Greater नॉएडा : यमुना एक्सप्रेसवे पर बस में आग लगने की घटना को लेकर सोशल मीडिया पर कथित रूप से भ्रामक जानकारी फैलाने और मामले को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश करने के आरोप में एक महिला के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस के मुताबिक, बस में आग लगने की इस घटना में नौ लोगों की मौत हुई थी। घटना से जुड़ी तस्वीरों और वीडियो को कथित तौर पर गलत दावों के साथ सोशल मीडिया पर शेयर किए जाने के बाद साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया है।पुलिस ने 26 सितंबर को बताया कि एफआईआर मीडिया सेल में तैनात सब-इंस्पेक्टर सुमित कुमार की शिकायत के आधार पर दर्ज की गई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि महिला ने यमुना एक्सप्रेसवे पर हुए बस अग्निकांड से संबंधित तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किए और उनके साथ ऐसे दावे किए, जिन्हें पुलिस ने भ्रामक बताया है।
शिकायत के अनुसार, महिला ने अपनी पोस्ट में दावा किया था कि बस में आग भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सदस्यों ने लगाई थी। इसके साथ ही उसने कथित तौर पर यह भी दावा किया कि घटना का उद्देश्य अल्पसंख्यक समुदायों को निशाना बनाना था। पुलिस का कहना है कि इन दावों के जरिए घटना को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की गई।पुलिस के मुताबिक, बस में आग लगने जैसी गंभीर घटना से जुड़ी तस्वीरों और वीडियो के साथ इस तरह के दावे सोशल मीडिया पर प्रसारित किए जाने का मामला सामने आने के बाद इसकी जांच की गई। इसके बाद मीडिया सेल में तैनात सब-इंस्पेक्टर सुमित कुमार ने शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में महिला के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।
मामले में पुलिस अब सोशल मीडिया पर शेयर किए गए कंटेंट और उससे जुड़े तथ्यों की जांच कर रही है। यह भी देखा जा रहा है कि संबंधित पोस्ट कब और किस माध्यम से शेयर की गई तथा उसे सोशल मीडिया पर कितनी दूर तक प्रसारित किया गया। शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच साइबर क्राइम पुलिस की ओर से की जा रही है।पुलिस की कार्रवाई ऐसे समय सामने आई है जब यमुना एक्सप्रेसवे पर बस में आग लगने की घटना में नौ लोगों की मौत के बाद इससे जुड़ी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए। गंभीर हादसों के बाद सोशल मीडिया पर तेजी से तस्वीरें और वीडियो प्रसारित होते हैं। इसी बीच अलग-अलग दावों के साथ सामग्री शेयर किए जाने के मामले भी सामने आते हैं।
इस मामले में पुलिस का आरोप है कि महिला ने घटना से संबंधित तस्वीरों और वीडियो को ऐसे दावों के साथ साझा किया, जिनसे लोगों के बीच गलत जानकारी फैल सकती थी। इसके अलावा शिकायत में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि पोस्ट के जरिए घटना को कथित रूप से सांप्रदायिक स्वरूप देने की कोशिश की गई।महिला की ओर से किए गए दावों को फिलहाल आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, बस में आग BJP या RSS के सदस्यों द्वारा लगाए जाने और अल्पसंख्यक समुदायों को निशाना बनाए जाने संबंधी दावों के समर्थन में कोई पुष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। पुलिस ने इन्हीं दावों को भ्रामक बताते हुए मामला दर्ज किया है।
एफआईआर दर्ज होने के बाद अब साइबर क्राइम पुलिस मामले से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर सकती है। सोशल मीडिया पोस्ट से जुड़े मामलों में संबंधित अकाउंट, पोस्ट, तस्वीरों और वीडियो की जांच महत्वपूर्ण होती है। हालांकि इस मामले में आगे की जांच से क्या तथ्य सामने आते हैं, इसकी जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।पुलिस के अनुसार, शिकायत का मुख्य आधार बस अग्निकांड की तस्वीरों और वीडियो के साथ किए गए कथित भ्रामक और सांप्रदायिक दावे हैं। शिकायतकर्ता सब-इंस्पेक्टर सुमित कुमार मीडिया सेल में तैनात हैं। उनकी शिकायत के बाद साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू की गई।
इस मामले में यह भी महत्वपूर्ण है कि किसी दुर्घटना या आपराधिक घटना के बाद सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाली जानकारी की सत्यता की पुष्टि किए बिना उसे आगे शेयर करना गलत सूचना के प्रसार का कारण बन सकता है। खासतौर पर धर्म या समुदाय से जुड़े दावे संवेदनशील होते हैं और ऐसी सामग्री से सामाजिक तनाव की स्थिति पैदा होने का खतरा रहता है।पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि महिला द्वारा शेयर किए गए पोस्ट के पीछे क्या आधार था और संबंधित दावों का स्रोत क्या था। इसके साथ ही यह भी जांच का हिस्सा हो सकता है कि पोस्ट को जानबूझकर भ्रामक तरीके से प्रसारित किया गया या नहीं। मामले में जांच पूरी होने के बाद ही आगे की कानूनी कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट होगी।
फिलहाल महिला के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। एफआईआर में लगाए गए आरोप अपने आप में दोष सिद्ध नहीं करते और मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच तथा आगे की कानूनी प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।यमुना एक्सप्रेसवे पर बस में आग लगने की घटना में नौ लोगों की मौत हुई थी। इसी घटना से जुड़ी तस्वीरों और वीडियो को लेकर किए गए कथित भ्रामक दावों के बाद यह मामला साइबर क्राइम पुलिस तक पहुंचा। पुलिस का कहना है कि सोशल मीडिया पर घटना को BJP और RSS से जोड़ने तथा अल्पसंख्यक समुदायों को निशाना बनाए जाने का दावा किया गया था। अब साइबर क्राइम पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।
Tags: