दूषित पानी मामले में कमिश्नर हटाए, दो अधिकारी निलंबित

जिम्मेदारी सौंपी

Update: 2026-01-02 18:20 GMT
Indore इंदौर: दूषित पानी से मौतों के मामले में मध्य प्रदेश सरकार ने कड़ा कदम उठाते हुए नगर निगम कमिश्नर दिलीप यादव को हटा दिया है। इसके साथ ही एडिशनल कमिश्नर रोहित सिसोनिया और एग्जीक्यूटिव इंजीनियर संजीव श्रीवास्तव को निलंबित कर दिया गया है। सरकार ने शुक्रवार को नगर निगम अधिकारियों के खिलाफ कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की शुरुआत की। इसी क्रम में कमिश्नर दिलीप यादव और एडिशनल कमिश्नर रोहित सिसोनिया को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया था। सिसोनिया को बाद में ट्रांसफर कर किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग में उप सचिव के पद पर भेजा गया। वहीं, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर संजीव श्रीवास्तव से जल वितरण कार्य विभाग का प्रभार वापस ले लिया गया।
इसी बीच इंदौर नगर निगम में तीन नए अधिकारियों की नियुक्ति भी की गई है। खरगोन जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी आकाश सिंह, आलीराजपुर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रखर सिंह और इंदौर के उप परिवहन आयुक्त आशीष कुमार पाठक को नगर निगम में अपर आयुक्त बनाया गया है। सरकार ने इस मामले में हाईकोर्ट में अपनी स्टेटस रिपोर्ट भी पेश की। रिपोर्ट में दावा किया गया कि इंदौर में दूषित पानी के कारण सिर्फ चार मौतें हुई हैं। यह रिपोर्ट तब सामने आई जब मृतकों के परिजन और अस्पतालों से कुल 15 मौतों की जानकारी प्राप्त हो चुकी थी। मामले की अगली सुनवाई 6 जनवरी को निर्धारित की गई है।
1 जनवरी को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया था कि वे दूषित पानी और इससे हुई मौतों के संबंध में विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट जमा करें। हालांकि, पांच दिन बाद सरकार ने केवल चार मौतों की पुष्टि की। 39 पेज की स्टेटस रिपोर्ट में बताया गया कि मृतकों की उम्र 60 साल से अधिक थी। मृतकों में उर्मिला की मौत 28 दिसंबर, तारा (60) और नंदा (70) की मौत 30 दिसंबर, और हीरालाल (65) की मौत 31 दिसंबर को हुई। सरकार की रिपोर्ट पर शहर के नागरिक और मृतकों के परिजन संतुष्ट नहीं हैं। मृतकों की संख्या में अंतर और दूषित पानी की गुणवत्ता पर सवाल उठाए जा रहे हैं। सामाजिक और राजनीतिक हलकों में यह मामला काफी चर्चा में है।
नगर निगम के नए नियुक्त अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से जिम्मेदारी सौंपी गई है ताकि जल वितरण प्रणाली को सुधारने और शहरवासियों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा सकें। इंदौर में जलापूर्ति की निगरानी के लिए विशेष टीमों का गठन भी किया गया है। इस कार्रवाई को सरकार की जवाबदेही और कड़ी कार्रवाई की नीति के तहत देखा जा रहा है। अधिकारीयों के हटाए जाने और निलंबित किए जाने का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि भविष्य में इस तरह की लापरवाही और प्रशासनिक कमियां न हों।
इस मामले ने इंदौर शहर की जनता में सुरक्षा और स्वास्थ्य के प्रति चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि पानी की गुणवत्ता की नियमित जांच और निगरानी के बिना ऐसे हादसे दोबारा हो सकते हैं। नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वे सुरक्षित पानी का उपयोग करें और किसी भी संदिग्ध जल स्रोत से पानी पीने से बचें। प्रशासन ने यह भी कहा कि दूषित पानी के मामले में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और भविष्य में सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य किया जाएगा।
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