कोलकाता। स्वर्गीय उद्योगपति रतन टाटा के लंबे समय से सहयोगी और टाटा ट्रस्ट्स के पूर्व ट्रस्टी मेहली के. मिस्त्री ने टाटा मेडिकल सेंटर ट्रस्ट के ट्रस्टी पद पर आगे नहीं बने रहने का फैसला किया है। यह ट्रस्ट कोलकाता में टाटा मेडिकल सेंटर का संचालन करता है। मिस्त्री का मौजूदा कार्यकाल 30 सितंबर 2026 को समाप्त हो रहा है। उन्होंने अगले कार्यकाल के लिए दोबारा चुनाव नहीं लड़ने का निर्णय लिया है।मिली जानकारी के अनुसार, मेहली मिस्त्री ने 15 सितंबर को टाटा मेडिकल सेंटर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) अरुण पट्टाथयिल को ईमेल भेजकर अपने फैसले की जानकारी दी। ईमेल में उन्होंने स्पष्ट किया कि वह अगले कार्यकाल के लिए ट्रस्टी के पद पर बने रहने के इच्छुक नहीं हैं। उन्होंने अनुरोध किया कि उनकी ट्रस्टीशिप को आगे नहीं बढ़ाने के उनके निर्णय को आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज किया जाए।
मिस्त्री ने अपने ईमेल में लिखा, “मैं आपको बताना चाहता हूं कि टाटा मेडिकल सेंटर के ट्रस्टी के तौर पर मेरा कार्यकाल 30 सितंबर, 2026 को खत्म हो रहा है। मैं दोबारा चुनाव नहीं लड़ना चाहता और अनुरोध करता हूं कि मेरे कार्यकाल को आगे न बढ़ाने के इस ईमेल को रिकॉर्ड में रखा जाए।”मेहली के. मिस्त्री टाटा समूह से लंबे समय से जुड़े रहे हैं। वह रतन टाटा के करीबी सहयोगियों में शामिल रहे और टाटा ट्रस्ट्स में भी ट्रस्टी की जिम्मेदारी निभा चुके हैं। टाटा समूह और उससे जुड़े ट्रस्टों में उनकी भूमिका लंबे समय तक महत्वपूर्ण रही है। अब टाटा मेडिकल सेंटर ट्रस्ट के मौजूदा कार्यकाल की समाप्ति के बाद वह इस जिम्मेदारी से अलग हो जाएंगे।
टाटा मेडिकल सेंटर ट्रस्ट कोलकाता स्थित टाटा मेडिकल सेंटर के संचालन से जुड़ा है। यह संस्थान कैंसर के इलाज और इससे संबंधित चिकित्सा सेवाओं के लिए जाना जाता है। ट्रस्ट के स्तर पर लिए जाने वाले निर्णय संस्थान के संचालन और उससे जुड़े कार्यों के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसे में किसी ट्रस्टी का कार्यकाल समाप्त होना और नए कार्यकाल के लिए चुनाव नहीं लड़ने का फैसला ट्रस्ट के स्तर पर एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा सकता है।मिस्त्री का कार्यकाल 30 सितंबर को समाप्त होने वाला है। उन्होंने अपने ईमेल के माध्यम से पहले ही यह स्पष्ट कर दिया कि वह अगले कार्यकाल के लिए अपनी उम्मीदवारी नहीं रखना चाहते। इसका अर्थ है कि निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद वह टाटा मेडिकल सेंटर ट्रस्ट के ट्रस्टी के रूप में अपनी जिम्मेदारी जारी नहीं रखेंगे।
अपने संदेश में मिस्त्री ने किसी व्यक्तिगत कारण का विस्तृत उल्लेख नहीं किया। उन्होंने केवल यह बताया कि वह दोबारा चुनाव नहीं लड़ना चाहते और अपने कार्यकाल को आगे नहीं बढ़ाने के निर्णय को रिकॉर्ड में रखने का अनुरोध किया है। इसलिए उनके फैसले के पीछे किसी विशेष कारण को लेकर कोई निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।टाटा ट्रस्ट्स से भी मेहली मिस्त्री का पुराना संबंध रहा है। वह टाटा ट्रस्ट्स के पूर्व ट्रस्टी रह चुके हैं। रतन टाटा के साथ लंबे समय तक काम करने और उनके करीबी सहयोगियों में शामिल होने के कारण टाटा समूह से जुड़े मामलों में मिस्त्री का नाम लंबे समय से सामने आता रहा है।
रतन टाटा के निधन के बाद टाटा समूह और उससे जुड़े ट्रस्टों की गतिविधियों में भी कई बदलाव देखने को मिले हैं। टाटा ट्रस्ट्स समूह की परोपकारी और सामाजिक पहलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। स्वास्थ्य क्षेत्र में टाटा मेडिकल सेंटर जैसी संस्थाओं का संचालन भी इसी व्यापक सामाजिक प्रतिबद्धता से जुड़ा है।मेहली मिस्त्री के टाटा मेडिकल सेंटर ट्रस्ट से अलग होने का फैसला ऐसे समय सामने आया है जब उनका मौजूदा कार्यकाल समाप्त होने वाला है। उन्होंने समय रहते ट्रस्ट के CEO को ईमेल भेजकर अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी। उनके संदेश को रिकॉर्ड में रखने का अनुरोध भी किया गया है, जिससे ट्रस्ट के रिकॉर्ड में उनके निर्णय को दर्ज किया जा सके।
मिस्त्री के फैसले के बाद अब ट्रस्ट के अगले कार्यकाल के लिए नई व्यवस्था की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। हालांकि उपलब्ध जानकारी में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि उनके स्थान पर किसे ट्रस्टी बनाया जाएगा या अगले कार्यकाल के लिए चुनाव की प्रक्रिया किस तरह होगी। इस संबंध में आगे की आधिकारिक जानकारी महत्वपूर्ण होगी।टाटा मेडिकल सेंटर का संचालन करने वाले ट्रस्ट में ट्रस्टी की भूमिका संस्थान से जुड़े प्रशासनिक और अन्य महत्वपूर्ण मामलों में होती है। ऐसे में किसी अनुभवी ट्रस्टी के कार्यकाल के समाप्त होने के बाद ट्रस्ट में नई नियुक्ति या चुनाव की प्रक्रिया स्वाभाविक रूप से महत्वपूर्ण होगी।
मेहली मिस्त्री ने अपने ईमेल में अपने कार्यकाल की समाप्ति की तारीख भी स्पष्ट की है। उन्होंने बताया कि 30 सितंबर 2026 को उनका मौजूदा कार्यकाल पूरा हो जाएगा। साथ ही उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि वह दोबारा चुनाव नहीं लड़ेंगे। इस तरह 30 सितंबर के बाद टाटा मेडिकल सेंटर ट्रस्ट के ट्रस्टी के रूप में उनकी भूमिका समाप्त हो जाएगी।फिलहाल उनके फैसले से जुड़ी उपलब्ध जानकारी उनके ईमेल तक सीमित है, जिसमें उन्होंने ट्रस्ट के CEO को अपने निर्णय से अवगत कराया है। उन्होंने अगले कार्यकाल के लिए पद पर बने रहने से इनकार किया है और अपने निर्णय को रिकॉर्ड में दर्ज करने का अनुरोध किया है।मेहली के. मिस्त्री लंबे समय से टाटा समूह और रतन टाटा से जुड़े रहे हैं। टाटा ट्रस्ट्स के पूर्व ट्रस्टी और रतन टाटा के सहयोगी के तौर पर उनकी पहचान रही है। अब टाटा मेडिकल सेंटर ट्रस्ट के मौजूदा कार्यकाल की समाप्ति के साथ वह ट्रस्टी की जिम्मेदारी से अलग होने जा रहे हैं। 30 सितंबर 2026 के बाद ट्रस्ट में उनकी भूमिका समाप्त हो जाएगी और आगे की व्यवस्था ट्रस्ट के स्तर पर तय की जाएगी।
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