरेशन के बाद मासूम को मौत के मुंह से सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है.
घटना मंगलवार शाम करीब 4 से 5 बजे के बीच की बताई जा रही है. जैसे ही बच्चा तीसरी मंजिल से नीचे गिरा, मौके पर अफरा-तफरी मच गई. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय लोगों ने बिना समय गंवाए कटर की मदद से मुख्य सरिये को काटा और बच्चे को गर्दन में फंसे लोहे के सरिये के साथ ही 108 एम्बुलेंस के जरिए न्यू सिविल अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर पहुंचाया.
अस्पताल में जब बच्चे को लाया गया तब उसकी हालत अत्यंत नाजुक थी और डॉक्टरों के मुताबिक उसके बचने की संभावना महज 20 प्रतिशत ही थी. इमरजेंसी विभाग के स्टाफ ने तुरंत प्राथमिक उपचार देकर बच्चे की सांसों को स्टेबिलाइज़ किया और सीटी स्कैन के बाद सीधे ऑपरेशन थिएटर ले जाया गया.
ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर दिव्यांग दवे ने बताया कि बच्चे के मुंह में सरिया फंसा होने के कारण एनेस्थीसिया की ट्यूब डालना सबसे चुनौतीपूर्ण काम था. हालांकि एनेस्थीसिया टीम ने इसे बेहद कुशलता से संभाला.
यूनिट के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. प्रकाश पटेल, प्लास्टिक सर्जन डॉ. नीलेश काछड़िया, डॉ. दीप शाह, डॉ. ऋत्विक जीवाणी, डॉ. कौशल, डॉ. हार्दिक आस्तिक और ईएनटी सर्जन्स की पूरी टीम ने लगभग 1 घंटे की मशक्कत के बाद सरिये को सफलतापूर्वक बाहर निकाल लिया.
राहत की बात यह रही कि गले की किसी मुख्य खून की नस (वैस्कुलर इंजरी) को कोई नुकसान नहीं पहुंचा था. सलाइवरी ग्लैंड (लार ग्रंथि) और मांसपेशियों को हल्की चोट आई थी, जिसे ईएनटी सर्जन्स ने रिपेयर कर दिया है. बच्चा फिलहाल आईसीयू में है और उसकी हालत पूरी तरह स्थिर बनी हुई है.
मासूम के पिता सदरे आलम ने बताया कि वे घटना के वक्त काम पर थे. फोन पर सूचना मिलते ही वे सीधे अस्पताल पहुंचे. उन्होंने कहा, ''अस्पताल के सभी डॉक्टरों ने अपनी तरफ से पूरी कोशिश की और 3-4 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद मेरे बच्चे की जान बचा ली. हादसा कैसे हुआ और इसमें किसकी लापरवाही थी, यह मदरसे में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज देखने के बाद ही साफ हो पाएगा.''