ग्रेनाइट कारोबारी केस में नए खुलासों से हड़कंप शानमुगम ने मांगी विस्तृत जांच
चेन्नई। तमिलनाडु में ग्रेनाइट कारोबारी आर. वीरमणि से जुड़े POCSO मामले को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। सीपीएम के तमिलनाडु राज्य सचिव पी. शानमुगम ने मामले की विस्तृत और निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्षों के दौरान कई नाबालिग लड़कियों के कथित यौन शोषण से जुड़ी जानकारी सामने आ रही है और मामले में नए-नए लोगों के नाम भी जांच के दायरे में आ रहे हैं। पुलिस ने अब पुराने जांच अधिकारियों की भूमिका की भी पड़ताल शुरू की है।शानमुगम ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि मामले को लेकर सामने आ रही जानकारियां गंभीर हैं। उन्होंने अधिकारियों और प्रभावशाली लोगों की संभावित भूमिका की जांच किए जाने की मांग की। उनका कहना था कि यदि मामले को दबाने या जांच को प्रभावित करने का कोई प्रयास हुआ है तो इसकी भी विस्तृत जांच होनी चाहिए। फिलहाल ऐसे आरोपों की जांच जारी है और इन पर अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं आया है।
पुलिस जांच का केंद्र ग्रेनाइट कारोबारी आर. वीरमणि हैं। अलग-अलग रिपोर्टों में उनकी उम्र 84 से 85 वर्ष बताई गई है। वीरमणि को अगस्त में दो कथित सहयोगियों शांति और महेंद्र सिम्हन के साथ गिरफ्तार किया गया था। उन पर POCSO एक्ट और सूचना प्रौद्योगिकी कानून की धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं। मामले में आरोप अभी अदालत में साबित नहीं हुए हैं।मामले की शुरुआत अक्टूबर 2025 में हुई थी, जब पुलिस को एक पेन ड्राइव सौंपी गई। इसमें एक वीडियो था, जिसमें एक नाबालिग लड़की के कथित यौन उत्पीड़न का मामला सामने आया। वीडियो के आधार पर मामला दर्ज किया गया, लेकिन शुरुआती जांच में पीड़िता की पहचान नहीं हो पाने का हवाला देते हुए पुलिस ने बाद में केस बंद करने की अनुमति मांगी थी।
मामले ने तब नया मोड़ लिया जब विशेष POCSO अदालत ने पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार नहीं की और आगे की जांच का आदेश दिया। इसके बाद जांच दोबारा आगे बढ़ी और पुलिस ने वीडियो में दिखाई देने वाली पीड़िता की पहचान करने के साथ अन्य संभावित पीड़िताओं तक पहुंचने का प्रयास शुरू किया। जांच अधिकारियों ने कई महिलाओं के बयान दर्ज किए हैं, जिनके बारे में आरोप है कि कथित घटनाओं के समय वे नाबालिग थीं।पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित घटनाओं का दायरा कितना बड़ा था और क्या ये कई वर्षों तक जारी रहीं। जांच में कुछ ऐसे सुराग मिलने का दावा किया गया है जो वर्ष 2003 या उससे पहले की कथित घटनाओं की ओर संकेत करते हैं। पुलिस ने अभी संभावित पीड़ितों की अंतिम संख्या सार्वजनिक नहीं की है। इसलिए बड़ी संख्या में बच्चों के शामिल होने से जुड़े दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
जांच का दायरा अब केवल मूल आरोपों तक सीमित नहीं है। चेन्नई पुलिस उन अधिकारियों की भूमिका की भी जांच कर रही है जिन्होंने पहले इस मामले को संभाला था। एक सहायक पुलिस आयुक्त और दो इंस्पेक्टरों को पूछताछ के लिए समन जारी किए जाने की जानकारी सामने आई है। जांचकर्ता यह पता लगा रहे हैं कि पहले की जांच में किसी तरह की लापरवाही हुई थी या किसी ने जांच को प्रभावित करने की कोशिश की थी।पुलिस कथित तौर पर वरिष्ठ अधिकारियों से जुड़े कुछ वित्तीय लेन-देन की भी जांच कर रही है। हालांकि जांच अभी जारी है और किसी अधिकारी की आपराधिक जिम्मेदारी तय नहीं हुई है। इसी वजह से पुलिस की आंतरिक जांच के नतीजे महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
मामले में एक पूर्व कर्मचारी गणेशन को भी गिरफ्तार किया गया है। पुलिस का आरोप है कि उसके मोबाइल फोन में वीरमणि और एक नाबालिग से जुड़ी आपत्तिजनक वीडियो सामग्री मिली। जांचकर्ता यह पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि यह वीडियो उसके पास कैसे पहुंचा, किसने भेजा और उसने इसकी सूचना पुलिस को क्यों नहीं दी। उसके मोबाइल से किसी डेटा को हटाए जाने की संभावना की भी जांच की जा रही है।इसके अलावा पुलिस ने वीरमणि से जुड़े कई परिसरों पर तलाशी अभियान चलाया है। इनमें उनका कार्यालय और चेन्नई के तेनामपेट इलाके का एक गेस्ट हाउस शामिल है। जांच अधिकारी जब्त सामग्री और डिजिटल रिकॉर्ड का विश्लेषण कर रहे हैं। उनका फोकस यह पता लगाने पर भी है कि कथित वीडियो किन-किन लोगों के पास पहुंचे और क्या इनका इस्तेमाल किसी को धमकाने या पैसे वसूलने के लिए किया गया था।
इस मामले ने तमिलनाडु में राजनीतिक विवाद भी पैदा कर दिया है। मौजूदा सरकार के कुछ मंत्रियों ने पिछली DMK सरकार के कार्यकाल में मामले को पर्याप्त रूप से आगे नहीं बढ़ाने का आरोप लगाया है। दूसरी ओर DMK ने इन आरोपों को खारिज किया है। पार्टी से जुड़े वरिष्ठ अधिवक्ता एन.आर. एलंगो ने कहा है कि उस समय उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई की थी और पर्याप्त सबूत नहीं मिलने की स्थिति में आगे की जांच स्थगित हुई थी। उन्होंने कथित कवर-अप के आरोपों के समर्थन में सबूत पेश करने की मांग की है।
सीपीएम नेता पी. शानमुगम ने भी कहा है कि वीरमणि के खिलाफ अलग-अलग समय पर शिकायतें सामने आने की बात कही जा रही है और इसलिए पूरे घटनाक्रम की जांच जरूरी है। उनके अनुसार जांच में यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि पहले मिली शिकायतों पर क्या कार्रवाई की गई और क्या किसी स्तर पर मामले को प्रभावित करने की कोशिश हुई।फिलहाल पुलिस जांच कई दिशाओं में आगे बढ़ रही है। संभावित पीड़ितों की पहचान, डिजिटल साक्ष्य, पुराने अधिकारियों की भूमिका और मामले को कथित रूप से दबाने के आरोप सभी जांच के दायरे में हैं। वीरमणि और अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत में साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होगा।