बरसात में गेट खोलने से निचले क्षेत्रों में हर साल हो रहा भारी नुकसान

Update: 2025-08-20 09:58 GMT
Noorpur. नूरपुर। पौंग बांध के फालतू पानी से हिमाचल के लोग परेशान है, जबकि बीबीएमबी प्रबंधन बोर्ड समेत प्रदेश व केंद्र की सरकारें भी मंड एरिया से सुरक्षित निकासी का प्रबंध करने में नाकाम रही है। यही वजह है कि पौंग बांध बनने के बाद से आज तक लोग बरसात के मौसम में पौंग के पानी से परेशान है। अभी तक पौंग बांध के फ्लड गेट आधे से कम खुले है अगर पौंग का जलस्तर बढऩे पर यह फ्लड और ज्यादा खुले तो, मंड क्षेत्र के लोगों की मुश्किलें और बढ़ जाएंगी। पौंग बांध बनने से हजारों घर उजड़े थे जो कि उस समय का दुनिया का सबसे बड़ा विस्थापन था जबकि अभी तक उन परिवारों में से कईयों को राजस्थान में मुरब्बे नहीं मिल
पाए है।


लोगों के मुताबिक पौंग के फालतू पानी का कहर लगभग वर्ष 1988 में पहली बार बरपा था जब पौंग के फ्लड गेट पूरे खुल गए थे, जिससे मंड क्षेत्र में भारी तबाही मची थी। उसके बाद भी पौंग बांध के पानी ने मंड क्षेत्र में कई बार तबाही का कहर ढाया है, जिसमें वर्ष 2011 में लगभग 65 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा था जिससे लगभग 150 हेक्टेयर जमीन प्रभावित हुई थी। वर्ष 2013 में भी पौंग का पानी छोड़ा गया था, जिससे 60 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया था और इससे 228 कनाल जमीन जलमग्न हुई थी। वर्ष 2019 तथा वर्ष 2023 में भी पौंग का भरी मात्रा में पानी छोड़ा गया था जिससे मंड क्षेत्र के लोगों को भारी नुकसान हुआ था । पिछले वर्षों की तरह इस वर्ष में एक बार फिर करीब छह अगस्त से पौंग के फालतू पानी का कहर जारी है। बुध्वार को पौंग बांध से पानी और ज्यादा मात्रा में छोड़ा जा सकता है।
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