उत्तर प्रदेश

अवैध निर्माण पर सुप्रीम कोर्ट का डंडा VIP भवनों पर भी कार्रवाई की तैयारी

Ratna Netam
12 Aug 2026 3:30 PM IST
अवैध निर्माण पर सुप्रीम कोर्ट का डंडा VIP भवनों पर भी कार्रवाई की तैयारी
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लखनऊ : अलीगंज अग्निकांड के बाद अवैध निर्माण और नियमों के विपरीत संचालित व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती अब निर्णायक चरण में पहुंचती दिखाई दे रही है। शीर्ष अदालत के निर्देश के बाद राजधानी में चिन्हित अवैध भवनों की जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। इसी महीने सुप्रीम कोर्ट के न्याय मित्र लखनऊ पहुंचकर चिह्नित भवनों का स्थलीय निरीक्षण करेंगे। इसके लिए लखनऊ विकास प्राधिकरण यानी एलडीए ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर है कि सुप्रीम कोर्ट के दायरे में आए 51 भवनों में प्रभावशाली और वीवीआईपी लोगों से जुड़ी संपत्तियां भी शामिल बताई जा रही हैं। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि क्या नियमों का उल्लंघन मिलने पर इन भवनों पर भी बुलडोजर चलेगा।
एलडीए ने सुप्रीम कोर्ट के निशाने पर आए सभी 51 भवनों का विस्तृत रिकॉर्ड तैयार कर लिया है। प्राधिकरण ने प्रत्येक भवन से संबंधित कई महत्वपूर्ण जानकारियां जुटाई हैं। इनमें भवन में कितनी मंजिलें हैं, निर्माण कब और किस अवधि में हुआ, निर्माण के समय संबंधित विभाग में कौन अधिकारी तैनात थे, भवन के खिलाफ पहले क्या कार्रवाई की गई और यदि कार्रवाई नहीं हुई तो उसके पीछे क्या कारण रहा, जैसी जानकारियां शामिल हैं। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि न्याय मित्र के निरीक्षण के दौरान किसी भी भवन से संबंधित जानकारी अधूरी नहीं रहनी चाहिए।
जानकारी के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट द्वारा चिन्हित 51 संपत्तियों में कई प्रभावशाली लोगों से संबंधित भवन भी शामिल हैं। इनमें एक पूर्व राज्यपाल, पूर्व कैबिनेट मंत्री, विधायक, बड़े कारोबारी और वरिष्ठ अधिवक्ताओं से जुड़े भवनों का भी उल्लेख किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि एक पूर्व राज्यपाल और एक पूर्व कैबिनेट मंत्री से संबंधित तीन-तीन भवन जांच के दायरे में हैं। इसके अलावा एक राज्य मंत्री से जुड़ा भवन भी अवैध निर्माण की श्रेणी में बताया गया है। हालांकि इन संपत्तियों पर अंतिम कार्रवाई संबंधित जांच, रिकॉर्ड और न्यायिक निर्देशों के आधार पर ही तय होगी।
सुप्रीम कोर्ट के न्याय मित्र इन भवनों का मौके पर निरीक्षण करेंगे। माना जा रहा है कि यह निरीक्षण अदालत के सामने वास्तविक स्थिति रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। न्याय मित्र अपनी रिपोर्ट में भवनों की स्थिति, निर्माण नियमों के उल्लंघन और संबंधित प्राधिकरण की ओर से अब तक की गई कार्रवाई का उल्लेख कर सकते हैं। इसके बाद यह रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट के सामने रखी जाएगी।
अलीगंज अग्निकांड को सुप्रीम कोर्ट ने गंभीरता से लिया है। अदालत ने भवनों में सुरक्षा मानकों और निर्माण नियमों की अनदेखी को लेकर चिंता जताई है। इसके साथ ही राज्य सरकार से विशेष जांच दल यानी एसआईटी की रिपोर्ट भी मांगी गई है। एसआईटी की जांच में उन अधिकारियों की भूमिका भी सामने आ सकती है जिन पर नियमों की अनदेखी या कथित लापरवाही के आरोप हैं। मामले की सुनवाई सितंबर के मध्य प्रस्तावित बताई जा रही है। ऐसे में उससे पहले न्याय मित्र का स्थलीय निरीक्षण काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने देश के कई शहरों में अनधिकृत निर्माण और रिहायशी इलाकों में नियमों के विपरीत चल रही व्यावसायिक गतिविधियों पर भी सख्त रुख अपनाया है। अदालत की चिंता यह है कि भवन निर्माण नियमों और सुरक्षा मानकों की अनदेखी के कारण आग जैसी दुर्घटनाओं में लोगों की जान जोखिम में पड़ सकती है। दिल्ली और लखनऊ में सामने आई आग की घटनाओं का उल्लेख करते हुए अदालत ने सक्षम प्राधिकारों को नियमों का उल्लंघन करने वाले निर्माणों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
इसी क्रम में एलडीए को लखनऊ शहर में नियमों की अनदेखी कर किए गए निर्माण और रिहायशी संपत्तियों में संचालित व्यावसायिक गतिविधियों का सर्वे करने को कहा गया है। एलडीए के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने अदालत को बताया है कि 51 संपत्तियों की पहचान कर कार्रवाई शुरू कर दी गई है। उन्होंने यह भी बताया कि प्राधिकरण के पूरे क्षेत्र में फॉलोअप की प्रक्रिया युद्धस्तर पर जारी है और इसे निर्धारित समयसीमा में पूरा किया जाएगा।
अब सबकी नजर न्याय मित्र के लखनऊ दौरे और उनकी रिपोर्ट पर है। खासतौर पर वीवीआईपी से जुड़ी संपत्तियों को लेकर यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और यदि निर्माण नियमों का उल्लंघन साबित होता है तो प्राधिकरण किस तरह की कार्रवाई करता है। सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बीच फिलहाल यह साफ है कि अवैध निर्माण के मामलों में कार्रवाई को लेकर एलडीए पर भी गंभीर दबाव है। हालांकि किसी भी भवन पर बुलडोजर चलाने का अंतिम फैसला रिकॉर्ड, नियमों के उल्लंघन और सक्षम प्राधिकारी के आदेश के आधार पर ही होगा।
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