नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय महासचिव स्मृति ईरानी ने अपनी राजनीतिक यात्रा, पार्टी में मिले अनुभवों और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ अपने राजनीतिक सफर को लेकर खुलकर बात की है। हाल ही में एक पॉडकास्ट में पहुंचीं स्मृति ईरानी ने अपने सियासी जीवन के कई पहलुओं का जिक्र किया। इस दौरान उन्होंने देवेंद्र फडणवीस की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्हें देखकर गर्व होता है। साल 2024 के लोकसभा चुनाव में अमेठी सीट से हार के बाद अपेक्षाकृत कम राजनीतिक सक्रियता में नजर आईं ईरानी के इस बयान ने एक बार फिर उनके राजनीतिक सफर को चर्चा में ला दिया है।

पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान स्मृति ईरानी ने भाजपा में अपने लंबे सफर को याद किया। उन्होंने उन नेताओं और सहयोगियों के बारे में भी बात की जिनके साथ उन्होंने पार्टी संगठन में काम किया है। इसी दौरान देवेंद्र फडणवीस का जिक्र आया। ईरानी ने उनके साथ पार्टी में काम करने के अपने अनुभव साझा किए और उनकी राजनीतिक उपलब्धियों को लेकर खुशी जाहिर की।

स्मृति ईरानी ने कहा कि देवेंद्र फडणवीस को देखकर उन्हें गर्व महसूस होता है। दोनों नेताओं ने भाजपा संगठन में अलग-अलग जिम्मेदारियां निभाते हुए लंबा राजनीतिक सफर तय किया है। फडणवीस बाद में महाराष्ट्र की राजनीति के प्रमुख चेहरों में शामिल हुए और मुख्यमंत्री पद तक पहुंचे। स्मृति ईरानी ने भी संगठन से लेकर केंद्र सरकार तक कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली हैं।

उनकी राजनीतिक यात्रा काफी उतार-चढ़ाव वाली रही है। टेलीविजन की दुनिया से राजनीति में प्रवेश करने वाली स्मृति ईरानी ने भाजपा संगठन में सक्रिय भूमिका निभाने के बाद चुनावी राजनीति में अपनी पहचान बनाई। पार्टी ने उन्हें अलग-अलग समय पर संगठनात्मक जिम्मेदारियां दीं और वह केंद्र सरकार में भी मंत्री रहीं।

स्मृति ईरानी की राजनीति में सबसे ज्यादा चर्चा अमेठी लोकसभा सीट को लेकर हुई। यह सीट लंबे समय तक कांग्रेस के सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक गढ़ों में गिनी जाती रही। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में ईरानी ने अमेठी से कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ चुनाव लड़ा था। उस चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने इसके बाद भी क्षेत्र में अपनी राजनीतिक सक्रियता बनाए रखी।

2019 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने एक बार फिर अमेठी से चुनाव मैदान में उतरकर राहुल गांधी को हराया। इस जीत ने उन्हें राष्ट्रीय राजनीति में भाजपा के प्रमुख चेहरों में और मजबूती से स्थापित किया। कांग्रेस के परंपरागत गढ़ में मिली जीत को भाजपा की बड़ी राजनीतिक उपलब्धियों में गिना गया।

हालांकि 2024 के लोकसभा चुनाव में परिस्थितियां बदल गईं। अमेठी से भाजपा प्रत्याशी के तौर पर मैदान में उतरीं स्मृति ईरानी को कांग्रेस उम्मीदवार किशोरी लाल शर्मा से हार का सामना करना पड़ा। इस हार के बाद वह पहले की तुलना में सार्वजनिक और चुनावी राजनीतिक गतिविधियों में कम नजर आईं।

इसी पृष्ठभूमि में उनका हालिया पॉडकास्ट महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसमें उन्होंने चुनावी हार तक सीमित रहने के बजाय अपनी पूरी राजनीतिक यात्रा के अनुभवों पर चर्चा की। बातचीत से यह संकेत भी मिलता है कि वह अपने लंबे राजनीतिक सफर को अलग-अलग दौर और अनुभवों के रूप में देखती हैं।

देवेंद्र फडणवीस का उल्लेख करते हुए उनकी टिप्पणी भाजपा के भीतर लंबे समय से साथ काम करने वाले नेताओं के आपसी संबंधों की झलक भी देती है। दोनों नेता उस पीढ़ी के भाजपा नेताओं में शामिल रहे हैं जिन्होंने संगठन में विभिन्न जिम्मेदारियां निभाते हुए राष्ट्रीय और राज्य स्तर की राजनीति में अपनी जगह बनाई।

फडणवीस ने महाराष्ट्र की राजनीति में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली हैं। वहीं स्मृति ईरानी ने केंद्र में मानव संसाधन विकास, सूचना एवं प्रसारण, कपड़ा तथा महिला एवं बाल विकास जैसे मंत्रालयों से जुड़ी जिम्मेदारियां निभाई हैं। ऐसे में दोनों की राजनीतिक यात्राएं अलग-अलग क्षेत्रों में आगे बढ़ीं, लेकिन पार्टी संगठन उनका साझा आधार रहा।

स्मृति ईरानी की पहचान एक मुखर वक्ता के रूप में भी रही है। संसद से लेकर चुनावी सभाओं तक वह भाजपा की ओर से विपक्ष पर आक्रामक तरीके से निशाना साधती रही हैं। खासकर कांग्रेस और राहुल गांधी के खिलाफ उनके राजनीतिक मुकाबले ने उन्हें लंबे समय तक सुर्खियों में बनाए रखा।

2024 में चुनावी हार के बाद उनकी अगली राजनीतिक भूमिका को लेकर लगातार अटकलें लगती रही हैं। अब भाजपा में राष्ट्रीय महासचिव की जिम्मेदारी संभालते हुए वह संगठनात्मक स्तर पर सक्रिय हैं। ऐसे में पॉडकास्ट में उनकी राजनीतिक यात्रा को लेकर हुई बातचीत को उनके मौजूदा राजनीतिक दौर के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।

राजनीति में चुनावी जीत और हार दोनों को किसी नेता के सफर का हिस्सा माना जाता है। स्मृति ईरानी का राजनीतिक करियर भी इसका उदाहरण रहा है। 2014 में अमेठी से हार, 2019 में उसी सीट पर बड़ी जीत और फिर 2024 में पराजय—इन तीन चुनावों ने उनकी राजनीतिक पहचान पर गहरा प्रभाव डाला।

हालिया बातचीत में फडणवीस के प्रति गर्व व्यक्त करने वाली उनकी टिप्पणी भी चर्चा में है। लंबे राजनीतिक सफर में साथ काम करने वाले सहयोगी को मुख्यमंत्री के रूप में देखने को उन्होंने गर्व से जोड़ा। यह बयान व्यक्तिगत राजनीतिक संबंधों और संगठन में साथ काम करने के अनुभवों को सामने लाता है।

अब स्मृति ईरानी की आगे की राजनीतिक भूमिका पर भी नजर रहेगी। राष्ट्रीय महासचिव के रूप में उनके पास पार्टी संगठन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। अमेठी की हार के बाद सार्वजनिक राजनीति में अपेक्षाकृत कम नजर आने के बाद उनका यह संवाद उनके समर्थकों और राजनीतिक पर्यवेक्षकों के लिए दिलचस्प बन गया है।

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