देहरादून। उत्तराखंड से विदाई से पहले मानसून ने एक बार फिर अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। शुक्रवार रात से शुरू हुई तेज बारिश शनिवार को भी जारी रही। खासकर कुमाऊं क्षेत्र में मूसलाधार बारिश के कारण जनजीवन प्रभावित हुआ है। मौसम की स्थिति को देखते हुए प्रशासन सतर्क है और संवेदनशील इलाकों में लोगों से सावधानी बरतने की अपील की गई है।
मौसम विभाग ने रविवार को देहरादून, टिहरी और पौड़ी जिलों के लिए रेड अलर्ट जारी किया है। इन तीन जिलों में कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी और कहीं-कहीं अत्यंत भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है। वहीं उत्तराखंड के शेष जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।
भारी बारिश के पूर्वानुमान और यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए चारधाम यात्रा को भी अस्थायी रूप से रोक दिया गया है। अधिकारियों ने यात्रियों से मौसम सामान्य होने और प्रशासन की ओर से अनुमति मिलने तक सुरक्षित स्थानों पर रुकने को कहा है।
शुक्रवार रात से उत्तराखंड के कई हिस्सों में बारिश का दौर शुरू हुआ था। शनिवार को भी पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों में बारिश होती रही। कुमाऊं क्षेत्र में बारिश का असर अधिक दिखाई दिया, जहां लगातार पानी बरसने से लोगों की रोजमर्रा की गतिविधियां प्रभावित हुईं।
बारिश के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और सड़कों पर मलबा आने का खतरा भी बढ़ गया है। लगातार बारिश होने पर पहाड़ी ढलानों के कमजोर होने की आशंका रहती है। ऐसे में प्रशासन और संबंधित विभागों को संवेदनशील मार्गों तथा क्षेत्रों पर निगरानी रखने को कहा गया है।
मौसम विभाग की चेतावनी के बाद देहरादून, टिहरी और पौड़ी में विशेष सतर्कता बरती जा रही है। रेड अलर्ट वाले क्षेत्रों में अत्यधिक बारिश की संभावना के कारण लोगों को नदी-नालों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी गई है।
उत्तराखंड के बाकी जिलों में ऑरेंज अलर्ट होने के कारण वहां भी मौसम को हल्के में नहीं लेने को कहा गया है। तेज बारिश के दौरान पहाड़ी रास्तों पर यात्रा करने वालों के लिए अतिरिक्त सावधानी जरूरी है।
राज्य में मानसून की विदाई का समय नजदीक होने के बावजूद मौसम में अचानक आए बदलाव ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। सितंबर के आखिरी दिनों में बारिश का यह दौर पहाड़ी क्षेत्रों में मुश्किलें पैदा कर सकता है।
चारधाम यात्रा के लिए भी मौजूदा मौसम चुनौती बना हुआ है। पहाड़ी मार्गों पर लगातार बारिश के दौरान भूस्खलन, पत्थर गिरने और सड़क बाधित होने का खतरा रहता है। इसी को देखते हुए यात्रा को रोकने का फैसला यात्रियों की सुरक्षा से जोड़कर लिया गया है।
चारधाम यात्रा के तहत बड़ी संख्या में श्रद्धालु केदारनाथ, बदरीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री की ओर जाते हैं। इन धामों तक पहुंचने वाले मार्ग पहाड़ी इलाकों से होकर गुजरते हैं। भारी बारिश के दौरान इन मार्गों पर आवागमन जोखिमपूर्ण हो सकता है।
प्रशासन की ओर से मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। यात्रियों से भी अपील की गई है कि वे मौसम और मार्गों की स्थिति की जानकारी लेने के बाद ही आगे की यात्रा करें। बारिश के दौरान किसी भी संवेदनशील या जोखिम वाले स्थान पर अनावश्यक रूप से रुकने से बचने को कहा गया है।
देहरादून में भारी बारिश का असर शहरी क्षेत्रों में भी दिखाई दे सकता है। तेज बारिश होने पर निचले इलाकों में जलभराव और नालों का जलस्तर बढ़ने की आशंका रहती है। वहीं टिहरी और पौड़ी जैसे पहाड़ी जिलों में भूस्खलन और सड़क अवरुद्ध होने का खतरा अधिक रहता है।
कुमाऊं में पहले से जारी मूसलाधार बारिश ने लोगों की परेशानी बढ़ाई है। लगातार बारिश से स्थानीय मार्गों और सामान्य आवाजाही पर असर पड़ा है। पहाड़ों पर मौसम की स्थिति तेजी से बदलने के कारण प्रशासन लोगों को सतर्क रहने की सलाह दे रहा है।
मौसम विभाग की चेतावनी के मुताबिक रेड अलर्ट वाले जिलों में कुछ स्थानों पर बहुत तेज बारिश हो सकती है। ऐसे में छोटी नदियों, नालों और बरसाती गदेरों के जलस्तर में अचानक वृद्धि होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
पहाड़ी इलाकों में बारिश के दौरान सबसे बड़ी चुनौती सड़कों को खुला रखने की होती है। कई स्थानों पर मलबा और पत्थर गिरने से सड़कें बाधित हो सकती हैं। ऐसी स्थिति में संबंधित विभागों को आवश्यक संसाधनों के साथ तैयार रहने की जरूरत होती है।
राज्य में चारधाम यात्रा रोके जाने से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के यात्रा कार्यक्रम पर भी असर पड़ा है। हालांकि मौसम से जुड़ा जोखिम कम होने के बाद ही यात्रा को आगे बढ़ाने की स्थिति बनेगी।
यात्रियों को प्रशासन की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने और मौसम खराब रहने के दौरान जबरन आगे बढ़ने का प्रयास नहीं करने की सलाह दी गई है। पहाड़ी क्षेत्रों में मौसम अचानक बदलने के कारण यात्रा के दौरान अतिरिक्त सावधानी जरूरी है।
भारी बारिश का असर केवल यात्राओं तक सीमित नहीं रहता। ग्रामीण क्षेत्रों में संपर्क मार्ग, बिजली और अन्य आवश्यक सेवाएं भी प्रभावित हो सकती हैं। लगातार बारिश होने पर कृषि और स्थानीय स्तर पर रोजमर्रा के कामकाज पर भी असर पड़ता है।
उत्तराखंड में मानसून के दौरान भूस्खलन और सड़क अवरुद्ध होने की घटनाएं बड़ी चुनौती रहती हैं। ऐसे में सितंबर के अंतिम दिनों में दोबारा सक्रिय हुई बारिश ने प्रशासन को सतर्क कर दिया है।
देहरादून, टिहरी और पौड़ी में रेड अलर्ट को देखते हुए स्थानीय प्रशासन को मौसम की स्थिति के अनुसार आवश्यक कदम उठाने होंगे। अन्य जिलों में ऑरेंज अलर्ट होने के कारण वहां भी सतर्कता बनाए रखने की जरूरत है।
फिलहाल उत्तराखंड में बारिश का दौर जारी है और मौसम विभाग ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। खासकर पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रा करने वालों को मौसम की जानकारी लेकर ही घर से निकलने को कहा गया है।
चारधाम यात्रा पर निकले श्रद्धालुओं के लिए भी प्रशासनिक निर्देशों का पालन करना जरूरी है। यात्रा अस्थायी रूप से रोके जाने के कारण श्रद्धालुओं को सुरक्षित स्थानों पर इंतजार करना होगा।
मानसून की विदाई से पहले उत्तराखंड में एक बार फिर मौसम का बदला मिजाज परेशानी बढ़ा रहा है। तीन जिलों में रेड और शेष जिलों में ऑरेंज अलर्ट के बीच प्रशासन की नजर बारिश, भूस्खलन संभावित क्षेत्रों और प्रमुख यात्रा मार्गों पर बनी हुई है।