हिमाचल प्रदेश

TGT भर्ती आरक्षण मामले में हिमाचल HC सख्त, आयोग से मांगा जवाब

Saba Naaz
23 July 2026 6:26 PM IST
TGT भर्ती आरक्षण मामले में हिमाचल HC सख्त, आयोग से मांगा जवाब
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हिमाचल प्रदेश: हाई कोर्ट ने टीजीटी (आर्ट्स) भर्ती में आरक्षण नियमों की व्याख्या को लेकर राज्य चयन आयोग को कड़ी नसीहत दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि कोई आरक्षित श्रेणी का अभ्यर्थी अपनी योग्यता और मेरिट के आधार पर सामान्य वर्ग की कटऑफ से अधिक अंक प्राप्त करता है, तो उसे सामान्य श्रेणी में शामिल किया जाना चाहिए। हाई कोर्ट ने कहा कि भर्ती एजेंसियों को आरक्षण और मेरिट के नियमों को लेकर किसी तरह का भ्रम नहीं होना चाहिए।

न्यायमूर्ति अजय मोहन गोयल की अदालत ने राज्य चयन आयोग को इस मामले में अपना पक्ष रखने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई 12 अगस्त को होगी।

यह मामला टीजीटी (आर्ट्स) भर्ती से जुड़ा है, जिसमें हिमाचल प्रदेश राज्य चयन आयोग ने पोस्ट कोड-25001 के तहत 25 मई 2025 को 425 पदों के लिए विज्ञापन जारी किया था। इसमें सामान्य वर्ग के लिए 151 पद और एससी (बीपीएल) श्रेणी के लिए 17 पद आरक्षित किए गए थे।

याचिकाकर्ता ने एससी (बीपीएल) श्रेणी के तहत आवेदन किया था। अंतिम परिणाम में उसे 64 अंक मिले और वह अपनी श्रेणी की वेटिंग लिस्ट में पहले स्थान पर थी। वहीं, एससी (बीपीएल) श्रेणी में चयनित अंतिम उम्मीदवार के अंक 64.58 थे। जबकि इस भर्ती में सामान्य वर्ग की कटऑफ 71.31 अंक रही थी।

सुनवाई के दौरान सामने आया कि एससी (बीपीएल) श्रेणी के तीन उम्मीदवारों ने सामान्य वर्ग की कटऑफ से अधिक अंक हासिल किए थे। इसके बावजूद आयोग ने उन्हें सामान्य श्रेणी में शामिल नहीं किया और उन्हें आरक्षित श्रेणी की सीटों पर ही रखा। इसी मुद्दे पर अदालत ने आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।

राज्य चयन आयोग ने कोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि क्षैतिज आरक्षण जैसे बीपीएल, पूर्व सैनिक और दिव्यांग श्रेणी में मेरिट के आधार पर सामान्य वर्ग में स्थानांतरण का नियम लागू नहीं होता। आयोग ने प्रदेश सरकार के कार्मिक विभाग के वर्ष 2014 के निर्देशों का हवाला दिया।

हालांकि, हाई कोर्ट ने आयोग के इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि आरक्षण व्यवस्था का उद्देश्य योग्य उम्मीदवारों को अवसर देना है, लेकिन मेरिट के सिद्धांत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के आरके सभ्रवाल बनाम पंजाब राज्य मामले के फैसले का भी उल्लेख किया।

अदालत ने कहा कि यदि कोई आरक्षित वर्ग का अभ्यर्थी सामान्य वर्ग के अंतिम चयनित उम्मीदवार के बराबर या उससे अधिक अंक प्राप्त करता है, तो उसे सामान्य सूची में शामिल किया जाना चाहिए। इससे आरक्षित वर्ग की सीट खाली होगी, जिसे उसी श्रेणी के अन्य योग्य उम्मीदवारों से भरा जा सकता है।

हाई कोर्ट के इस आदेश के बाद शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण नियमों को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अदालत का फैसला भविष्य की भर्तियों में भी महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है।

वहीं, राज्य चयन आयोग को अब दो सप्ताह के भीतर अदालत में अपना जवाब दाखिल करना होगा। आयोग को यह स्पष्ट करना होगा कि उसने मेरिट के आधार पर चयन प्रक्रिया में आरक्षित वर्ग के योग्य अभ्यर्थियों को सामान्य श्रेणी में क्यों शामिल नहीं किया।

मामले की अगली सुनवाई 12 अगस्त को तय की गई है। अब सभी की नजरें आयोग के जवाब और हाई कोर्ट के अंतिम निर्णय पर टिकी हैं।

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