बेंगलुरु। कर्नाटक सरकार की ओर से शुक्रवार को आयोजित ‘सिविल सर्वेंट्स डे’ कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार अलग अंदाज में नजर आए। मुख्यमंत्री खुद सिविल सर्वेंट्स की यूनिफॉर्म पहनकर कार्यक्रम में पहुंचे और इसी पोशाक में मंच से संबोधित किया। मुख्यमंत्री के यूनिफॉर्म पहनने के पीछे एक बच्ची और उसकी मां से जुड़ी घटना बताई गई, जिसने सार्वजनिक सेवा से जुड़े कर्मचारियों के प्रति सम्मान के सवाल को सामने रखा।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने एक सिविल सर्वेंट और उसकी बेटी से जुड़ी घटना का जिक्र किया। बताया गया कि महिला कर्मचारी की बेटी एक निजी स्कूल में पढ़ती थी। एक दिन महिला अपनी यूनिफॉर्म में बेटी के स्कूल पहुंची थी।
इसी दौरान बच्ची की एक सहपाठी ने कथित तौर पर उसकी मां की यूनिफॉर्म को लेकर ताना मारा। सहपाठी ने बच्ची से कहा कि उसकी मां ने कॉर्पोरेशन की यूनिफॉर्म पहन रखी है और उससे दूर बैठने को कहा। आरोप है कि बच्ची को धक्का भी दिया गया।
इस घटना ने कर्मचारी की बेटी को आहत किया। मुख्यमंत्री ने इसी प्रसंग के जरिए यूनिफॉर्म पहनकर सार्वजनिक सेवा करने वाले कर्मचारियों के काम और सम्मान की ओर ध्यान आकर्षित किया।
मुख्यमंत्री का स्वयं उसी तरह की यूनिफॉर्म पहनकर कार्यक्रम में शामिल होना कर्मचारियों के प्रति सम्मान प्रदर्शित करने के संदेश से जोड़ा गया। उन्होंने कार्यक्रम में मौजूद कर्मचारियों को संबोधित करते हुए उनके काम की अहमियत पर जोर दिया।
शहरों में नागरिक सुविधाओं और सार्वजनिक सेवाओं को बनाए रखने में जमीनी स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। सफाई से लेकर अन्य नागरिक सेवाओं तक बड़ी संख्या में कर्मचारी रोजाना सार्वजनिक स्थानों पर काम करते हैं। उनकी यूनिफॉर्म उनके काम और जिम्मेदारी की पहचान होती है।
बच्ची से जुड़ी घटना के माध्यम से यह सवाल भी सामने आया कि किसी व्यक्ति के पेशे या उसकी यूनिफॉर्म के आधार पर उसके साथ भेदभाव या अपमानजनक व्यवहार नहीं किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में यूनिफॉर्म पहनकर कर्मचारियों के प्रति सम्मान का संदेश देने की कोशिश की।
कार्यक्रम में कर्मचारियों के योगदान पर चर्चा करते हुए सार्वजनिक सेवाओं से जुड़े लोगों के प्रति सामाजिक नजरिए का मुद्दा भी प्रमुख रहा। किसी कर्मचारी के काम को उसकी सामाजिक प्रतिष्ठा से जोड़कर देखने के बजाय उसके योगदान को महत्व देने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के कार्यक्रम में यूनिफॉर्म पहनकर पहुंचने ने लोगों का ध्यान खींचा। सामान्य तौर पर सरकारी कार्यक्रमों में औपचारिक पोशाक में नजर आने वाले मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कर्मचारियों की यूनिफॉर्म को चुना।
इसके पीछे बताई गई बच्ची की घटना ने कार्यक्रम को भावनात्मक संदर्भ भी दिया। एक मां अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए यूनिफॉर्म में बेटी के स्कूल पहुंची थी, लेकिन उसकी पोशाक को लेकर बच्ची को सहपाठी की टिप्पणी का सामना करना पड़ा।
घटना में सहपाठी द्वारा कथित तौर पर बदबू आने की बात कहकर दूर बैठने और धक्का देने का उल्लेख भी किया गया। इस तरह का व्यवहार किसी बच्चे के मन पर असर डाल सकता है। मुख्यमंत्री ने इसी प्रसंग के जरिए कर्मचारियों और उनके परिवारों को सम्मान दिए जाने का संदेश दिया।
सार्वजनिक सेवा में लगे कर्मचारियों का काम अक्सर सीधे आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ा होता है। शहर की व्यवस्था सुचारू रखने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रहती है। ऐसे कर्मचारियों की पोशाक को कमतर समझने के बजाय उसे उनकी सेवा और जिम्मेदारी से जोड़कर देखने की जरूरत पर कार्यक्रम में ध्यान केंद्रित किया गया।
‘सिविल सर्वेंट्स डे’ के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में सरकार ने कर्मचारियों के योगदान को सामने रखने का प्रयास किया। मुख्यमंत्री की मौजूदगी और उनका कर्मचारियों जैसी यूनिफॉर्म पहनना कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रहा।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की कि काम का स्वरूप किसी व्यक्ति के सम्मान को कम नहीं करता। सार्वजनिक सेवा से जुड़ा प्रत्येक कर्मचारी अपनी जिम्मेदारी के जरिए समाज और शहर की व्यवस्था में योगदान देता है।
कर्मचारियों के बच्चों के साथ उनके माता-पिता के पेशे या पोशाक को लेकर भेदभाव का व्यवहार भी चिंता का विषय है। स्कूलों में बच्चों के बीच समानता और एक-दूसरे के परिवारों के प्रति सम्मान की भावना विकसित करना जरूरी माना जाता है।
कार्यक्रम में सामने आई घटना ने इसी सामाजिक संवेदनशीलता की ओर ध्यान खींचा। मुख्यमंत्री के यूनिफॉर्म पहनने को कर्मचारियों के साथ एकजुटता और उनके काम के सम्मान के प्रतीक के तौर पर प्रस्तुत किया गया।
डीके शिवकुमार जून 2026 से कर्नाटक के मुख्यमंत्री हैं। शुक्रवार के कार्यक्रम में उनकी मौजूदगी और यूनिफॉर्म ने कर्मचारियों के सम्मान से जुड़े संदेश को केंद्र में ला दिया।
कार्यक्रम के दौरान यह बात उभरकर सामने आई कि सार्वजनिक सेवाओं में लगे कर्मचारियों के योगदान को केवल उनके पद या काम की प्रकृति से नहीं आंका जाना चाहिए। उनके श्रम का सीधा संबंध नागरिक सुविधाओं और शहर की रोजमर्रा की व्यवस्था से होता है।
मुख्यमंत्री का कर्मचारियों की यूनिफॉर्म पहनकर मंच पर आना इसी सोच को प्रतीकात्मक रूप से सामने रखने का प्रयास रहा। खासकर उस बच्ची से जुड़ी घटना के बाद, जिसकी मां की यूनिफॉर्म को लेकर कथित तौर पर उसकी सहपाठी ने अपमानजनक टिप्पणी की थी।
इस घटना के माध्यम से मुख्यमंत्री ने समाज में श्रम और कर्मचारियों के प्रति सम्मान बढ़ाने का संदेश दिया। कार्यक्रम में यह भी रेखांकित हुआ कि किसी व्यक्ति की नौकरी, पोशाक या आर्थिक-सामाजिक स्थिति उसके सम्मान का पैमाना नहीं होनी चाहिए।
सिविल सर्वेंट्स डे के कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार का अलग अंदाज इस कारण चर्चा में रहा। कर्मचारियों की यूनिफॉर्म पहनकर पहुंचे मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में उस घटना को सामने रखा, जिसमें एक कर्मचारी की बेटी को उसकी मां की यूनिफॉर्म के कारण कथित तौर पर अपमान का सामना करना पड़ा था। इस प्रसंग के जरिए कर्मचारियों के काम और उनकी गरिमा के प्रति सम्मान बनाए रखने का संदेश दिया गया।