उत्तर प्रदेश

रसोइयों से खतरा बताकर कमरे में बंद हुई हेडमास्टर पुलिस ने संभाला मोर्चा

Ratna Netam
12 Aug 2026 3:52 PM IST
रसोइयों से खतरा बताकर कमरे में बंद हुई हेडमास्टर पुलिस ने संभाला मोर्चा
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कानपुर : उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले से सरकारी स्कूल में हुए एक अजीबोगरीब घटनाक्रम का मामला सामने आया है। घाटमपुर क्षेत्र के एक कंपोजिट विद्यालय में महिला हेडमास्टर ने खुद को स्कूल के एक कमरे में बंद कर लिया। हेडमास्टर ने स्कूल में काम करने वाली रसोइयों से अपनी जान को खतरा बताते हुए पुलिस को सूचना दी। जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और उन्हें कमरे से बाहर आने के लिए समझाने का प्रयास किया, लेकिन वह दरवाजा खोलने को तैयार नहीं हुईं। बाद में खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) भी मौके पर पहुंचीं और उन्होंने भी काफी देर तक हेडमास्टर को समझाने की कोशिश की। आखिरकार हेडमास्टर की बहन के स्कूल पहुंचने के बाद उन्होंने दरवाजा खोला और कमरे से बाहर आईं।
मामला कानपुर के घाटमपुर के साढ़ क्षेत्र स्थित महोलिया कंपोजिट विद्यालय का बताया जा रहा है। मंगलवार को स्कूल पहुंचने के कुछ समय बाद महिला हेडमास्टर सत्यवती ने अचानक पुलिस को फोन कर अपनी जान को खतरा होने की बात कही। उन्होंने आरोप लगाया कि स्कूल में काम करने वाली रसोइयां हथियार लेकर स्कूल आती हैं और उनसे उन्हें खतरा है। पुलिस को सूचना देने के बाद हेडमास्टर ने खुद को स्कूल के एक कमरे में बंद कर लिया।
पुलिस जब मौके पर पहुंची तो उसने हेडमास्टर से दरवाजा खोलकर बाहर आने की अपील की। पुलिसकर्मियों ने उन्हें समझाने का प्रयास किया, लेकिन उन्होंने किसी की बात नहीं मानी। वह कमरे के अंदर ही बनी रहीं। इसी बीच घटना की जानकारी शिक्षा विभाग के अधिकारियों को भी दी गई। सूचना मिलने पर खंड शिक्षा अधिकारी पूनम वर्मा विद्यालय पहुंचीं।
बीईओ पूनम वर्मा ने भी हेडमास्टर से बातचीत करने की कोशिश की। उन्होंने उन्हें समझाया कि वह कमरे से बाहर आएं और अपनी शिकायत अधिकारियों के सामने रखें। लेकिन काफी देर तक समझाने के बावजूद हेडमास्टर ने दरवाजा नहीं खोला। इस दौरान स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे, शिक्षक और आसपास के ग्रामीण भी मौके पर जमा हो गए। सभी लोग यह देखकर हैरान थे कि स्कूल की प्रधानाध्यापिका खुद को कमरे में बंद किए हुए हैं और पुलिस तथा शिक्षा विभाग के अधिकारी उन्हें बाहर आने के लिए समझा रहे हैं।
बताया जा रहा है कि अंत में हेडमास्टर ने अपनी बहन को फोन करके स्कूल बुलाया। बहन के मौके पर पहुंचने के बाद उन्होंने हेडमास्टर को समझाया। काफी देर तक बातचीत के बाद हेडमास्टर दरवाजा खोलने के लिए तैयार हुईं और कमरे से बाहर आईं। इसके बाद मामले को शांत कराया गया।
घटना के दौरान स्कूल पहुंचे कुछ ग्रामीणों ने हेडमास्टर की कार्यशैली को लेकर भी सवाल उठाए। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि विद्यालय में पिछले करीब एक महीने से मिड-डे मील नहीं बनाया जा रहा है। ग्रामीणों ने इस मामले की जांच कराने की मांग की है। हालांकि, मिड-डे मील को लेकर लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है।
महोलिया कंपोजिट विद्यालय में दो शिक्षामित्र और तीन सहायक अध्यापक भी तैनात हैं। स्कूल की हेडमास्टर सत्यवती कानपुर की रहने वाली बताई गई हैं। जानकारी के अनुसार, उनका स्कूल की दो रसोइयों निर्मला और अनीता के साथ करीब एक महीने पहले विवाद हुआ था। इसी विवाद के बाद हेडमास्टर मेडिकल लीव पर चली गई थीं।
बताया जा रहा है कि विवाद का एक कारण स्कूल में रसोइयों के काम करने के समय को लेकर भी था। हेडमास्टर का कहना था कि जितनी देर वह विद्यालय में रहती हैं, उतनी देर रसोइयों को भी विद्यालय में मौजूद रहना चाहिए। इसी बात को लेकर उनके और रसोइयों के बीच विवाद होने की जानकारी सामने आई है।
मंगलवार को स्कूल लौटने के बाद हेडमास्टर ने अचानक अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई और पुलिस को फोन कर दिया। इसके बाद खुद को कमरे में बंद करने से विद्यालय में अफरा-तफरी जैसी स्थिति बन गई। हालांकि, पुलिस और शिक्षा विभाग के अधिकारियों की मौजूदगी तथा उनकी बहन के समझाने के बाद स्थिति सामान्य हुई।
फिलहाल पूरे मामले में हेडमास्टर द्वारा लगाए गए आरोपों और ग्रामीणों की शिकायतों की अलग-अलग जांच की जरूरत बताई जा रही है। खास तौर पर रसोइयों द्वारा हथियार लेकर स्कूल आने के आरोप और मिड-डे मील नहीं बनने की शिकायत को लेकर शिक्षा विभाग की ओर से तथ्य जुटाए जा सकते हैं। अधिकारियों की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि विवाद की वास्तविक वजह क्या थी और लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।
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