लखनऊ : उत्तर प्रदेश में औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए योगी आदित्यनाथ सरकार ने निजी डेवलपर्स के लिए बड़ी पहल की है। अब निजी कंपनियां और डेवलपर्स भी प्रदेश में बिजनेस पार्क विकसित कर सकेंगे। इसके लिए राज्य सरकार ने निजी बिजनेस पार्क विकास योजना को मंजूरी दे दी है। नई नीति के तहत निजी डेवलपर्स को जमीन से लेकर जरूरी सुविधाओं तक कई तरह की सहूलियतें उपलब्ध कराई जाएंगी। सरकार का उद्देश्य प्रदेश में निवेश बढ़ाने के साथ रोजगार के नए अवसर पैदा करना और आईटी, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर तथा नॉलेज आधारित सेवाओं को बढ़ावा देना है।
नई नीति के तहत निजी डेवलपर्स को बिजनेस पार्क विकसित करने के लिए जमीन 45 साल की लीज पर दी जाएगी। इस लीज अवधि को आगे 45 साल के लिए बढ़ाने का भी प्रावधान रखा गया है। इस तरह डेवलपर्स को लंबे समय तक परियोजना संचालित करने का अवसर मिलेगा। दूसरे राज्यों में बिजनेस पार्क के लिए जमीन की लीज अवधि आमतौर पर 30 से 35 साल तक बताई जाती है। ऐसे में उत्तर प्रदेश की नीति निजी निवेशकों के लिए अपेक्षाकृत अधिक आकर्षक मानी जा रही है।
सरकार की ओर से जारी नीति में बिजनेस पार्क विकसित करने के लिए पात्रता भी निर्धारित की गई है। बिजनेस कंसोर्टियम, रियल एस्टेट निवेश ट्रस्ट यानी REIT और सूचीबद्ध कंपनियां इस योजना के तहत औद्योगिक और व्यावसायिक पार्क विकसित कर सकेंगी। इसके लिए संबंधित कंपनी या समूह की न्यूनतम नेटवर्थ 1000 करोड़ रुपये होना जरूरी होगा। इसके अलावा पिछले तीन वित्तीय वर्षों में औसत वार्षिक टर्नओवर कम से कम 500 करोड़ रुपये होना चाहिए।
बिजनेस कंसोर्टियम के लिए रियल एस्टेट डेवलपमेंट और कॉमर्शियल बिजनेस के क्षेत्र में कम से कम सात साल का अनुभव भी जरूरी रखा गया है। सरकार का मानना है कि इस तरह की शर्तों से अनुभवी और आर्थिक रूप से मजबूत डेवलपर्स ही परियोजनाओं में शामिल होंगे, जिससे बड़े स्तर पर गुणवत्तापूर्ण बिजनेस पार्क विकसित किए जा सकेंगे।
नई नीति के अनुसार बिजनेस पार्क का न्यूनतम क्षेत्रफल 10 एकड़ होगा। जरूरत और परियोजना की क्षमता के अनुसार इसे 20 से 30 एकड़ तक विकसित किया जा सकेगा। 10 एकड़ क्षेत्रफल वाले बिजनेस पार्क को तीन साल के भीतर विकसित करने की शर्त रखी गई है। इससे सरकार की कोशिश रहेगी कि जमीन आवंटित होने के बाद परियोजनाएं लंबे समय तक अधर में न लटकें और निर्धारित समय में व्यावसायिक गतिविधियां शुरू हो सकें।
बिजनेस पार्क के भीतर अलग-अलग क्षेत्रों के लिए जगह भी निर्धारित की गई है। कुल क्षेत्रफल का कम से कम 50 प्रतिशत हिस्सा आईटी कंपनियों, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर और नॉलेज आधारित सेवा इकाइयों के लिए आरक्षित रखना होगा। इससे प्रदेश में आईटी और सेवा क्षेत्र से जुड़े बड़े निवेश को आकर्षित करने में मदद मिलने की उम्मीद है। वहीं, अधिकतम 10 प्रतिशत हिस्से में फूड कोर्ट, रिटेल आउटलेट और कर्मचारियों व आगंतुकों के लिए अन्य आवश्यक सुविधाएं विकसित की जा सकेंगी।
पार्क के बाकी हिस्से में प्रशिक्षण केंद्र और कौशल विकास केंद्र जैसी सुविधाएं विकसित करने का प्रावधान है। इसका उद्देश्य स्थानीय युवाओं को अलग-अलग क्षेत्रों में रोजगार के लिए आवश्यक प्रशिक्षण और कौशल उपलब्ध कराना है। सरकार को उम्मीद है कि बिजनेस पार्क बनने से केवल निवेश ही नहीं आएगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर कुशल कामगारों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
नीति के तहत निजी डेवलपर को न्यूनतम अग्रिम भूमि प्रीमियम के रूप में पांच प्रतिशत और राजस्व हिस्सेदारी के रूप में सात प्रतिशत का प्रावधान पूरा करना होगा। परियोजना विकसित करने वाली कंपनी को सभी जरूरी अनापत्ति प्रमाण पत्र यानी NOC, स्वीकृतियां और परमिट खुद हासिल करने होंगे। इसके अलावा भवन उपविधियों के अनुसार लेआउट, वास्तुशिल्प और डिजाइन तैयार करना भी जरूरी होगा।
सरकार निजी बिजनेस पार्क के लिए उपयुक्त जमीन उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी करेगी। औद्योगिक विकास प्राधिकरण के माध्यम से निजी डेवलपर्स को जमीन उपलब्ध कराई जाएगी। इसके लिए उपयुक्त भूखंडों का निर्धारण किया जाएगा और नीलामी के जरिए डेवलपर्स को जमीन आवंटित की जाएगी। नीति में सिंगल विंडो सिस्टम के जरिए विभिन्न अनुमोदनों और स्वीकृतियों को आसान बनाने की व्यवस्था भी की गई है।
इसके अलावा बिजनेस पार्क विकसित करने वाली कंपनी को जमीन के रजिस्ट्रेशन पर स्टांप ड्यूटी में 100 प्रतिशत छूट देने का प्रावधान भी रखा गया है। सरकार की इन रियायतों का उद्देश्य निजी क्षेत्र के बड़े निवेशकों को उत्तर प्रदेश की ओर आकर्षित करना है।
महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु जैसे राज्यों में पहले से बिजनेस पार्क विकसित हो चुके हैं। अब उत्तर प्रदेश भी इस क्षेत्र में निजी निवेश को बढ़ावा देने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। नई नीति के जरिए सरकार आईटी, सेवा क्षेत्र, कॉमर्शियल गतिविधियों और कौशल विकास को एक ही स्थान पर बढ़ावा देने की कोशिश कर रही है। जानकारों के मुताबिक, यदि परियोजनाएं तय समय में जमीन पर उतरती हैं तो इससे प्रदेश के प्रमुख शहरों में रोजगार, निवेश और व्यावसायिक गतिविधियों को नई गति मिल सकती है।
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