सिलीगुड़ी: पश्चिम बंगाल में फर्जी दस्तावेजों के सहारे रह रहे संदिग्ध घुसपैठियों की पहचान के लिए पुलिस ने जांच अभियान तेज कर दिया है। राज्य सरकार के निर्देश के बाद सिलीगुड़ी पुलिस कमिश्नरेट ने जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्रों के पुराने रिकॉर्ड की पड़ताल शुरू कर दी है। पुलिस का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कहीं फर्जी दस्तावेजों के जरिए अवैध रूप से रहने वाले लोगों ने अपनी पहचान तो नहीं बनाई है।
इसी अभियान के तहत गुरुवार को सिलीगुड़ी पुलिस ने नगर निगम और विभिन्न ग्राम पंचायतों से अब तक जारी किए गए जन्म एवं मृत्यु प्रमाणपत्रों का रिकॉर्ड अपने कब्जे में ले लिया। इन दस्तावेजों की जांच कर संदिग्ध मामलों की पहचान की जाएगी। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, रिकॉर्ड सत्यापन के बाद थाना स्तर पर संदिग्ध लोगों की सूची तैयार की जाएगी और उसके बाद घर-घर जाकर जांच की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
पुलिस ने नगर निगम और पंचायतों से जुटाए रिकॉर्ड
सिलीगुड़ी पुलिस कमिश्नरेट की अलग-अलग टीमों ने विभिन्न क्षेत्रों में जाकर दस्तावेजों को अपने कब्जे में लिया। प्रधाननगर थाना पुलिस चंपासारी, भक्तिनगर-डाबग्राम समेत कई ग्राम पंचायत कार्यालयों पहुंची। वहीं एनजेपी थाना पुलिस ने फूलबाड़ी ग्राम पंचायत और सिलीगुड़ी थाना पुलिस ने नगर निगम मुख्यालय से जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्रों से जुड़े रिकॉर्ड लिए।
इन दस्तावेजों में प्रमाणपत्र के लिए दिए गए आवेदन पत्र, संबंधित व्यक्ति के पहचान पत्र, निवास प्रमाण और अस्पताल से जुड़े रिकॉर्ड भी शामिल हैं। पुलिस इन सभी दस्तावेजों की जांच कर यह पता लगाएगी कि प्रमाणपत्र वास्तविक हैं या किसी तरह की अनियमितता के जरिए बनाए गए हैं।
फर्जी प्रमाणपत्रों की जांच में जुटी पुलिस
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जन्म प्रमाणपत्र जारी करने के लिए बच्चे के माता-पिता के पहचान पत्र और अस्पताल के रिकॉर्ड जरूरी होते हैं। वहीं मृत्यु प्रमाणपत्र के लिए मृत व्यक्ति की पहचान, चिकित्सकीय पुष्टि और अंतिम संस्कार से जुड़े दस्तावेज आवश्यक होते हैं।
सिलीगुड़ी नगर निगम में वर्ष 2000 से ऑनलाइन व्यवस्था शुरू हो चुकी है। इसके बाद ग्राम पंचायतों में भी ऑनलाइन रिकॉर्ड प्रणाली लागू की गई। इसके बावजूद पुलिस को आशंका है कि कुछ मामलों में नियमों को दरकिनार कर फर्जी प्रमाणपत्र जारी किए गए हैं।
जांच के दौरान पुलिस को ऐसे कई रिकॉर्ड मिले हैं, जिनकी प्रमाणिकता पर सवाल उठ रहे हैं। अब इनकी विस्तृत जांच की जाएगी।
जनप्रतिनिधियों की भूमिका की भी होगी जांच
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यदि जांच में फर्जी प्रमाणपत्र जारी होने की पुष्टि होती है तो इसमें शामिल कर्मचारियों, बिचौलियों और अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इसके अलावा उन जनप्रतिनिधियों की भूमिका की भी जांच की जा सकती है, जिनकी सिफारिश या संस्तुति के आधार पर प्रमाणपत्र जारी किए गए हैं। पुलिस सभी रिकॉर्ड को स्कैन कर डिजिटल रूप में राज्य सरकार को भेजने की तैयारी कर रही है। वहीं मूल दस्तावेजों को पुलिस कमिश्नरेट में सुरक्षित रखा जाएगा।
पहले भी पकड़े जा चुके हैं फर्जी दस्तावेज गिरोह
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, पिछले कुछ वर्षों में सिलीगुड़ी नगर निगम के अलावा माटीगाड़ा, फांसीदेवा, नक्सलबाड़ी, डाबग्राम और फूलबाड़ी क्षेत्रों में फर्जी आधार कार्ड और वोटर कार्ड बनाने वाले कई गिरोह पकड़े जा चुके हैं।
इन मामलों में कई ऐसे दस्तावेज बरामद हुए थे, जिनमें स्थानीय जनप्रतिनिधियों की संस्तुति के आधार पर जन्म प्रमाणपत्र जारी किए गए थे। इसके अलावा अवैध घुसपैठ और तस्करी से जुड़े मामलों में गिरफ्तार कुछ विदेशी नागरिकों के पास भारतीय पहचान पत्र, वोटर कार्ड और पासपोर्ट तक मिलने के मामले सामने आए थे।
होल्डिंग सेंटर के जरिए कार्रवाई की तैयारी
पुलिस अब संदिग्ध दस्तावेजों के आधार पर लोगों की पहचान कर रही है। अधिकारियों के अनुसार, जांच पूरी होने के बाद संदिग्ध घुसपैठियों की सूची तैयार की जाएगी और नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस का कहना है कि फर्जी दस्तावेजों के जरिए पहचान बनाने वालों के साथ-साथ उन्हें दस्तावेज उपलब्ध कराने वाले नेटवर्क पर भी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का उद्देश्य अवैध गतिविधियों पर रोक लगाना और दस्तावेज व्यवस्था को अधिक मजबूत बनाना है।