ब्रिक्स बैठक में छाया हिमाचल का जीआईएस मॉडल

Update: 2026-06-04 11:30 GMT
Shimla. शिमला। ओडिशा के पुरी में द्वितीय ब्रिक्स की तकनीकी बैठक (आपदा जोखिम न्यूनीकरण) में हिमाचल प्रदेश ने अपने अत्याधुनिक आधारित शहरी आपदा प्रबंधन एवं शहरी लचीलापन प्लेटफॉर्म का प्रस्तुतीकरण कर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना हासिल की। इस बैठक में ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात सहित ब्रिक्स देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। हिमाचल प्रदेश सरकार के विशेष सचिव (आपदा प्रबंधन) डा. पुष्पेंद्र राणा ने अपने संबोधन में कहा कि शहर केवल भवनों का समूह नहीं होते, बल्कि लोगों, बुनियादी ढांचे, सेवाओं और संस्थानों से मिलकर एक जटिल व्यवस्था बनाते हैं। किसी भी आपदा का प्रभाव इन सभी घटकों पर एक साथ पड़ता है, इसलिए राहत एवं बचाव कार्यों के लिए समय पर और सटीक जानकारी उपलब्ध होना बेहद जरूरी है।
डा. राणा ने बताया कि आपदा के दौरान प्रभावित लोगों की पहचान, लापता व्यक्तियों की खोज, क्षतिग्रस्त सेवाओं और ढांचागत सुविधाओं का आकलन तथा राहत एवं पुनर्वास योजनाओं का निर्माण बड़ी चुनौती होती है। इन चुनौतियों का समाधान करने के लिए हिमाचल प्रदेश ने जीआईएस (भौगोलिग सूचना प्रणाली )आधारित निर्णय सहायता प्रणाली विकसित की है। इसमें ड्रोन सर्वेक्षण, फील्ड सर्वेक्षण और आधुनिक भू-स्थानिक तकनीकों का उपयोग किया गया है। इस परियोजना के तहत राज्य के 16 शहरी स्थानीय निकायों में 15 हजार से अधिक संपत्तियों का डिजिटल मैपिंग किया गया है। इसके माध्यम से एक व्यापक और सटीक भू-स्थानिक डाटाबेस तैयार हुआ है, जो आपदा प्रबंधन से जुड़े विभिन्न कार्यों में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
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