Hospice. धर्मशाला। धर्मशाला नगर निगम चुनावों में भाजपा ने एकतरफा जीत दर्ज करते हुए कांग्रेस को पूरी तरह से हाशिए पर धकेल दिया है। विधायक सुधीर शर्मा की चाणक्य नीति और उनके धर्मशाला मॉडल की बदौलत महापौर और उपमहापौर, दोनों पदों पर भाजपा ने निर्विरोध कब्जा जमाया है। विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस को पटखनी देने के बाद, अब नगर निगम में स्पष्ट बहुमत हासिल कर सुधीर शर्मा ने अपनी मजबूत राजनीतिक पकड़ और संगठनात्मक क्षमता का लोहा मनवाया है।
इस शानदार जीत के जरिए भाजपा ने न केवल स्थानीय निकाय पर अपना वर्चस्व कायम किया है, बल्कि एसटी समुदाय से महापौर चुनकर 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए एक मजबूत सियासी बिसात भी बिछा दी है। सुधीर शर्मा की चुनावी रणनीति का सबसे बड़ा हथियार युवा और नए चेहरों पर उनका भरोसा रहा। पार्टी के भीतर कुछ पुराने कार्यकर्ताओं की नाराजगी और असंतोष जरूर देखने को मिला, लेकिन शर्मा अपने फैसले पर अडिग रहे। चुनाव परिणामों ने उनके इस रिस्क को मास्टरस्ट्रोक में बदल दिया। 17 वार्डों वाली धर्मशाला नगर निगम में भाजपा समर्थित 11 उम्मीदवारों ने शानदार जीत दर्ज की, जबकि एक निर्दलीय पार्षद ने भी अपना समर्थन भाजपा को दे दिया। इसके उलट, कांग्रेस की स्थिति इतनी दयनीय रही कि उसके पार्षद महापौर और उपमहापौर के चुनाव में कोई प्रभावी चुनौती पेश करना तो दूर, मुकाबले में ही नजर न हीं आए।