गोरखपुर। मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को गोरखनाथ मंदिर में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में कहा कि अयोध्या में भगवान श्रीराम की जन्मभूमि पर भव्य मंदिर का निर्माण सनातन आस्था और लंबे संघर्ष का परिणाम है। उन्होंने कहा कि अयोध्या का वर्तमान वैभव कुछ लोगों को स्वीकार नहीं हो रहा है और रामभक्तों तथा सनातन धर्मावलंबियों को ऐसे तत्वों से सतर्क रहने की जरूरत है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज की 57वीं पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि वर्ष 1949 में श्रीराम जन्मभूमि पर रामलला का प्रकटीकरण मंदिर निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हुआ। आज अयोध्या में भव्य राम मंदिर बन चुका है और यह सनातन समाज के लिए गौरव का विषय है।
योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में अयोध्या के साथ काशी, विंध्याचल, प्रयागराज और वृंदावन का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि काशी में बाबा विश्वनाथ धाम, विंध्याचल में मां विंध्यवासिनी धाम, प्रयागराज के कुंभ और वृंदावन के वैष्णव कुंभ जैसे आयोजन सनातन परंपरा की शक्ति को प्रदर्शित करते हैं। उन्होंने अपने संबोधन में विरोधियों के लिए “कालनेमि” शब्द का इस्तेमाल करते हुए रामभक्तों और सनातन धर्मावलंबियों से सतर्क रहने की अपील की।
मुख्यमंत्री ने गोरक्षपीठ की परंपरा का जिक्र करते हुए कहा कि यह पीठ किसी जाति, पंथ या संप्रदाय के आधार पर भेदभाव नहीं करती। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म की अलग-अलग उपासना पद्धतियां हो सकती हैं, लेकिन सभी का उद्देश्य समाज और मानव कल्याण होना चाहिए।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि देश के लोगों को एक भाव और एक दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। उनका कहना था कि 140 करोड़ भारतवासी यदि एकजुट होकर आगे बढ़ें तो देश की शक्ति और बढ़ेगी। उन्होंने अलग-अलग दिशा में चलने और समाज में विभाजन पैदा करने वाली सोच से बचने की बात कही।
श्रद्धांजलि सभा में मुख्यमंत्री ने महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज के शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र में योगदान को भी याद किया। उन्होंने कहा कि देश की स्वतंत्रता से पहले सीमित संसाधनों के बावजूद महंत दिग्विजयनाथ ने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की स्थापना की और शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य किए।
उन्होंने बालिका शिक्षा और संस्कृत शिक्षा के लिए स्थापित संस्थानों का भी उल्लेख किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि महंत दिग्विजयनाथ के कार्य आज भी नई पीढ़ी के लिए प्रेरणादायी हैं और शिक्षा परिषद से जुड़ी संस्थाओं को उनके आदर्शों के अनुरूप काम करना चाहिए।
कार्यक्रम में महंत दिग्विजयनाथ की 57वीं पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। गोरखनाथ मंदिर में आयोजित इस कार्यक्रम में संत समाज और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोग मौजूद रहे।