देहरादून। उत्तराखंड में स्वाइन फ्लू का संक्रमण लगातार बढ़ रहा है। गुरुवार को जांचे गए 115 नमूनों में 25 लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई। नए संक्रमितों में 11 मरीज देहरादून और 14 मरीज प्रदेश के दूसरे क्षेत्रों से संबंधित हैं। नए मामले सामने आने के बाद स्वाइन फ्लू के कुल मरीजों की संख्या बढ़कर 408 हो गई है। संक्रमण के बढ़ते आंकड़ों ने स्वास्थ्य विभाग और आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है।

स्वास्थ्य विभाग की ओर से संदिग्ध मरीजों के नमूनों की लगातार जांच कराई जा रही है। गुरुवार को आई रिपोर्ट में लगभग हर पांचवें नमूने में संक्रमण की पुष्टि हुई। देहरादून में सबसे अधिक 11 नए मरीज मिले हैं। इसके अलावा अन्य क्षेत्रों से आए 14 नमूने भी संक्रमित पाए गए। स्वास्थ्य अधिकारियों ने अस्पतालों को संदिग्ध लक्षण वाले मरीजों की निगरानी करने और आवश्यक सावधानियां बरतने के निर्देश दिए हैं।

स्वाइन फ्लू को एच1एन1 इन्फ्लुएंजा भी कहा जाता है। यह एक संक्रामक श्वसन रोग है, जो संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या उसके बेहद करीब संपर्क में आने से फैल सकता है। मौसम में बदलाव और भीड़भाड़ वाली जगहों पर संक्रमण फैलने की आशंका बढ़ जाती है। समय रहते पहचान और उपचार शुरू होने पर अधिकांश मरीज स्वस्थ हो जाते हैं, लेकिन कुछ संवेदनशील लोगों के लिए यह गंभीर रूप ले सकता है।

स्वाइन फ्लू के सामान्य लक्षणों में बुखार, खांसी, गले में दर्द, नाक बहना या बंद होना, सिरदर्द, शरीर में दर्द, ठंड लगना और थकान शामिल हैं। कुछ मरीजों को सांस लेने में परेशानी भी हो सकती है। लक्षण सामान्य वायरल बुखार या मौसमी फ्लू जैसे दिखाई दे सकते हैं, इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर संक्रमण की पुष्टि नहीं की जा सकती। डॉक्टर की सलाह पर कराई गई जांच से ही स्थिति स्पष्ट होती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार गर्भवती महिलाओं, छोटे बच्चों, बुजुर्गों और पहले से गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए। अस्थमा, हृदय रोग, मधुमेह, फेफड़ों या किडनी की बीमारी और कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले मरीजों में संक्रमण गंभीर होने का खतरा अपेक्षाकृत अधिक हो सकता है। ऐसे लोगों में फ्लू जैसे लक्षण दिखाई देने पर इलाज में देरी नहीं करनी चाहिए।

देहरादून में मरीजों की संख्या बढ़ने से अस्पतालों पर भी दबाव बढ़ सकता है। सरकारी और निजी अस्पतालों को फ्लू जैसे लक्षणों के साथ पहुंचने वाले मरीजों की जांच करते समय संक्रमण नियंत्रण के नियमों का पालन करना होगा। गंभीर मरीजों के उपचार के लिए ऑक्सीजन, आवश्यक दवाओं और पृथक बेड की उपलब्धता सुनिश्चित करना भी जरूरी होगा।

अस्पतालों और क्लीनिकों में आने वाले लोगों को मास्क लगाने तथा भीड़ से बचने की सलाह दी जा सकती है। संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने वाले परिजनों को भी अपने स्वास्थ्य पर नजर रखनी चाहिए। यदि बुखार और खांसी के साथ सांस लेने में तकलीफ, सीने में दर्द, अत्यधिक कमजोरी या स्थिति तेजी से बिगड़ने जैसे लक्षण दिखाई दें तो तत्काल चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।

स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए व्यक्तिगत स्वच्छता अत्यंत महत्वपूर्ण है। खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को रूमाल या कोहनी से ढकना चाहिए। हाथों को नियमित रूप से साबुन और पानी से धोना चाहिए। बिना हाथ धोए आंख, नाक और मुंह छूने से बचना चाहिए। संक्रमण के लक्षण होने पर स्कूल, कार्यालय या सार्वजनिक स्थानों पर जाने के बजाय घर पर रहकर डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर है।

बीमार व्यक्ति को परिवार के बुजुर्गों, बच्चों और गर्भवती महिलाओं से दूरी बनाए रखनी चाहिए। इस्तेमाल किए गए रूमाल या टिश्यू को सुरक्षित तरीके से नष्ट करना चाहिए। कमरे में हवा का आवागमन बनाए रखना और बार-बार छुई जाने वाली सतहों को साफ करना संक्रमण के प्रसार को कम करने में मदद कर सकता है।

लोगों को डॉक्टर की सलाह के बिना एंटीवायरल दवाएं या एंटीबायोटिक नहीं लेनी चाहिए। एंटीबायोटिक दवाएं वायरस के विरुद्ध प्रभावी नहीं होतीं और उनका अनावश्यक इस्तेमाल नुकसान पहुंचा सकता है। जांच और मरीज की स्थिति के आधार पर चिकित्सक ही उचित उपचार तय करते हैं। गंभीर लक्षण होने पर घरेलू नुस्खों के भरोसे इलाज में देरी करना खतरनाक साबित हो सकता है।

स्वास्थ्य विभाग के सामने संक्रमित मरीजों की समय पर पहचान, उनके संपर्क में आए लोगों की निगरानी और अस्पतालों में पर्याप्त व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती है। साथ ही संक्रमण से जुड़ी सही जानकारी लोगों तक पहुंचाना भी जरूरी है। अफवाहों या अपुष्ट संदेशों से डरने के बजाय नागरिकों को स्वास्थ्य विभाग की आधिकारिक सलाह का पालन करना चाहिए।

एक ही दिन में 25 नए मरीज मिलने से यह साफ है कि स्वाइन फ्लू को लेकर सतर्कता कम नहीं की जा सकती। हालांकि लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन लक्षणों को नजरअंदाज करना भी उचित नहीं होगा। मास्क, हाथों की स्वच्छता, भीड़ से दूरी और समय पर चिकित्सकीय सलाह संक्रमण रोकने में प्रभावी भूमिका निभा सकते हैं।

उत्तराखंड में कुल मामलों का आंकड़ा 408 पहुंचने के बाद स्वास्थ्य विभाग की निगरानी और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। आने वाले दिनों में जांच की संख्या, नए मरीजों और गंभीर मामलों की स्थिति से संक्रमण की वास्तविक रफ्तार स्पष्ट होगी। फिलहाल नागरिकों से सतर्क रहने, बीमार होने पर घर में रहने और सांस संबंधी गंभीर परेशानी होने पर तुरंत अस्पताल पहुंचने की अपील की जा रही है।

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