सुल्तानपुर पट्टी। रक्षाबंधन पर्व को लेकर मिठाइयों की मांग बढ़ने के साथ ही प्रशासन और खाद्य विभाग ने मिलावटी एवं खराब मिठाइयों के खिलाफ अभियान तेज कर दिया है। मंगलवार को उपजिलाधिकारी ऋचा सिंह के नेतृत्व में राजस्व और खाद्य विभाग की संयुक्त टीम ने सुल्तानपुर पट्टी क्षेत्र में मिठाई की दुकानों और एक निर्माण स्थल पर छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान मिल्क पाउडर और रिफाइंड से तैयार किए जा रहे नकली मावे तथा उससे बनाई जा रही मिठाइयों का मामला सामने आया। टीम ने मौके से खाद्य पदार्थों के नमूने भी लिए और नियमों का उल्लंघन मिलने पर कार्रवाई शुरू की।

अधिकारियों के मुताबिक, यह अभियान मुख्यमंत्री के निर्देश और जिलाधिकारी के आदेश के क्रम में चलाया गया। त्योहारों के दौरान बाजार में मिठाइयों की मांग अचानक बढ़ जाती है। इसी का फायदा उठाकर कुछ कारोबारी अधिक मुनाफे के लिए मिलावटी या घटिया सामग्री का इस्तेमाल करते हैं। प्रशासन ने ऐसे कारोबारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की तैयारी की है।

संयुक्त टीम ने अभियान की शुरुआत उत्तराखंड स्वीट्स से की। निरीक्षण के दौरान यहां करीब 50 किलो खोया और छैना से तैयार मिठाइयां ऐसी स्थिति में मिलीं, जिनमें कीड़े-मकौड़े पाए गए। खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता के लिहाज से इन मिठाइयों को मानव उपभोग के लिए अनुपयुक्त माना गया। टीम ने मौके पर ही करीब 50 किलो मिठाइयों को नष्ट करा दिया।

उपजिलाधिकारी ऋचा सिंह ने बताया कि दुकान में मिली मिठाइयों की गुणवत्ता को लेकर गंभीर लापरवाही सामने आई। खाद्य विभाग की टीम ने खोये के नमूने लेकर जांच के लिए भेजने की प्रक्रिया शुरू की। इसके साथ ही दुकान परिसर में गंदगी पाए जाने पर चालान की कार्रवाई भी की गई। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता के साथ किसी भी तरह का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

इसके बाद टीम ने क्षेत्र में एक ऐसे स्थान पर भी कार्रवाई की, जहां कथित तौर पर मिल्क पाउडर और रिफाइंड का इस्तेमाल कर मावा तैयार किया जा रहा था। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि तैयार किए जा रहे उत्पाद को असली मावे के विकल्प के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा था। टीम ने मौके से संबंधित सामग्री और तैयार उत्पाद की जांच की तथा आवश्यक नमूने लिए।

त्योहारों के मौसम में नकली मावा और मिलावटी मिठाइयों की समस्या अक्सर सामने आती है। दूध की उपलब्धता और मांग के बीच अंतर होने पर कुछ कारोबारी दूध से बने वास्तविक मावे की जगह अन्य सामग्री का इस्तेमाल करते हैं। मिल्क पाउडर, रिफाइंड और अन्य पदार्थों से तैयार नकली मावा देखने में वास्तविक मावे जैसा दिखाई दे सकता है, लेकिन उसकी गुणवत्ता और पोषण संबंधी मानक अलग हो सकते हैं।

प्रशासन की कार्रवाई का उद्देश्य उपभोक्ताओं को सुरक्षित खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराना है। रक्षाबंधन के दौरान मिठाइयों की बिक्री कई गुना बढ़ जाती है। लोग बड़ी मात्रा में मिठाइयां खरीदते हैं और इन्हें रिश्तेदारों तथा दोस्तों को उपहार के रूप में भी देते हैं। ऐसे में खराब या मिलावटी मिठाइयों की बिक्री से बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हो सकते हैं।

खाद्य विभाग की टीम ने दुकानों में मिठाइयों के रखरखाव, निर्माण प्रक्रिया, स्वच्छता और इस्तेमाल होने वाली सामग्री की भी जांच की। अधिकारियों ने कारोबारियों को साफ-सफाई बनाए रखने तथा खाद्य पदार्थों को सुरक्षित तरीके से रखने के निर्देश दिए। खासकर ऐसी मिठाइयों को खुले में रखने से बचने को कहा गया, जिनके खराब होने की संभावना अधिक होती है।

गौरतलब है कि खोया, छैना और दूध से बनी कई मिठाइयां जल्दी खराब हो सकती हैं। इन्हें उचित तापमान और स्वच्छ वातावरण में रखना आवश्यक होता है। यदि मिठाइयों को लंबे समय तक खुले या गंदे स्थान पर रखा जाए तो उनमें बैक्टीरिया और अन्य सूक्ष्मजीवों की वृद्धि हो सकती है। इससे खाद्य विषाक्तता और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है।

उत्तराखंड स्वीट्स में मिली मिठाइयों में कीड़े-मकौड़े पाए जाने का मामला इसी लिहाज से गंभीर माना जा रहा है। प्रशासन ने इन्हें बाजार में बिकने से पहले ही नष्ट करा दिया। इससे संभावित रूप से बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं तक खराब खाद्य पदार्थ पहुंचने से रोका गया।

खाद्य विभाग द्वारा लिए गए नमूनों की प्रयोगशाला जांच के बाद यह स्पष्ट होगा कि संबंधित खोया और अन्य खाद्य पदार्थ निर्धारित मानकों पर खरे उतरते हैं या नहीं। यदि जांच में मिलावट या खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन साबित होता है, तो संबंधित कारोबारियों के खिलाफ नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जा सकती है।

अधिकारियों ने संकेत दिया है कि रक्षाबंधन तक इस तरह की जांच जारी रह सकती है। क्षेत्र की अन्य मिठाई दुकानों, डेयरी उत्पादों और खाद्य पदार्थों के निर्माण एवं बिक्री केंद्रों पर भी निरीक्षण किया जा सकता है। प्रशासन का उद्देश्य त्योहार के दौरान बाजार में बिकने वाली मिठाइयों की गुणवत्ता सुनिश्चित करना है।

प्रशासन ने आम लोगों से भी अपील की है कि वे मिठाई खरीदते समय दुकान की साफ-सफाई और उत्पाद की स्थिति पर ध्यान दें। बहुत अधिक चमकीली, असामान्य रंग वाली या खराब गंध वाली मिठाइयों से बचने की सलाह दी जा सकती है। पैक्ड उत्पाद खरीदने वाले उपभोक्ताओं को निर्माण और समाप्ति की तारीख के साथ पैकेजिंग की स्थिति भी जांचनी चाहिए।

त्योहारों के दौरान खाद्य पदार्थों की बढ़ती मांग के साथ प्रशासन के सामने निगरानी की चुनौती भी बढ़ जाती है। ऐसे में अचानक निरीक्षण और नमूना जांच मिलावट रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। मंगलवार की कार्रवाई से यह संकेत साफ है कि प्रशासन रक्षाबंधन के दौरान मिलावटी और अस्वच्छ खाद्य पदार्थों की बिक्री पर नजर बनाए हुए है।

उपजिलाधिकारी ऋचा सिंह के नेतृत्व में हुई कार्रवाई में राजस्व और खाद्य विभाग की संयुक्त टीम ने कई स्थानों पर जांच की। उत्तराखंड स्वीट्स से करीब 50 किलो कीड़े-मकौड़ों से युक्त खोया व छैना से बनी मिठाइयां मिलने के बाद उन्हें मौके पर ही नष्ट कराया गया। खोये के नमूने जांच के लिए लिए गए और गंदगी के मामले में चालान की कार्रवाई की गई।

वहीं, मिल्क पाउडर और रिफाइंड से नकली मावा तैयार किए जाने की जानकारी सामने आने के बाद प्रशासन ने इस गतिविधि को भी गंभीरता से लिया है। आने वाले दिनों में नमूनों की जांच रिपोर्ट और विभागीय कार्रवाई से यह स्पष्ट होगा कि संबंधित प्रतिष्ठानों के खिलाफ किस स्तर की कार्रवाई की जाती है।

रक्षाबंधन से पहले हुई इस छापेमारी ने मिठाई कारोबारियों के बीच भी सतर्कता बढ़ा दी है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि त्योहार की आड़ में मिलावटी, खराब या अस्वच्छ खाद्य पदार्थ बेचने वालों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी। वहीं उपभोक्ताओं के लिए भी यह कार्रवाई एक चेतावनी है कि त्योहार के दौरान मिठाई खरीदते समय गुणवत्ता और स्वच्छता का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।

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