देहरादून। उत्तराखंड में पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता और बंगाल की खाड़ी से उठे चक्रवाती तूफान 'अर्णब' के प्रभाव के बीच मौसम ने अचानक करवट ले ली है। गुरुवार सुबह से प्रदेश के पर्वतीय और मैदानी क्षेत्रों में बारिश का सिलसिला शुरू होने से तापमान में गिरावट महसूस की गई। राजधानी देहरादून में दिनभर बादल छाए रहे और रुक-रुककर हुई बारिश ने ठंड का एहसास बढ़ा दिया। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, बारिश और बादलों के कारण देहरादून में तापमान में करीब आठ डिग्री सेल्सियस तक गिरावट की बात सामने आई है। हालांकि, मौसम विभाग के उपलब्ध आंकड़ों से इस गिरावट की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मौसम में अचानक आए बदलाव के कारण लोगों को गर्म कपड़ों का सहारा लेना पड़ा। वहीं, पर्वतीय जिलों में बारिश और ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी की संभावना ने ठंड बढ़ने के संकेत दिए हैं।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, उत्तर-पश्चिम भारत में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के कारण उत्तराखंड सहित हिमालयी राज्यों में बारिश और बर्फबारी की परिस्थितियां बनी हुई हैं। जम्मू-कश्मीर के आसपास पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय है, जबकि ऊपरी वायुमंडल में एक अन्य पश्चिमी विक्षोभ से जुड़ी मौसमी गतिविधियां भी जारी हैं। इन प्रणालियों के कारण पश्चिमी हिमालयी क्षेत्रों में बादल बनने और वर्षा की संभावना बढ़ गई है।
मौसम विभाग ने उत्तराखंड में 29 अक्टूबर से 2 नवंबर तक कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी होने के भी आसार हैं। इससे पहाड़ी इलाकों में तापमान और नीचे जा सकता है। हालांकि, बारिश और बर्फबारी की वास्तविक तीव्रता स्थानीय मौसम परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।
राजधानी देहरादून में गुरुवार सुबह से मौसम बदला हुआ नजर आया। आसमान में बादलों की मौजूदगी के कारण धूप कम दिखाई दी। बारिश और ठंडी हवाओं से मौसम में ठंडक बढ़ गई। दिन के समय तापमान में कमी महसूस होने के कारण लोगों को सामान्य दिनों की तुलना में अधिक ठंड का अनुभव हुआ।
मौसम विभाग के देहरादून-यूकोस्ट केंद्र पर 29 अक्टूबर को न्यूनतम तापमान 14.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं, दिन के लिए अधिकतम तापमान लगभग 27 डिग्री सेल्सियस रहने का पूर्वानुमान जारी किया गया। विभाग ने गरज-चमक के साथ 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की चेतावनी भी दी है। इससे स्पष्ट है कि मौसम में बदलाव के साथ तेज हवाओं और बिजली चमकने का खतरा भी बना हुआ है।
मौसम खराब होने से राजधानी में आम जनजीवन भी प्रभावित हुआ। बारिश के कारण कार्यालयों, शिक्षण संस्थानों और अन्य जरूरी कामों के लिए बाहर निकलने वाले लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। कई स्थानों पर सड़कों पर फिसलन बढ़ने से वाहन चालकों को सावधानी बरतनी पड़ी। मौसम में आए बदलाव का असर स्थानीय बाजारों और दैनिक गतिविधियों पर भी दिखाई दिया।
पर्वतीय क्षेत्रों में बारिश के साथ तापमान गिरने की संभावना को देखते हुए लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़ और बागेश्वर जैसे पर्वतीय जिलों के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ठंड बढ़ सकती है। विशेष रूप से अधिक ऊंचाई वाले स्थानों पर बर्फबारी होने से यात्रा और आवागमन प्रभावित होने की आशंका रहती है।
चारधाम यात्रा से जुड़े मार्गों और अन्य पर्वतीय सड़कों पर बारिश के दौरान फिसलन तथा भूस्खलन का जोखिम बढ़ सकता है। हालांकि, किसी विशेष मार्ग के बंद होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पहाड़ों की यात्रा करने वाले लोगों को मौसम विभाग और स्थानीय प्रशासन की ताजा सूचनाओं के अनुसार ही अपनी यात्रा की योजना बनानी चाहिए।
इधर, बंगाल की खाड़ी में विकसित चक्रवाती तूफान अर्णब लगातार कमजोर हो रहा है। मौसम विभाग के अनुसार, यह तूफान 28 अक्टूबर की रात तक गहरे अवदाब में बदल गया था। इसके बाद 29 अक्टूबर की सुबह यह दक्षिण छत्तीसगढ़ और उससे सटे दक्षिण ओडिशा के ऊपर सामान्य अवदाब के रूप में केंद्रित था। मौसम वैज्ञानिकों ने इसके आगे और कमजोर होने की संभावना व्यक्त की है।
चक्रवात के कमजोर होने के बावजूद इससे जुड़ी नमी और बादलों का प्रभाव पूर्वी तथा मध्य भारत के विभिन्न हिस्सों में बना हुआ है। उत्तराखंड में मौजूदा बारिश के पीछे पश्चिमी विक्षोभ महत्वपूर्ण मौसमी कारण है। चक्रवात के अवशेषों का राज्य की बारिश में कितना प्रत्यक्ष योगदान है, इसे लेकर अलग से स्पष्ट आधिकारिक आकलन उपलब्ध नहीं है।
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, शुक्रवार 30 अक्टूबर को भी देहरादून में सामान्यतः बादल छाए रहने और एक-दो बार बारिश या गरज के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है। इस दिन न्यूनतम तापमान लगभग 14 डिग्री और अधिकतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है।
31 अक्टूबर को भी देहरादून में आंशिक रूप से बादल छाए रह सकते हैं। इस दिन गरज-चमक और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की चेतावनी जारी की गई है। इसके बाद नवंबर की शुरुआत में मौसम धीरे-धीरे साफ होने की संभावना है।
मौसम विभाग के शुरुआती नवंबर के पूर्वानुमान में 2 नवंबर को देहरादून में मुख्य रूप से साफ मौसम रहने की संभावना व्यक्त की गई है। हालांकि, पर्वतीय क्षेत्रों और मैदानी इलाकों में मौसम की स्थिति अलग-अलग हो सकती है। इसलिए जिलेवार चेतावनियों का ध्यान रखना जरूरी होगा।
बारिश और मौसम में अचानक बदलाव का असर कृषि गतिविधियों पर भी पड़ सकता है। उत्तराखंड के कई क्षेत्रों में इस समय धान की कटाई और रबी फसलों की बुवाई की तैयारियां चलती हैं। ऐसे समय में बारिश होने से खेतों में नमी बढ़ सकती है। अधिक वर्षा होने पर कटी हुई फसल और खुले में रखी कृषि उपज को नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, किसानों को अपनी कटी हुई फसल सुरक्षित और सूखे स्थान पर रखने का प्रयास करना चाहिए। बारिश की संभावना को ध्यान में रखते हुए खेतों में जलनिकासी की व्यवस्था करना भी उपयोगी हो सकता है। हालांकि, किस क्षेत्र में फसलों को वास्तविक नुकसान हुआ है, इसकी पुष्टि स्थानीय कृषि विभाग के आकलन के बाद ही हो सकेगी।
मौसम विभाग ने लोगों को गरज-चमक के दौरान खुले मैदानों, ऊंचे पेड़ों और बिजली के खंभों के पास खड़े होने से बचने की सलाह दी है। तेज हवाओं के दौरान कमजोर निर्माणों और असुरक्षित स्थानों से दूर रहना चाहिए। पर्वतीय इलाकों में यात्रा करने वाले लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता है।
फिलहाल पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता और बदली हुई मौसमी परिस्थितियों के कारण उत्तराखंड में ठंड का असर बढ़ने लगा है। राजधानी देहरादून में बारिश ने लोगों को सर्द मौसम का एहसास करा दिया है, जबकि ऊंचाई वाले क्षेत्रों में संभावित बर्फबारी से ठंड और बढ़ सकती है। आने वाले दिनों में मौसम विभाग की नई चेतावनियां और तापमान के आंकड़े यह स्पष्ट करेंगे कि प्रदेश में बारिश तथा ठंड का यह दौर कितने समय तक जारी रहेगा।