New Delhi. नई दिल्ली। भारत सरकार ने 1960 की सिंधु जल समझौता को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का ऐलान किया है. जल शक्ति मंत्रालय की सचिव देबाश्री मुखर्जी ने पाकिस्तान के जल संसाधन मंत्रालय के सचिव सैयद अली मुर्तजा को पत्र लिखकर इस फैसले की जानकारी दी. पत्र में कहा गया, "यह पत्र भारत सरकार द्वारा पाकिस्तान सरकार को सिंधु जल संधि 1960 में संशोधन के लिए भेजे गए नोटिस के संदर्भ में है, जो संधि के अनुच्छेद XII (3) के तहत है. इन संदेशों में उन मूलभूत परिवर्तनों का उल्लेख किया गया है, जो संधि के लागू होने के बाद से हुए हैं और संधि के विभिन्न अनुच्छेदों के तहत दायित्वों के पुनर्मूल्यांकन की आवश्यकता को रेखांकित करते हैं."


पत्र में जनसंख्या में भारी बदलाव, स्वच्छ ऊर्जा विकास की तत्काल आवश्यकता और जल बंटवारे से संबंधित पुरानी मान्यताओं में परिवर्तन जैसे कारणों को संधि के पुनर्मूल्यांकन का आधार बताया गया. मुखर्जी ने लिखा, "इन परिवर्तनों में जनसंख्या में उल्लेखनीय बदलाव और स्वच्छ ऊर्जा के विकास को गति देने की आवश्यकता शामिल है." पत्र में पाकिस्तान पर संधि के उल्लंघन का आरोप लगाया गया. इसमें कहा गया, "संधि का सम्मान करना इसका मूल सिद्धांत है, लेकिन पाकिस्तान द्वारा जम्मू-कश्मीर में निरंतर सीमा पार
आतंकवाद
ने भारत के संधि के तहत अधिकारों के पूर्ण उपयोग में बाधा डाली है." इसके अलावा, पाकिस्तान ने भारत के वार्ता के अनुरोध को नजरअंदाज कर संधि का उल्लंघन किया है. भारत ने स्पष्ट किया कि सिंधु जल संधि को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है. यह कदम भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव को और गहरा सकता है, खासकर हाल के पहलगाम आतंकी हमले के बाद. यह फैसला भारत की कूटनीतिक रणनीति में एक महत्वपूर्ण कदम है।
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