मुरादाबाद। उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद स्थित प्राचीन सिद्धपीठ काली माता मंदिर में महंत की कुर्सी और मंदिर के प्रबंधन को लेकर चल रहा विवाद मारपीट एवं धमकी तक पहुंच गया। आरोप है कि मंदिर से हटाए गए पूर्व महंत सज्जन गिरी अपने साथियों के साथ परिसर में घुस गए और वहां मौजूद संतों के साथ मारपीट की। हमलावरों पर मंदिर में लगे सीसीटीवी कैमरे और डीवीआर तोड़ने का भी आरोप लगाया गया है। वर्तमान महंत की शिकायत पर पुलिस ने सात नामजद आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।
एसपी सिटी कुमार रणविजय सिंह के अनुसार, दिल्ली के लाल किला कोतवाली क्षेत्र स्थित हनुमान मंदिर निवासी महंत कंचन गिरी ने मामले में पुलिस को तहरीर दी थी। उन्होंने बताया कि श्रीपंच दसनाम जूना अखाड़े ने उन्हें प्राचीन सिद्धपीठ काली माता मंदिर का महंत नियुक्त किया है। वर्तमान में वह मंदिर की व्यवस्थाओं और धार्मिक गतिविधियों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
महंत कंचन गिरी ने आरोप लगाया कि 15 अगस्त को सुबह करीब साढ़े 11 बजे मंदिर से निष्कासित किए जा चुके पूर्व महंत सज्जन गिरी अपने साथियों के साथ मंदिर परिसर में दाखिल हुए। उनके साथ पवन गिरी, अमन सिंह, चालक अनुराग सिंह, विशाल सिंह, अभय सिंह और आर्यन सिंह मौजूद थे। सज्जन गिरी लखनऊ के बंथरा कस्बे के निवासी बताए गए हैं।
शिकायत के मुताबिक, आरोपियों ने मंदिर में मौजूद महंत विनय गिरी के साथ मारपीट शुरू कर दी। उन्होंने लाठी-डंडों से वहां उपस्थित अन्य संतों और महंतों को भी कथित रूप से निशाना बनाया। परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों और रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखने वाले डीवीआर को क्षतिग्रस्त कर दिया गया। आरोपियों ने जान से मारने की धमकी भी दी।
घटना के दौरान मंदिर में मौजूद महंत विनय गिरी और महंत महाकाल गिरी भयभीत हो गए। आरोप है कि सज्जन गिरी के भतीजे विशाल सिंह ने भी हमला करने का प्रयास किया। शोर सुनकर मंदिर के अन्य संत और आसपास रहने वाले लोग मौके पर पहुंचे। लोगों ने बीच-बचाव करते हुए संतों को आरोपियों से बचाया। इसके बाद घटना की जानकारी पुलिस को दी गई।
महंत कंचन गिरी की तहरीर के आधार पर पुलिस ने सात लोगों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की। रविवार को लालबाग पुलिस चौकी प्रभारी के नेतृत्व में गठित टीम ने दबिश देकर पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार आरोपियों के खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत भी कार्रवाई की गई और उन्हें न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया। मामले में शेष आरोपियों की भूमिका और तलाश के संबंध में जांच जारी है।
प्राचीन सिद्धपीठ काली माता मंदिर में महंत पद को लेकर विवाद अप्रैल से चल रहा है। नौ अप्रैल को मंदिर पर अधिकार रखने वाले श्रीपंच दसनाम जूना अखाड़े ने तत्कालीन महंत सज्जन गिरी और नौदेवी मंदिर के महंत राम गिरी को पद से हटा दिया था। अखाड़े की ओर से दोनों पर अनुशासनहीनता और अनैतिक गतिविधियों में शामिल होने के आरोप लगाए गए थे। हालांकि, ये आरोप जांच का विषय हैं और संबंधित पक्ष का विस्तृत जवाब सामने नहीं आया है।
बताया गया कि दोनों को प्रयागराज ले जाते समय रास्ते में संतों की टीम पर हमला भी हुआ था। उस घटना में सज्जन गिरी के भतीजे विशाल सिंह और कुछ अन्य लोगों पर आरोप लगाए गए थे। वर्तमान प्रबंधन का कहना है कि पद से हटाए जाने के बाद से ही पूर्व महंत दोबारा मंदिर पर नियंत्रण हासिल करने का प्रयास कर रहे हैं।
सज्जन गिरी को हटाए जाने के बाद मंदिर में कई बार महंत बदले जा चुके हैं। पहले महाकाल गिरी और हितेश्वर गिरी को अलग-अलग मंदिरों की जिम्मेदारी दी गई। बाद में महादेवानंद गिरी, आनंदेश्वर गिरी, महेश गिरी और वशिष्ठ गिरी को भी विभिन्न जिम्मेदारियां सौंपी गईं। कई संतों को कानपुर और नासिक भेजे जाने के बाद वर्तमान में कंचन गिरी और विनय गिरी व्यवस्था संभाल रहे हैं।
लगातार बदलते महंतों और प्रबंधन संबंधी विवाद के कारण मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। पुलिस का कहना है कि तहरीर और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की जा रही है। घटनास्थल के आसपास के कैमरों की रिकॉर्डिंग और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान भी जांच में शामिल किए जा सकते हैं।
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