नगर निकाय क्षेत्र में आने वाले NH पर भी लागू

Update: 2026-08-01 09:51 GMT
शिमला। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एक महत्त्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि यदि कोई राष्ट्रीय राजमार्ग किसी नगर निगम या नगर निकाय की सीमा के भीतर से गुजरता है, तो भी वह राष्ट्रीय राजमार्ग ही रहेगा। ऐसी सडक़ों के किनारे अनधिकृत निर्माणों पर हिमाचल प्रदेश रोडसाइड लैंड कंट्रोल एक्ट के तहत की जाने वाली डिमोलिशन/तोडफ़ोड़ की कार्रवाई पूरी तरह कानूनी रूप से वैध है। यह आदेश न्यायाधीश राकेश कैंथला ने राज्य सरकार द्वारा दायर अपील को स्वीकार करते हुए सुनाया। हाई कोर्ट ने जिला अदालत सोलन के उस फैसले को पलट दिया, जिसमें अवैध निर्माण तोडऩे के कलेक्टर के आदेश पर रोक लगा दी थी। यह विवाद सोलन जिला के कंडाघाट क्षेत्र का है। यहां एक व्यक्ति ने सडक़ किनारे चार मंजिला इमारत का निर्माण किया था। तत्कालीन सब-डिवीजनल कलेक्टर ने पाया कि यह भवन हिमाचल प्रदेश रोडसाइड कंट्रोल एक्ट की धारा 5 का उल्लंघन करके बनाया गया है और इसे चार मीटर चौड़ाई व 11 मीटर लंबाई की सीमा तक गिराने का आदेश जारी कर दिया।

भवन मालिक ने इस आदेश के खिलाफ सिविल सूट दायर किया, जिसे निचली अदालत ट्रायल कोर्ट ने खारिज कर दिया। इसके बाद मामला जिला अदालत/अपीलीय अदालत पहुंचा, जिसने यह कहते हुए डिमोलिशन के आदेश को रद्द कर दिया कि यह सडक़ सोलन नगर परिषद के तहत आती है, इसलिए राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम, 1956 के तहत इसे एनएच नहीं माना जा सकता और इस पर कलेक्टर का क्षेत्राधिकार नहीं है। इसके खिलाफ राज्य सरकार ने 2007 में हाई कोर्ट में अपील की थी। हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कानून की एक बड़ी चूक को उजागर किया। कोर्ट ने पाया कि मूल राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम, 1956 की धारा 2(1) में पहले यह प्रावधान था कि नगरपालिका क्षेत्रों में आने वाले हिस्सों को छोडक़र बाकी हिस्सों को ही राष्ट्रीय राजमार्ग माना जाएगा। हालांकि केंद्र सरकार ने 24 जनवरी, 1997 को कानून में संशोधन करके इन शब्दों को हमेशा के लिए हटा दिया था। चूंकि यह केस जनवरी 1998 में दायर हुआ था, इसलिए इस पर नया संशोधित कानून लागू होता था। जिला अदालत ने इस महत्त्वपूर्ण कानूनी बदलाव पर ध्यान न देकर पुराना कानून लागू करने की गंभीर भूल की थी।
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