नवयौवन दर्शन के बाद पुरी में पहली 'पतितपावन संध्या आरती', श्रद्धालुओं ने किए दिव्य दर्शन

Update: 2026-07-14 15:33 GMT
Puri पुरी। ओडिशा के श्री जगन्नाथ धाम पुरी में महाप्रभु श्रीजगन्नाथ के नवयौवन दर्शन के बाद पहली पतितपावन संध्या आरती (Patitapabana Sandhya Alati Darshan) श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में संपन्न हुई। इस विशेष अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर परिसर और सिंहद्वार के बाहर एकत्र हुए तथा महाप्रभु के दिव्य स्वरूप के दर्शन कर आरती में शामिल हुए।
नवयौवन दर्शन भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के अनासरा (विश्राम) काल के बाद होने वाला पहला सार्वजनिक दर्शन होता है। इसके बाद आयोजित पतितपावन संध्या आरती का धार्मिक महत्व अत्यंत विशेष माना जाता है। इस दौरान श्रद्धालु महाप्रभु की संध्या आरती के दर्शन कर सुख, समृद्धि और कल्याण की कामना करते हैं।
आरती के दौरान पूरे मंदिर परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार, घंटियों की ध्वनि और भक्ति संगीत से आध्यात्मिक वातावरण बना रहा। श्रद्धालुओं ने भगवान जगन्नाथ के दर्शन कर स्वयं को धन्य महसूस किया। मंदिर प्रशासन ने दर्शन के लिए विशेष व्यवस्थाएं की थीं ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
पतितपावन स्वरूप के दर्शन विशेष रूप से उन श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं जो किसी कारणवश मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश नहीं कर पाते। सिंहद्वार पर विराजमान पतितपावन भगवान के दर्शन कर भक्त अपनी आस्था व्यक्त करते हैं। अब श्रद्धालुओं की नजर आगामी विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा के धार्मिक आयोजनों पर है, जिसके लिए पुरी में तैयारियां तेज़ी से जारी हैं। मंदिर प्रशासन और जिला प्रशासन ने सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन और श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं।
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