कोलकाता। चुनाव आयोग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर विपक्षी दलों की नाराजगी के बीच पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक अहम घटनाक्रम सामने आया है। पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने अपने लंबे समय के राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी रहे मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव एम.ए. बेबी से फोन पर बातचीत की है। दोनों नेताओं के बीच चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, SIR और विपक्षी एकजुटता के मुद्दे पर चर्चा हुई।

यह बातचीत ऐसे समय हुई है जब चुनाव आयोग को लेकर हाल में सामने आई रिपोर्ट के बाद विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, वाम दलों और अन्य विपक्षी पार्टियों के नेताओं ने उनकी भूमिका को लेकर अलग-अलग स्तर पर आलोचना की है और इस्तीफे की मांग भी उठाई है। विपक्ष की ओर से SIR प्रक्रिया को लेकर भी गंभीर आपत्तियां जताई गई हैं।

सबसे अधिक चर्चा ममता बनर्जी और CPM के बीच शुरू हुए इस संवाद की हो रही है। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस और वाम दल लंबे समय तक एक-दूसरे के मुख्य राजनीतिक विरोधी रहे हैं। राज्य में वाम मोर्चे की करीब तीन दशक से अधिक पुरानी सरकार को हटाकर ही ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस सत्ता में आई थी। इसके बाद दोनों दलों के बीच राजनीतिक टकराव लगातार जारी रहा।

इसी पृष्ठभूमि में ममता बनर्जी का CPM महासचिव एम.ए. बेबी को सीधे फोन करना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार दोनों नेताओं ने विपक्षी दलों के एक साथ आने और चुनाव आयोग तथा चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर साझा अभियान की जरूरत पर चर्चा की। ममता बनर्जी ने इस मुद्दे पर INDIA गठबंधन के स्तर पर भी व्यापक बैठक बुलाने की बात कही है।

ममता बनर्जी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को भी संदेश भेजकर विपक्षी INDIA गठबंधन की बैठक बुलाने का आग्रह किया है। विपक्षी दलों की बैठक 30 सितंबर को दिल्ली में होने की संभावना जताई गई है। इस बैठक में चुनाव आयोग, SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त से जुड़े विवाद पर साझा रणनीति पर चर्चा हो सकती है।

हालांकि CPM इस नए राजनीतिक संपर्क को लेकर फिलहाल सतर्क रुख अपनाती दिखाई दे रही है। पार्टी ने अभी इसे पश्चिम बंगाल में किसी नए राजनीतिक गठबंधन या तृणमूल कांग्रेस के साथ औपचारिक समझौते के रूप में पेश नहीं किया है। रिपोर्टों में कहा गया है कि बातचीत मुख्य रूप से चुनाव आयोग और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर विपक्षी दलों के बीच समन्वय को लेकर हुई।

वाम दलों के लिए स्थिति राजनीतिक रूप से संवेदनशील है। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस ही लंबे समय से उनकी प्रमुख प्रतिद्वंद्वी रही है। ऐसे में राष्ट्रीय स्तर पर किसी मुद्दे पर तृणमूल के साथ खड़ा होना और राज्य की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाए रखना CPM के लिए संतुलन का सवाल बन सकता है।

ममता बनर्जी चुनाव आयोग को लेकर पिछले कुछ दिनों से लगातार आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए हैं और उनके पद छोड़ने की मांग की है। उन्होंने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और SIR प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए विपक्षी दलों से संयुक्त आंदोलन की अपील भी की है। ये आरोप ममता बनर्जी और विपक्षी नेताओं के राजनीतिक दावे हैं, जबकि चुनाव आयोग अपने फैसलों को संस्थागत और कानूनी प्रक्रिया के तहत लिया गया बताता रहा है।

विपक्षी दलों की ओर से उठाए गए मुद्दों में मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियां, SIR के दौरान मतदाताओं के नाम हटाए जाने के आरोप और चुनाव आयोग के भीतर फैसलों को लेकर सामने आए मतभेद शामिल हैं। विपक्ष इन घटनाक्रमों को चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता से जोड़ रहा है। चुनाव आयोग ने इन आरोपों पर अलग-अलग मौकों पर अपना पक्ष रखा है और निर्धारित प्रक्रियाओं के तहत काम किए जाने की बात कही है।

ममता बनर्जी और CPM के बीच संपर्क पर भाजपा ने भी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा नेताओं ने इसे बदले हुए राजनीतिक समीकरणों से जोड़ते हुए तंज कसा है। पश्चिम बंगाल भाजपा नेताओं का कहना है कि जो दल लंबे समय तक एक-दूसरे के विरोधी रहे, वे अब चुनाव आयोग के मुद्दे पर करीब आने की कोशिश कर रहे हैं।

हालांकि फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि इस बातचीत का असर पश्चिम बंगाल की चुनावी राजनीति पर भी पड़ेगा। दोनों दलों के बीच राज्य स्तर पर राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और पुराने मतभेद अभी भी मौजूद हैं। बातचीत का वर्तमान केंद्र चुनाव आयोग और SIR को लेकर विपक्षी दलों की साझा रणनीति है।

INDIA गठबंधन की संभावित बैठक में कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, वाम दलों और अन्य विपक्षी पार्टियों के नेता शामिल हो सकते हैं। इस दौरान ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष की मांग, SIR और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर संयुक्त रुख तैयार करने की कोशिश की जा सकती है।

फिलहाल ममता बनर्जी और एम.ए. बेबी के बीच हुई फोन वार्ता ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई चर्चा शुरू कर दी है। लंबे समय तक कट्टर राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी रहे तृणमूल और CPM के बीच संवाद की शुरुआत भले ही चुनाव आयोग के मुद्दे तक सीमित हो, लेकिन इससे विपक्षी राजनीति में बदलते समीकरणों की ओर ध्यान जरूर गया है। अब नजर 30 सितंबर की संभावित INDIA गठबंधन बैठक और उसके बाद दोनों दलों के अगले कदम पर रहेगी।

Tags: