राष्ट्रवाद विकास और सामाजिक समरसता के सहारे उत्तराखंड में हैट्रिक की तैयारी में भाजपा
देहरादून। राष्ट्रवाद की मजबूत ओपनिंग, विकास के मोदी मॉडल का पावर-प्ले और डबल इंजन वाली धामी सरकार की उपलब्धियों के सहारे भारतीय जनता पार्टी ने उत्तराखंड में लगातार तीसरी बार सरकार बनाने की रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने इन तीन प्रमुख राजनीतिक मुद्दों को एक साथ जोड़कर पार्टी कार्यकर्ताओं को आगामी चुनाव के लिए तैयार रहने का संदेश दिया है। राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद तीसरी बार उत्तराखंड पहुंचे नवीन ने इस बार हल्द्वानी को अपनी राजनीतिक रणनीति का केंद्र बनाया।
हल्द्वानी में आयोजित कार्यक्रम के दौरान नितिन नवीन ने जिस तरह राष्ट्रवाद, विकास और सामाजिक समरसता का उल्लेख किया, उससे भाजपा की भावी चुनावी रणनीति के संकेत मिलते हैं। पार्टी उत्तराखंड में केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार और राज्य की पुष्कर सिंह धामी सरकार के कामकाज को जनता के बीच लेकर जाएगी। साथ ही धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान, राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक एकता से जुड़े मुद्दों को भी चुनावी विमर्श का हिस्सा बनाया जाएगा।
हल्द्वानी का चयन केवल संगठनात्मक कार्यक्रम के लिए नहीं माना जा रहा है। कुमाऊं क्षेत्र उत्तराखंड की राजनीति में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। इस क्षेत्र में पार्टी संगठन को मजबूत करना और कार्यकर्ताओं को एकजुट रखना भाजपा की चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा है। रामलीला मैदान में दस अगस्त को आयोजित कथित शुद्धीकरण कार्यक्रम के बाद पैदा हुए राजनीतिक विवाद को भी भाजपा ने अपने पक्ष में इस्तेमाल करने की तैयारी की है।
नितिन नवीन ने इस प्रकरण को सामाजिक समरसता और धार्मिक-सांस्कृतिक सम्मान से जोड़कर कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कार्यकर्ताओं को संदेश दिया कि भाजपा पार्टी की वैचारिक लाइन पर मजबूती से आगे बढ़ेगी, लेकिन इसके साथ समाज के विभिन्न वर्गों को जोड़ने पर भी ध्यान देगी। पार्टी की कोशिश होगी कि विरोधी दलों की ओर से लगाए जाने वाले ध्रुवीकरण के आरोपों का जवाब सामाजिक एकता और समरसता के मुद्दे से दिया जाए।
भाजपा अध्यक्ष ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला। क्रिकेट की भाषा में कहें तो उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व की ओर राजनीतिक बाउंसर फेंकते हुए स्पष्ट किया कि भाजपा आगामी चुनाव में रक्षात्मक नहीं बल्कि आक्रामक रणनीति अपनाएगी। राष्ट्रीय मुद्दों के साथ राज्य की स्थानीय राजनीतिक परिस्थितियों को जोड़कर विपक्ष को घेरने की तैयारी की जा रही है।
उत्तराखंड में भाजपा की सबसे बड़ी ताकत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार को माना जा रहा है। पार्टी केंद्र और राज्य के बीच बेहतर समन्वय को “डबल इंजन सरकार” के रूप में जनता के सामने पेश करती रही है। सड़क, रेल, स्वास्थ्य, पर्यटन, तीर्थाटन और सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार को चुनाव प्रचार में प्रमुखता से उठाए जाने की तैयारी है।
भाजपा नेतृत्व का मानना है कि मोदी सरकार की योजनाओं और धामी सरकार के फैसलों को एक साथ जनता के बीच रखने से पार्टी को चुनावी लाभ मिल सकता है। राज्य में चल रही केंद्रीय परियोजनाओं को विकास के मोदी मॉडल से जोड़ते हुए यह संदेश देने की कोशिश होगी कि उत्तराखंड की प्रगति के लिए केंद्र और राज्य में एक ही पार्टी की सरकार आवश्यक है। पार्टी कार्यकर्ताओं को इन योजनाओं की जानकारी घर-घर पहुंचाने की जिम्मेदारी दी जा सकती है।
राष्ट्रवाद भी भाजपा की रणनीति का प्रमुख स्तंभ रहेगा। उत्तराखंड को सैन्य परंपरा वाले राज्य के रूप में जाना जाता है। बड़ी संख्या में यहां के लोग सेना और अर्धसैनिक बलों में सेवाएं देते रहे हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा, सैनिक सम्मान और सीमावर्ती गांवों के विकास से जुड़े मुद्दे प्रदेश की राजनीति में प्रभावी भूमिका निभाते हैं। भाजपा इन विषयों को अपनी उपलब्धियों के साथ जोड़कर जनता के बीच जाएगी।
इसके साथ ही पार्टी सामाजिक समरसता को एक महत्वपूर्ण राजनीतिक हथियार बनाने की तैयारी में है। भाजपा का प्रयास विभिन्न जातीय, सामाजिक और क्षेत्रीय वर्गों के बीच अपनी पहुंच बढ़ाने का होगा। अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग, महिलाएं, युवा और पूर्व सैनिक जैसे मतदाता समूह पार्टी की रणनीति के केंद्र में रह सकते हैं। संगठनात्मक बैठकों और जनसंपर्क अभियानों के माध्यम से इन वर्गों से सीधा संवाद बढ़ाया जाएगा।
नितिन नवीन का हल्द्वानी दौरा कार्यकर्ताओं में ऊर्जा भरने और आगामी चुनाव के लिए संगठन को सक्रिय करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उन्होंने यह संकेत दिया कि केवल सरकार की उपलब्धियां गिनाना पर्याप्त नहीं होगा। बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने, कार्यकर्ताओं की नाराजगी दूर करने और जनता से लगातार संपर्क बनाए रखने की भी जरूरत है। पार्टी प्रत्येक बूथ पर मतदाताओं से संवाद स्थापित करने की योजना बना सकती है।
कुमाऊं और गढ़वाल के बीच राजनीतिक संतुलन भी भाजपा के लिए महत्वपूर्ण रहेगा। राज्य की सत्ता तक पहुंचने के लिए दोनों क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन आवश्यक है। हल्द्वानी से रणनीतिक संदेश देकर पार्टी ने कुमाऊं पर विशेष ध्यान देने का संकेत दिया है। यहां स्थानीय मुद्दों, संगठनात्मक समीकरणों और विपक्ष की स्थिति का आकलन कर आगे की कार्ययोजना तैयार की जा सकती है।
दूसरी ओर कांग्रेस भी भाजपा सरकार को महंगाई, बेरोजगारी, पलायन, कानून-व्यवस्था और आपदा प्रबंधन जैसे मुद्दों पर घेरने की कोशिश करेगी। ऐसे में भाजपा को अपने विकास के दावों के साथ इन सवालों का जवाब भी देना होगा। नितिन नवीन ने खरगे और राहुल गांधी पर हमला करते हुए साफ कर दिया कि पार्टी राष्ट्रीय नेतृत्व के स्तर पर भी कांग्रेस को लगातार निशाने पर रखेगी।
उत्तराखंड में भाजपा पहले ही लगातार दो विधानसभा चुनाव जीत चुकी है। अब पार्टी के सामने सत्ता की हैट्रिक बनाने की चुनौती है। लगातार तीसरी जीत हासिल करना आसान नहीं होगा क्योंकि सत्ता विरोधी भावना और स्थानीय असंतोष जैसे मुद्दे चुनावी समीकरण बदल सकते हैं। इसे देखते हुए भाजपा विकास, राष्ट्रवाद और संगठनात्मक मजबूती के साथ सामाजिक समरसता का चौथा आयाम भी अपनी रणनीति में जोड़ रही है।
नितिन नवीन के दौरे से यह संदेश सामने आया है कि भाजपा ने चुनावी तैयारी की शुरुआती रूपरेखा तय कर ली है। अब पार्टी का अगला लक्ष्य इस रणनीति को मंडल, शक्ति केंद्र और बूथ स्तर तक पहुंचाना होगा। राष्ट्रवाद से शुरुआत, विकास के मोदी मॉडल से बढ़त और धामी सरकार की उपलब्धियों के सहारे चुनावी पारी को जीत में बदलने की तैयारी है। यह रणनीति भाजपा को लगातार तीसरी बार सत्ता दिला पाएगी या नहीं, इसका फैसला अंततः उत्तराखंड के मतदाता करेंगे।