यूपी में बाढ़-बारिश का कहर, CM योगी ने चित्रकूट का हवाई सर्वे किया
यूपी में बारिश का तांडव घरों से घाट तक पानी ही पानी
Uttar Pradesh उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश में मानसूनी बारिश और बाढ़ से हालात लगातार चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। रविवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चित्रकूट के बाढ़ प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण कर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने मंदाकिनी नदी के बढ़े जलस्तर और आसपास के प्रभावित क्षेत्रों को देखा। इसके बाद रैन बसेरों में रह रहे बाढ़ पीड़ितों से मुलाकात की। करीब 800 प्रभावित परिवारों को 50-50 किलो की राहत किट भी बांटी गई। मुख्यमंत्री ने पीड़ित परिवारों से कहा कि आपदा की इस घड़ी में सरकार उनके साथ खड़ी है। इससे एक दिन पहले शनिवार को मुख्यमंत्री ने वाराणसी में भी बाढ़ प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वे किया था। यहां उन्होंने वरुणा नदी के बढ़े जलस्तर और आसपास के इलाकों की स्थिति देखी थी।
26 जिले बाढ़ की चपेट में
प्रदेश के 26 जिले बाढ़ से प्रभावित हैं। सरकार के आंकड़ों के मुताबिक करीब 3.53 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। अब तक 17,544 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है, जबकि 4,847 लोग राहत शिविरों में रह रहे हैं। वाराणसी, प्रयागराज, कानपुर और अयोध्या समेत कई जिलों में बाढ़ का असर साफ दिखाई दे रहा है। गंगा का जलस्तर बढ़ने से वाराणसी और कानपुर के रिहाइशी इलाकों में पानी घुस चुका है। कई लोग घरों की छतों पर रहने को मजबूर हैं।
वाराणसी और प्रयागराज में घाट डूबे
वाराणसी में गंगा के बढ़े जलस्तर के कारण सभी 84 घाट डूब गए हैं। घाटों का आपसी संपर्क टूट गया है। मणिकर्णिका घाट का शवदाह गृह भी पानी में डूब गया है, जिसके कारण छत पर अंतिम संस्कार किया जा रहा है। लोग पानी के बीच से अर्थी लेकर पहुंच रहे हैं। प्रयागराज में भी गंगा-यमुना उफान पर हैं। प्रमुख घाट पानी में डूबे हुए हैं और दारागंज घाट पर शवदाह गृह में पानी भरने के कारण अंतिम संस्कार सड़क पर किया जा रहा है। रिवर फ्रंट और प्रेरणा स्थल भी जलमग्न हैं।
कई जिलों में घरों और सड़कों में पानी
बरेली में तेज बारिश के बाद घरों के किचन और बेडरूम तक घुटनों के बराबर पानी पहुंच गया। रामपुर गार्डन स्थित फायर स्टेशन में भी करीब डेढ़ फीट पानी भर गया। पानी निकालने के लिए पंप लगाए गए। बिजनौर के अफजलगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 2 से 3 फीट तक पानी भर गया। एक्स-रे मशीन पानी में डूब गई और दवाइयां भी खराब होने की जानकारी है। वहीं सड़कों पर भी एक से दो फीट तक पानी जमा है। श्रावस्ती में निर्माणाधीन पुल के बाईपास का करीब 400 मीटर हिस्सा पानी में डूब गया। इसके बावजूद ग्रामीण, स्कूली बच्चे और बाइक-साइकिल सवार इस रास्ते से आने-जाने को मजबूर हैं।
गांवों का संपर्क टूटा, फसलें भी प्रभावित
उन्नाव में गंगा और सई नदी का जलस्तर बढ़ने से कई इलाके प्रभावित हैं। कई गांवों के रास्ते जलमग्न हो गए हैं। रसूलपुर-अकबरपुर मार्ग का हिस्सा कट जाने से आवागमन प्रभावित हुआ है। ग्रामीणों ने पहले बांस और रस्सी से अस्थायी पुल बनाया था, जिसे प्रशासन ने असुरक्षित बताकर हटवा दिया। हमीरपुर में लगातार बारिश और नहर की कटान से करीब 100 बीघा फसल जलमग्न हो गई है। लखीमपुर खीरी में डीएम अंजनी कुमार सिंह ट्रैक्टर से बाढ़ प्रभावित गांव पहुंचे और ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं।
गोंडा में खतरे के निशान से ऊपर घाघरा
गोंडा में घाघरा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। तरबगंज क्षेत्र के करीब 10 मजरों की लगभग 5 हजार आबादी प्रभावित है। प्रशासन ने आवाजाही के लिए 30 से अधिक नावें और नाविक तैनात किए हैं। रविवार सुबह नदी का जलस्तर 106.360 मीटर दर्ज हुआ, जो खतरे के निशान से 29 सेंटीमीटर ऊपर है।
58 जिलों में बारिश का अलर्ट
पिछले 24 घंटों में प्रदेश के 54 जिलों में बारिश दर्ज की गई। सबसे ज्यादा 90 मिमी बारिश बिजनौर में हुई। मौसम विभाग ने सोमवार को 58 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया है। इनमें बहराइच और गोंडा समेत 6 जिलों में बहुत भारी बारिश की चेतावनी है। मौसम वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह के मुताबिक बंगाल की खाड़ी में बना बारिश का सिस्टम मध्य प्रदेश की ओर बढ़ रहा है। इसके प्रभाव से पश्चिमी यूपी में तेज बारिश जारी रह सकती है। अगले 48 घंटे में पूर्वी यूपी में फिर भारी बारिश की संभावना है, जबकि 8 सितंबर के बाद सिस्टम कमजोर पड़ने और प्रदेश में बारिश थमने का अनुमान है।