लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने प्रदेश के नागरिकों को बेहतर, त्वरित और आधुनिक जनसुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री के कड़े निर्देशों के बाद शासन ने 'विकास प्राधिकरण भवन निर्माण एवं विकास उपविधि' तथा 'आदर्श जोनिंग रेगुलेशंस-2025' में दूरगामी संशोधनों की प्रक्रिया आधिकारिक रूप से शुरू कर दी है।
इन प्रस्तावित संशोधनों का मुख्य उद्देश्य राज्य के शहरी विकास को एक नया आयाम देना, स्वास्थ्य ढांचे को मजबूती प्रदान करना और पर्यावरण संतुलन बनाए रखते हुए आम जनता को जरूरी नागरिक सुविधाएं आसानी से उपलब्ध कराना है।
ग्रीन बेल्ट में खुलेंगे विकास के नए द्वार
प्रस्तावित बदलावों के तहत सबसे बड़ा निर्णय ग्रीन बेल्ट (हरित पट्टी) क्षेत्रों को लेकर लिया गया है। अब तक ग्रीन बेल्ट में किसी भी प्रकार के निर्माण या जनोपयोगी विकास कार्यों पर बेहद कड़े प्रतिबंध लागू थे।
नए संशोधनों के लागू होने के बाद ग्रीन बेल्ट वाले इलाकों में पर्यावरण और हरित आवरण को नुकसान पहुंचाए बिना आवश्यक सार्वजनिक, सामुदायिक और जनोपयोगी सुविधाओं के निर्माण का मार्ग साफ हो सकेगा। इससे शहरों के आसपास खाली पड़ी हरित पट्टियों का सुनियोजित उपयोग हो सकेगा और स्थानीय निवासियों को अपने घर के पास ही मूलभूत सुविधाएं प्राप्त हो सकेंगी।
अस्पतालों को मिला 'लघु उद्योग' का दर्जा
स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़े निवेश को आकर्षित करने और इलाज की व्यवस्था को सुलभ बनाने के लिए सरकार ने एक और ऐतिहासिक प्रस्ताव रखा है। इसके तहत 50 बेड या उससे अधिक क्षमता वाले अस्पतालों को अब 'लघु उद्योग' (Small Scale Industry) भू-उपयोग श्रेणी में शामिल करने की योजना है।
इस निर्णय से राज्य में स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र को अभूतपूर्व प्रोत्साहन मिलेगा:
आसान भूमि आवंटन: अस्पतालों की स्थापना के लिए औद्योगिक और रियायती दरों पर भूमि मिलने का रास्ता साफ होगा।
सिंगल विंडो क्लीयरेंस: लघु उद्योग श्रेणी में आने के बाद नक्शा पास कराने और विभिन्न सरकारी स्वीकृतियां प्राप्त करने में लगने वाला समय काफी कम हो जाएगा।
स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार: राज्य के छोटे और मध्यम शहरों में भी आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं से लैस 50+ बेड वाले अस्पतालों का निर्माण तेजी से हो सकेगा।
रोजगार के अवसर: नए अस्पतालों के निर्माण से डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ, प्रशासनिक कर्मचारियों और अन्य सहयोगी सेवाओं के लिए लाखों नए प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होंगे।
आपत्तियों व सुझावों के निस्तारण के लिए प्रदेश स्तरीय समिति गठित
शासन द्वारा उपविधि और जोनिंग रेगुलेशंस-2025 के प्रारूप पर आम जनता, विशेषज्ञों, रियल एस्टेट डेवलपर्स और संबंधित संस्थाओं से आपत्तियां और सुझाव मांगे गए थे।
प्राप्त सभी आपत्तियों और सुझावों का समयबद्ध, निष्पक्ष और पारदर्शी निस्तारण सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने एक उच्चस्तरीय प्रदेश स्तरीय समिति (State Level Committee) का गठन कर दिया है। यह समिति सभी तकनीकी और व्यावहारिक पहलुओं की गहन समीक्षा करने के बाद अपनी अंतिम रिपोर्ट शासन को सौंपेगी, जिसके आधार पर अंतिम अधिसूचना जारी की जाएगी।
आम जनता और बुनियादी ढांचे पर प्रभाव
योगी सरकार का यह फैसला केवल नियमों में संशोधन मात्र नहीं है, बल्कि यह उत्तर प्रदेश के शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के कायाकल्प का मास्टर प्लान है।
सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं: अब आम लोगों को बड़े इलाज के लिए महानगरों की ओर भागने की जरूरत कम होगी।
सस्टेनेबल अर्बन डेवलपमेंट: ग्रीन बेल्ट का उपयोग जनहित में नियंत्रित तरीके से होने से अनधिकृत निर्माणों पर रोक लगेगी।
ईज ऑफ डूइंग बिजनेस: हेल्थकेयर सेक्टर में निवेश करने वाले उद्यमियों को प्रशासनिक जटिलताओं से राहत मिलेगी।
समृद्ध और आधुनिक यूपी की ओर कदम
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह फैसला राज्य के इंफ्रास्ट्रक्चर को 21वीं सदी की जरूरतों के अनुकूल बनाने की दिशा में उठाया गया एक बड़ा कदम माना जा रहा है। आवास एवं नगर नियोजन विभाग इन संशोधनों को जल्द से जल्द धरातल पर उतारने के लिए तेजी से काम कर रहा है। आने वाले समय में ये संशोधन उत्तर प्रदेश को न केवल बुनियादी ढांचे के मामले में समृद्ध बनाएंगे, बल्कि आम नागरिक के जीवन को भी अधिक सुगम और सुरक्षित करेंगे।