देहरादून। उत्तराखंड में मौसम एक बार फिर करवट लेने वाला है। शुक्रवार से प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश की गतिविधियां बढ़ने की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग ने देहरादून समेत सात जिलों में बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है। इसके अलावा राज्य के शेष जिलों में भी गरज-चमक के साथ बारिश और आकाशीय बिजली गिरने की आशंका जताई गई है। मौसम के बदले मिजाज को देखते हुए लोगों और यात्रियों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक प्रदेश के पर्वतीय और मैदानी दोनों क्षेत्रों में बारिश का दौर देखने को मिल सकता है। कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है जबकि संवेदनशील क्षेत्रों में कम समय के दौरान तेज बारिश हो सकती है। देहरादून समेत सात जिलों के लिए जारी येलो अलर्ट का मतलब है कि लोगों को मौसम की गतिविधियों को लेकर सतर्क रहना होगा।

मानसून की सक्रियता के कारण देश के कई राज्यों में बारिश और तेज हवाओं की चेतावनी दी गई है। उत्तराखंड में भी बारिश की संभावना बनी हुई है। लोगों से बाहर निकलने से पहले ताजा मौसम पूर्वानुमान देखने और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है।

उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में तेज बारिश के कारण भूस्खलन और पहाड़ियों से पत्थर गिरने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में पर्वतीय मार्गों पर यात्रा करने वाले वाहन चालकों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। बारिश के दौरान सड़क पर मलबा आने, पेड़ गिरने और रास्ते बाधित होने जैसी घटनाएं सामने आ सकती हैं। प्रशासन को संवेदनशील सड़कों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों पर निगरानी रखने के लिए कहा जा सकता है।

देहरादून के शहरी क्षेत्रों में तेज बारिश होने पर निचले इलाकों में जलभराव की समस्या पैदा हो सकती है। नालों के आसपास रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। कम समय में अधिक बारिश होने से सड़कें पानी में डूब सकती हैं और यातायात प्रभावित हो सकता है। वाहन चालकों को जलभराव वाले रास्तों से गुजरने से पहले पानी की गहराई का आकलन करना चाहिए।

राज्य के अन्य जिलों में भी आकाशीय बिजली चमकने और तेज बारिश की संभावना जताई गई है। बिजली कड़कने के दौरान लोगों को खुले मैदान, पेड़ों, बिजली के खंभों और ऊंचे स्थानों से दूर रहना चाहिए। खेतों में काम कर रहे लोगों को खराब मौसम दिखाई देने पर तुरंत किसी सुरक्षित और पक्की इमारत में चले जाना चाहिए। खुले स्थान पर मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने और धातु की वस्तुओं के पास खड़े होने से भी बचना चाहिए।

बारिश का असर चारधाम यात्रा और अन्य पर्वतीय यात्राओं पर भी पड़ सकता है। बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री की यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं को यात्रा शुरू करने से पहले सड़क तथा मौसम की जानकारी प्राप्त करनी चाहिए। पहाड़ी रास्तों पर बारिश के दौरान दृश्यता कम हो सकती है। फिसलन और मलबे के कारण वाहनों को नियंत्रित करना भी मुश्किल हो सकता है।

यात्रियों को नदी-नालों और बरसाती गदेरों के पास जाने से बचना चाहिए। पहाड़ों में अचानक तेज बारिश होने पर छोटे नालों का जलस्तर भी तेजी से बढ़ सकता है। पर्यटकों को झरनों के बहुत करीब जाकर फोटो या वीडियो बनाने से बचने की सलाह दी जाती है। किसी स्थान पर पानी का बहाव बढ़ने लगे तो तुरंत ऊंचे और सुरक्षित स्थान की ओर जाना चाहिए।

मौसम विभाग की चेतावनी के बाद जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग को सतर्क रहने की आवश्यकता है। भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में मशीनें और कर्मचारियों की तैनाती रखने से बाधित मार्गों को जल्द खोला जा सकता है। पुलिस, एसडीआरएफ, अग्निशमन और स्वास्थ्य विभाग को भी किसी आपात स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया देने के लिए तैयार रहना होगा।

बारिश से किसानों को लाभ मिलने की उम्मीद है लेकिन तेज बारिश और आकाशीय बिजली कृषि कार्यों को प्रभावित कर सकती है। खेतों में तैयार फसल और सब्जियों को नुकसान होने की आशंका रहती है। किसानों को मौसम पूर्वानुमान देखकर ही सिंचाई, कीटनाशक छिड़काव और फसल कटाई से जुड़े काम करने चाहिए। बिजली चमकने के दौरान खेत में रुकना सुरक्षित नहीं है।

नगर निकायों के सामने जल निकासी व्यवस्था को सुचारु रखने की चुनौती होगी। नालियों में जमा कचरा तेज बारिश के दौरान जलभराव की समस्या बढ़ा सकता है। संवेदनशील इलाकों में पहले से सफाई और निकासी की व्यवस्था सुनिश्चित करने से लोगों को राहत मिल सकती है। संबंधित विभागों को ऐसे स्थानों की पहचान कर निगरानी बढ़ानी होगी जहां हर वर्ष बारिश के दौरान पानी भरता है।

स्कूल जाने वाले बच्चों, कार्यालय पहुंचने वाले कर्मचारियों और दोपहिया वाहन चालकों को बारिश के दौरान विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। तेज हवा या बिजली चमकने पर सुरक्षित स्थान पर रुकना बेहतर होगा। वाहन चलाते समय गति कम रखनी चाहिए और सामने वाले वाहन से पर्याप्त दूरी बनाए रखनी चाहिए। पहाड़ी मार्गों पर रात के समय अनावश्यक यात्रा से बचना भी सुरक्षित माना जाता है।

येलो अलर्ट का उद्देश्य लोगों को डराना नहीं बल्कि संभावित मौसम संबंधी खतरे के प्रति पहले से सावधान करना है। घर से निकलने से पहले छाता या रेनकोट रखने के साथ मोबाइल फोन चार्ज रखना उपयोगी हो सकता है। आवश्यक दवाएं, पीने का पानी और आपातकालीन संपर्क नंबर भी साथ रखने चाहिए। किसी सड़क या पुल पर पानी का तेज बहाव हो तो उसे पार करने का प्रयास नहीं करना चाहिए।

शुक्रवार से मौसम में प्रस्तावित बदलाव के बाद तापमान में भी कुछ गिरावट महसूस हो सकती है। बारिश होने से गर्मी और उमस से राहत मिलने की संभावना है, लेकिन लगातार बरसात होने पर जनजीवन प्रभावित हो सकता है। पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को अपने आसपास की ढलानों में दरार, मिट्टी खिसकने या पानी के असामान्य बहाव जैसे संकेतों पर ध्यान देना चाहिए।

फिलहाल देहरादून समेत सात जिलों में येलो अलर्ट जारी किया गया है, जबकि बाकी जिलों में भी तेज बारिश और आकाशीय बिजली की आशंका 

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