भारत ने बोलीविया को भेजी 8 MT जरूरी दवाएं
बोलीविया की मदद को आगे आया भारत, भेजीं जीवनरक्षक दवाएं
Delhi दिल्ली। भारत ने ग्लोबल साउथ के साझेदार देश बोलीविया की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने के लिए 8 मीट्रिक टन जीवनरक्षक और आवश्यक दवाओं की खेप भेजी है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने रविवार को इसकी जानकारी देते हुए कहा कि भारत हमेशा एकजुटता और साझा प्रगति के माध्यम से सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए तैयार है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत की ओर से भेजी गई दवाओं की यह खेप बोलीविया की सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षमता को समर्थन देने के उद्देश्य से भेजी गई है। इसमें जीवन बचाने वाली और आवश्यक दवाएं शामिल हैं, जिनका उपयोग सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने में किया जा सकेगा।
भारत लंबे समय से विकासशील और ग्लोबल साउथ के देशों के साथ स्वास्थ्य, शिक्षा, क्षमता निर्माण और मानवीय सहायता के क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देता रहा है। दवाओं की यह खेप भी इसी सहयोग की दिशा में एक कदम मानी जा रही है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत का दृष्टिकोण केवल तत्काल सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि साझेदार देशों के साथ सहयोग और साझा प्रगति को आगे बढ़ाना भी इसका उद्देश्य है। भारत ने विभिन्न अवसरों पर जरूरतमंद देशों को दवाएं, चिकित्सा उपकरण और अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई है।
बोलीविया को भेजी गई 8 मीट्रिक टन दवाओं की सहायता से वहां की सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं को आवश्यक चिकित्सा संसाधन उपलब्ध कराने में मदद मिलने की उम्मीद है। खास तौर पर जीवनरक्षक और जरूरी दवाओं की उपलब्धता स्वास्थ्य सेवाओं की क्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। विदेश मंत्रालय ने अपने संदेश में भारत की ‘वसुधैव कुटुंबकम’ और सहयोग की भावना को भी रेखांकित किया। मंत्रालय ने कहा कि भारत एकजुटता और साझा विकास के माध्यम से सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए हमेशा तैयार है।
भारत और बोलीविया के संबंधों में स्वास्थ्य सहयोग एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है। दोनों देशों के बीच विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देने के प्रयास जारी हैं। ऐसे में चिकित्सा सहायता की यह पहल द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ ग्लोबल साउथ के देशों के बीच सहयोग को मजबूत करने वाली मानी जा रही है। भारत की ओर से भेजी गई यह सहायता ऐसे समय में सामने आई है जब विकासशील देशों के बीच स्वास्थ्य सेवाओं और आवश्यक चिकित्सा संसाधनों की उपलब्धता को लेकर अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर जोर दिया जा रहा है। भारत ने एक बार फिर जरूरत के समय अपने साझेदार देशों के साथ खड़े रहने की प्रतिबद्धता जताई है।