बलिया। जल जीवन मिशन के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में चल रही पेयजल योजनाओं की निगरानी अब डिजिटल माध्यम से की जाएगी। बलिया जिले में इसके लिए जल सारथी ऐप का इस्तेमाल शुरू किया जा रहा है। इस ऐप के जरिए गांवों में पेयजल आपूर्ति, पानी की गुणवत्ता, निर्माण कार्यों की प्रगति, पाइपलाइन से जुड़ी समस्याएं और शिकायतों की रियल टाइम मॉनिटरिंग की जाएगी। प्रशासन का उद्देश्य इस डिजिटल पहल के माध्यम से योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना है।
जल सारथी ऐप के जरिए ग्राम प्रधान, ग्राम सचिव, ग्राम पेयजल एवं स्वच्छता समिति (वीडब्ल्यूएससी) के सदस्य, फील्ड टेस्ट किट (एफटीके) से प्रशिक्षित महिलाएं, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सरकारी विद्यालयों के शिक्षक, लेखपाल और ग्राम विकास अधिकारी पेयजल योजनाओं की निगरानी करेंगे। इससे गांव स्तर पर योजनाओं की स्थिति की जानकारी तुरंत उपलब्ध हो सकेगी और किसी भी समस्या का समाधान तेजी से किया जा सकेगा।
शासन की ओर से इस संबंध में सभी जिलाधिकारियों को निर्देश जारी किए गए हैं। ऐप के माध्यम से जलापूर्ति व्यवस्था, पानी की गुणवत्ता जांच, निर्माण कार्यों की स्थिति, पाइपलाइन में खराबी और अन्य शिकायतों को दर्ज कर उनकी निगरानी की जाएगी। इससे अधिकारियों को भी योजनाओं की वास्तविक स्थिति जानने में आसानी होगी।
पोर्टल पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, बलिया जिले में जल जीवन मिशन के तहत 17 विकासखंडों की 942 ग्राम पंचायतों के 1832 गांव इस योजना से जुड़े हुए हैं। इनमें से 1620 गांवों में पेयजल योजनाओं का कार्य अभी चल रहा है, जबकि 208 गांवों में नियमित रूप से जलापूर्ति शुरू हो चुकी है।
जिले में हर घर तक नल से जल पहुंचाने के लिए 4 लाख 38 हजार 202 घरेलू नल कनेक्शन देने का लक्ष्य रखा गया है। इसके मुकाबले अब तक 1 लाख 45 हजार 413 कनेक्शन दिए जा चुके हैं, जो कुल लक्ष्य का करीब 33.18 प्रतिशत है। प्रशासन अब ऐप के माध्यम से इन कार्यों की प्रगति पर लगातार नजर रखेगा।
जल जीवन मिशन के तहत जिले में आधारभूत ढांचे को मजबूत करने का काम भी तेजी से चल रहा है। आंकड़ों के अनुसार, जिले में कुल 312 ओवरहेड टैंकों में से 311 का निर्माण पूरा हो चुका है। वहीं 13 हजार 820 किलोमीटर पाइपलाइन बिछाने के लक्ष्य के मुकाबले 9 हजार 824 किलोमीटर पाइपलाइन का काम पूरा किया जा चुका है।
इसके अलावा सड़क बहाली का कार्य भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। जिले में अब तक 93.46 प्रतिशत सड़क बहाली का काम पूरा हो चुका है। पेयजल योजनाओं के निर्माण की जिम्मेदारी अलग-अलग एजेंसियों को दी गई है। इनमें एलएंडटी को 754 गांवों, गाजा-गायपीएल जेवी को 566 गांवों और ईगल इंफ्रा-सुधाकरा इंफ्रा जेवी को 300 गांवों की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
प्रशासन के अनुसार, जिले में अब तक पेयजल योजनाओं से जुड़ी 1016 शिकायतें और सुझाव दर्ज किए गए हैं। इनमें से 1009 शिकायतों का समाधान किया जा चुका है, जबकि सात शिकायतें अभी लंबित हैं। जल सारथी ऐप के आने के बाद शिकायतों के निस्तारण की प्रक्रिया और तेज होने की उम्मीद है।
इस ऐप के माध्यम से ग्रामीण भी अपने गांव की जल जीवन मिशन योजना की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे और पेयजल से जुड़ी समस्याओं की शिकायत दर्ज करा सकेंगे। शासन का लक्ष्य है कि अधिक से अधिक लोगों को इस डिजिटल व्यवस्था से जोड़ा जाए, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था को बेहतर बनाया जा सके।
जल सारथी ऐप को ग्रामीण जल प्रबंधन में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे न केवल योजनाओं की निगरानी आसान होगी, बल्कि आम लोगों की भागीदारी भी बढ़ेगी। प्रशासन को उम्मीद है कि डिजिटल निगरानी व्यवस्था लागू होने से पेयजल योजनाओं की गुणवत्ता और कार्यों की गति में सुधार आएगा।