पुलिसकर्मी ने नशे में किया हंगामा, वीडियो वायरल होने से मचा बवाल

जांच में जुटी पुलिस

Update: 2026-06-25 11:21 GMT
Ichhawar. इछावर। कानून-व्यवस्था बनाए रखने और समाज में अनुशासन स्थापित करने की जिम्मेदारी जिस पुलिस व्यवस्था पर होती है, जब उसी व्यवस्था से जुड़े कर्मचारी सार्वजनिक रूप से नियमों की अनदेखी करते नजर आएं तो लोगों का भरोसा डगमगाना स्वाभाविक है। मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के इछावर क्षेत्र से ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जहां कोर्ट में पदस्थ एक मुंशी कथित रूप से शराब के नशे में धुत होकर थाने के सामने हंगामा करता दिखाई दिया। घटना का वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है और लोगों ने मामले में कार्रवाई की मांग उठाई है।
जानकारी के अनुसार, इछावर न्यायालय में पदस्थ कोर्ट मुंशी संजीव गोड कथित रूप से ड्यूटी के दौरान वर्दी पहने हुए नशे की हालत में दिखाई दिए। प्रत्यक्षदर्शियों का दावा है कि वह अत्यधिक शराब के नशे में थे और थाने के सामने सड़क पर असामान्य व्यवहार कर रहे थे। बताया जा रहा है कि उन्होंने पहले थाना परिसर के बाहर हंगामा किया और बाद में लड़खड़ाते हुए परिसर के भीतर तक पहुंच गए। स्थानीय लोगों के अनुसार, घटना के दौरान मुंशी का संतुलन बिगड़ा हुआ था और वह ठीक से चल भी नहीं पा रहे थे। थाने के सामने मौजूद राहगीरों और आम नागरिकों ने जब उन्हें इस हालत में देखा तो कई लोग हैरान रह गए। कुछ लोगों ने इस पूरी घटना का वीडियो भी बना लिया, जो बाद में सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया।
घटना के प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि सार्वजनिक स्थान पर वर्दीधारी कर्मचारी का इस तरह व्यवहार करना विभाग की छवि को नुकसान पहुंचाने वाला है। लोगों का मानना है कि कानून का पालन कराने वालों से समाज को अनुशासन और जिम्मेदारी की अपेक्षा रहती है। ऐसे में यदि कोई कर्मचारी ड्यूटी के दौरान नशे की हालत में पाया जाता है तो यह गंभीर मामला माना जाना चाहिए। स्थानीय नागरिकों ने आरोप लगाया है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। कुछ लोगों का कहना है कि संबंधित कर्मचारी अक्सर शराब के नशे में दिखाई देते हैं और इस प्रकार की घटनाएं पहले भी चर्चा का विषय बन चुकी हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन घटना के बाद लोगों में नाराजगी जरूर देखने को मिल रही है।
घटना के बाद क्षेत्र के नागरिकों ने वरिष्ठ अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित कर्मचारी के खिलाफ विभागीय नियमों के तहत उचित कार्रवाई की जानी चाहिए। उनका तर्क है कि अनुशासन और जवाबदेही केवल आम नागरिकों के लिए नहीं, बल्कि सरकारी कर्मचारियों और वर्दीधारी कर्मियों के लिए भी समान रूप से लागू होनी चाहिए। मामले को लेकर प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि संबंधित कर्मचारी की मेडिकल जांच कराई गई है या नहीं। वीडियो और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के आधार पर मामले की सत्यता की जांच की आवश्यकता बताई जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में तथ्यों की पुष्टि के बाद ही निष्कर्ष पर पहुंचना चाहिए। यदि किसी सरकारी कर्मचारी पर ड्यूटी के दौरान नशे में होने का आरोप लगता है, तो सामान्य प्रक्रिया के तहत जांच, चिकित्सीय परीक्षण और विभागीय पड़ताल के बाद ही कार्रवाई की जाती है। फिलहाल इस घटना ने स्थानीय स्तर पर कानून-व्यवस्था और विभागीय अनुशासन को लेकर बहस छेड़ दी है। लोग उम्मीद कर रहे हैं कि संबंधित अधिकारी मामले की जांच कर उचित निर्णय लेंगे ताकि पुलिस और न्यायिक व्यवस्था से जुड़े संस्थानों की साख बनी रहे तथा जनता का विश्वास मजबूत हो।
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