बरेली: उत्तर प्रदेश के बरेली में साइबर ठगी के एक बड़े गिरोह के खिलाफ कार्रवाई करते हुए 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार आरोपियों में एक पूर्व डिप्टी जेलर का बेटा भी शामिल बताया जा रहा है। आरोप है कि यह गिरोह देश के अलग-अलग हिस्सों में लोगों को निशाना बनाकर 10 करोड़ रुपये से ज्यादा की साइबर ठगी कर चुका है। मामले के सामने आने के बाद गिरोह से जुड़े अन्य लोगों और पैसों के लेन-देन की जानकारी जुटाई जा रही है।
आरोपी अलग-अलग तरीकों से लोगों को अपने जाल में फंसाते थे। साइबर ठगी के जरिए लोगों से रकम हासिल करने के बाद पैसों को विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर किया जाता था। गिरोह से जुड़े लोग कथित तौर पर बैंक खातों और ऑनलाइन माध्यमों का इस्तेमाल कर ठगी की रकम को इधर से उधर भेजते थे, ताकि पैसों के वास्तविक स्रोत और अंतिम ठिकाने का पता लगाना मुश्किल हो सके।
जांच के दौरान सामने आई जानकारी के आधार पर एक साथ कई आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की गई। इसके बाद पूर्व डिप्टी जेलर के बेटे समेत कुल 13 लोगों को गिरफ्तार किया गया। आरोपियों से पूछताछ के जरिए यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि गिरोह में और कितने लोग शामिल हैं और उनका नेटवर्क किन-किन राज्यों तक फैला हुआ था।
प्रारंभिक जांच में इस नेटवर्क के जरिए 10 करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी किए जाने की बात सामने आई है। देशभर में अलग-अलग लोगों को साइबर ठगी का शिकार बनाए जाने का आरोप है। ऐसे में संबंधित मामलों और शिकायतों की जानकारी भी जुटाई जा रही है, जिससे ठगी की कुल रकम और पीड़ितों की वास्तविक संख्या का पता लगाया जा सके। साइबर ठगी के मामलों में बैंक खातों की भूमिका भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। इसलिए आरोपियों से जुड़े खातों, मोबाइल नंबरों और डिजिटल लेन-देन की पड़ताल की जा रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि ठगी से मिली रकम किन खातों में पहुंची और उसके बाद उसे कहां ट्रांसफर किया गया।
गिरफ्तार किए गए सभी आरोपियों से पूछताछ के आधार पर पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने की कोशिश की जा रही है। अगर जांच के दौरान अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है।
इस मामले ने एक बार फिर ऑनलाइन लेन-देन के दौरान सावधानी बरतने की जरूरत को सामने रखा है। अनजान व्यक्ति को बैंक खाते, ओटीपी, यूपीआई पिन या दूसरी गोपनीय जानकारी देना आर्थिक नुकसान का कारण बन सकता है। किसी संदिग्ध कॉल, मैसेज या ऑनलाइन लिंक पर भरोसा करने से पहले उसकी पुष्टि करना जरूरी है। फिलहाल 13 आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद मामले की जांच जारी है। गिरोह के पूरे नेटवर्क, ठगी के तरीके और 10 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम से जुड़े लेन-देन की विस्तृत जानकारी जांच पूरी होने के बाद स्पष्ट हो सकेगी।
Tags: