पुणे में बड़े होटलों पर FDA की कार्रवाई के बाद सड़क किनारे खाने की दुकानों पर उठे सवाल
पुणे : खाद्य सुरक्षा को लेकर खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) की हालिया कार्रवाई के बाद अब शहर के सड़क किनारे लगने वाले हजारों खाद्य स्टॉल भी चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। पानी-पुरी, भेल, मोमोज, चाइनीज फूड, रोल्स और ताजे जूस से लेकर कई तरह के लोकप्रिय व्यंजन बेचने वाले ये स्टॉल शहर की खान-पान संस्कृति का अहम हिस्सा हैं। लेकिन मानसून के दौरान इन दुकानों के आसपास साफ-सफाई की स्थिति और खाद्य पदार्थों को सुरक्षित रखने की व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जुलाई की शुरुआत में FDA ने पुणे डिवीजन के कई होटल और रेस्तरां का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान साफ-सफाई में कमी, खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन और कुछ प्रतिष्ठानों में एक्सपायर्ड खाद्य सामग्री मिलने के बाद सात प्रतिष्ठानों के लाइसेंस निलंबित किए गए। कार्रवाई ‘सेफ फूड, सेफ ड्रग, सेफ महाराष्ट्र’ अभियान के तहत की गई थी। अधिकारियों ने साफ किया है कि खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी।
बड़े प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई से स्ट्रीट फूड की ओर नजर
FDA की कार्रवाई में होटल ग्रैंड पुरंदर, क्राउन बेकर्स, बरकत बिरयानी हाउस, रॉयल बिरयानी हाउस समेत अन्य प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्रवाई की गई। इन स्थानों पर निरीक्षण के दौरान खाद्य सुरक्षा से जुड़े नियमों का पालन नहीं होने की बात सामने आई। यह कार्रवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि शहर के चर्चित और नियमित रूप से बड़ी संख्या में ग्राहकों को भोजन उपलब्ध कराने वाले प्रतिष्ठानों की निगरानी के बावजूद यदि खाद्य सुरक्षा संबंधी कमियां सामने आ सकती हैं, तो खुले में भोजन तैयार करने और बेचने वाले छोटे कारोबारों की स्थिति की जांच भी जरूरी मानी जा रही है।
हालांकि, किसी एक इलाके या स्टॉल को बिना निरीक्षण के असुरक्षित बताना उचित नहीं होगा। लेकिन सड़क किनारे खाद्य कारोबार में स्वच्छता बनाए रखना अपेक्षाकृत चुनौतीपूर्ण हो सकता है। विशेष रूप से बारिश के मौसम में पानी, कीचड़, कचरे और नालियों के आसपास खाद्य पदार्थों को खुले में रखना जोखिम बढ़ा सकता है।
मानसून में बढ़ जाती है चुनौती
पुणे में मानसून के दौरान कई इलाकों में सड़क किनारे पानी जमा होने, कीचड़ और कचरे की समस्या देखी जाती है। ऐसे स्थानों के आसपास यदि खाद्य स्टॉल लगाए जाते हैं तो दुकानदारों के सामने खाद्य पदार्थों को धूल, गंदे पानी और अन्य बाहरी स्रोतों से बचाने की चुनौती रहती है।
पानी-पुरी और भेल जैसे खाद्य पदार्थों में पानी की गुणवत्ता विशेष महत्व रखती है। इसी तरह ताजे जूस के लिए इस्तेमाल होने वाला पानी, बर्फ, फलों की सफाई और गिलास की स्वच्छता भी महत्वपूर्ण है। मोमोज, रोल्स और चाइनीज व्यंजनों में इस्तेमाल होने वाली सामग्री को उचित तापमान पर रखना और कच्चे तथा पके खाद्य पदार्थों को अलग रखना भी खाद्य सुरक्षा की बुनियादी जरूरतों में शामिल है।
खुले में रखे खाद्य पदार्थों पर सवाल
स्ट्रीट फूड की सबसे बड़ी विशेषता उसकी आसानी से उपलब्धता और कम कीमत है। यही वजह है कि छात्र, कर्मचारी, मजदूर और अन्य लोग रोजाना इन स्टॉलों से भोजन या नाश्ता करते हैं। लेकिन खुले में रखे खाद्य पदार्थों पर धूल, कीड़े और दूषित पानी के संपर्क का खतरा बना रहता है।
मानसून में यह चुनौती और बढ़ सकती है। यदि खाद्य सामग्री ढककर नहीं रखी गई हो या खाद्य पदार्थ तैयार करने के लिए इस्तेमाल होने वाला पानी साफ न हो, तो उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य पर असर पड़ने की आशंका रहती है। इसलिए स्ट्रीट फूड कारोबारियों के लिए स्वच्छ पानी, साफ बर्तन, ढकी हुई खाद्य सामग्री और कचरे के उचित निपटान जैसी व्यवस्थाएं बेहद जरूरी हैं।
नियमों का पालन जरूरी
महाराष्ट्र FDA की खाद्य लाइसेंसिंग व्यवस्था के तहत खाद्य कारोबारों को उनके कारोबार के स्तर के अनुसार लाइसेंस या पंजीकरण की आवश्यकता होती है। विभाग के अनुसार खाद्य कारोबारों के लिए लाइसेंस और पंजीकरण की प्रक्रिया FoSCoS के माध्यम से संचालित होती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि खाद्य सुरक्षा केवल बड़े होटल और रेस्तरां तक सीमित विषय नहीं है। सड़क किनारे खाद्य पदार्थ बेचने वाले कारोबारियों को भी स्वच्छता और सुरक्षित भोजन के बुनियादी नियमों का पालन करना चाहिए। इसके लिए केवल कार्रवाई करना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि नियमित निरीक्षण के साथ छोटे कारोबारियों को प्रशिक्षण और जागरूकता उपलब्ध कराना भी जरूरी है।
ग्राहकों की भी अहम भूमिका
खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में ग्राहकों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। लोग भोजन खरीदते समय यह देख सकते हैं कि दुकान के आसपास सफाई है या नहीं, खाद्य सामग्री ढककर रखी गई है या नहीं और दुकानदार साफ पानी तथा साफ बर्तनों का इस्तेमाल कर रहा है या नहीं। संदिग्ध गुणवत्ता या अस्वच्छ परिस्थितियों में भोजन से बचना उपभोक्ताओं के लिए पहला सुरक्षा कदम हो सकता है।
FDA ने भी खाद्य गुणवत्ता और सुरक्षा से जुड़ी शिकायतों को लेकर नागरिकों से शिकायत दर्ज कराने की अपील की है।
पुणे में बड़े खाद्य प्रतिष्ठानों के खिलाफ हुई कार्रवाई ने खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बहस तेज कर दी है। अब जरूरत इस बात की है कि निगरानी व्यवस्था का दायरा छोटे और सड़क किनारे संचालित होने वाले खाद्य कारोबार तक भी प्रभावी ढंग से पहुंचे। खासकर मानसून के मौसम में साफ पानी, स्वच्छ वातावरण, सुरक्षित भंडारण और खाद्य पदार्थों की उचित ढंग से हैंडलिंग सुनिश्चित करना जरूरी होगा। आखिर शहर की लोकप्रिय स्ट्रीट फूड संस्कृति तभी सुरक्षित रह सकती है, जब स्वाद के साथ स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा को भी बराबर महत्व दिया जाए।