भारत तिवारी के माता-पिता के बयान पर चौबे का सवाल

Update: 2026-08-09 15:47 GMT
Bihar बिहार। पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे ने शहीद भारत तिवारी से जुड़े मामले को लेकर प्रशांत किशोर पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि किसी के पास आरोपों से संबंधित कोई ठोस सबूत है, तो उसे सार्वजनिक रूप से सामने रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल आरोप लगाने और जवाबी आरोप लगाने से किसी गंभीर मामले पर सार्थक चर्चा नहीं हो सकती। अश्विनी चौबे ने कहा कि इस मामले में सबसे पहले यह स्पष्ट होना चाहिए कि भारत तिवारी के माता-पिता के बयान लिए गए हैं या नहीं। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि जब भारत तिवारी के माता-पिता को लेकर बातें कही गईं, तो क्या उनके बयान लिए गए? उन्होंने संबंधित पक्षों से इस बारे में स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यदि प्रशांत किशोर के पास कोई प्रमाण या सबूत है, तो उन्हें उसे सामने रखना चाहिए। चौबे के मुताबिक, सबूत सामने आने के बाद ही किसी मुद्दे पर गंभीर और सार्थक चर्चा की जा सकती है। उन्होंने कहा कि राजनीति में किसी व्यक्ति के खिलाफ आरोप और प्रत्यारोप लगना अलग बात है, लेकिन जब मामला किसी शहीद से जुड़ा हो तो इस तरह की बयानबाजी को उचित नहीं माना जा सकता। चौबे ने कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हो सकते हैं, लेकिन शहीदों और उनके परिवारों से जुड़े मामलों में सभी राजनीतिक दलों और नेताओं को संवेदनशीलता बरतनी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी आरोप को तथ्यों और प्रमाण के आधार पर ही सामने रखा जाना चाहिए, ताकि मामले को लेकर भ्रम की स्थिति न बने।
उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में जिम्मेदार लोगों को अपने बयानों के प्रभाव को समझना चाहिए। खासकर जब किसी शहीद का नाम किसी विवाद में आता है, तो बिना पर्याप्त प्रमाण के आरोप लगाने से बचना चाहिए। अश्विनी चौबे की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय सामने आई है, जब भारत तिवारी से जुड़े मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी जारी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी पक्ष के पास मामले से संबंधित कोई ठोस जानकारी या प्रमाण है, तो उसे जांच और सार्वजनिक विमर्श के सामने रखा जाना चाहिए। उन्होंने दोहराया कि राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप सामान्य हो सकते हैं, लेकिन शहीद के मामले में तथ्यों और संवेदनशीलता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उनके बयान के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।
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