Shimla. शिमला। मानसून के इंतजार के बीच प्रदेश में जल शक्ति विभाग की पेयजल योजनाओं पर धीरे-धीरे सूखे का असर बढ़ रहा है। राज्य में 422 स्कीमों पर इसका असर पड़ा है, जबकि 31 पेयजल योजनाओं पर यह असर दिखा है और यह 75 प्रतिशत से ऊपर है। जिन इलाकों की पेयजल योजनाएं अधिक प्रभावित हुई है, उनमें वैकल्पिक व्यवस्था से आपूर्ति सुनिश्चित बनाई गई है। अब सबकी निगाहें मानसून पर टिकी हुई हैं। अहम है कि राज्य सरकार ने प्रदेश की पेयजल योजनाओं की स्थिति पर नजऱ रखने के लिए मुख्यालय में अलग से नोडल अधिकारी की तैनाती कर रखी है। विभाग के अधिकारी प्रदेश भर से हर सप्ताह योजनाओं पर सूखे के प्रभाव को लेकर रिपोर्ट भेज रहे हैं। वहीं, राज्य सरकार ने अधिकारियों को भी पूर्व में ही निर्देश दिए है कि पानी का स्तर कम होने की स्थिति में वैकल्पिक स्रोतों से भी पानी की आपूर्ति की व्यवस्था बनाई जाए।
इसके अलावा पाइपलाइन की लीकेज पर विशेष तौर पर निगाह रखने के निर्देश सरकार की ओर से जारी किए गए हैं। उधर, प्रदेश की पेयजल स्कीमों की 20 जून तक की स्थिति की रिपोर्ट विभाग की ओर से राज्य सरकार को सौंपी गई है। इसके तहत 422 परियोजनाओं पर सूखे का असर दिखा है और जल प्रवाह में कमी दर्ज की गई है। हालांकि इनमें 75 फीसदी से ऊपर असर वाली स्कीमों की संख्या 31 है। जिनमें सोलन जिला की 23 और सिरमौर की आठ स्कीमें शामिल है। शेष स्कीमों पर सूखे का आंशिक रूप से असर पड़ा है। रिपोर्ट के तहत 10658 पेयजल स्कीमों में से 196 पर शून्य से पच्चीस फीसदी, 164 पर 25 से 50 तथा 31 पर 50 से 75 प्रतिशत तक सूखे का असर दिखा है। हालांकि पेयजल योजनाओं की यह असर आशिंक माना जाता है। बता दें कि 12 जून तक प्रदेश में शून्य से 25 फीसदी तक आंशिक रूप से प्रभावित हुई स्कीमों की संख्या 179 थी। कुल-मिलाकर अगर प्रदेश में मानसून के आने में ओर देरी होती है, तो जलसंकट का सामना भी करना पड़ सकता है।