रामपुर। जौहर विश्वविद्यालय में प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए। ईडी को आशंका थी कि छात्र-छात्राओं की आड़ में कुछ बाहरी लोग और आजम खान के समर्थक विश्वविद्यालय परिसर में प्रवेश कर सकते हैं। इससे जांच और कार्रवाई प्रभावित होने की संभावना को देखते हुए विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर विशेष निगरानी रखी गई। ईडी के साथ मौजूद सुरक्षाकर्मियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि परिसर के अंदर केवल विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं को प्रवेश दिया जाए।
विश्वविद्यालय पहुंचने वाले विद्यार्थियों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए मुख्य द्वार पर उनके नाम, पते और मोबाइल नंबर दर्ज किए जाने लगे। सुरक्षाकर्मी जांच-पड़ताल के बाद ही छात्र-छात्राओं को परिसर में प्रवेश दे रहे थे। अचानक शुरू हुई इस प्रक्रिया को लेकर विद्यार्थियों और विश्वविद्यालय से जुड़े लोगों के बीच चर्चा तेज हो गई। कुछ लोगों ने इसे सुरक्षा की दृष्टि से आवश्यक बताया, जबकि कुछ ने व्यक्तिगत जानकारी दर्ज किए जाने पर सवाल उठाए।
विद्यार्थियों के नाम और मोबाइल नंबर दर्ज किए जाने की जानकारी मिलने पर आजम खान के करीबी और बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष अधिवक्ता सतनाम सिंह मट्टू विश्वविद्यालय पहुंचे। उन्होंने गेट पर तैनात अधिकारियों और सुरक्षाकर्मियों से इस प्रक्रिया के बारे में जानकारी मांगी। अधिवक्ता ने विद्यार्थियों के मोबाइल नंबर और अन्य व्यक्तिगत विवरण दर्ज किए जाने का विरोध करते हुए इसे अवैध बताया। इसी विषय को लेकर उनकी ईडी और सुरक्षा अधिकारियों से नोकझोंक भी हुई।
अधिवक्ता सतनाम सिंह मट्टू का कहना था कि विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को परिसर में आने से रोकना या बिना किसी स्पष्ट कारण के उनका व्यक्तिगत विवरण एकत्र करना उचित नहीं है। उन्होंने अधिकारियों के सामने इस प्रक्रिया पर आपत्ति दर्ज कराई। दूसरी ओर सुरक्षा में लगे अधिकारियों का जोर इस बात पर था कि ईडी की कार्रवाई शांतिपूर्ण ढंग से पूरी हो और कोई भी अनधिकृत व्यक्ति परिसर में प्रवेश न कर सके।
विवाद बढ़ने और विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर लोगों की गतिविधियां तेज होने के बाद अतिरिक्त पुलिस बल को मौके पर बुलाया गया। बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती कर विश्वविद्यालय के प्रवेश और निकास मार्गों पर निगरानी बढ़ा दी गई। पुलिसकर्मी देर रात तक मुख्य द्वार पर डटे रहे। परिसर के आसपास आने-जाने वाले लोगों पर नजर रखी गई और बिना पहचान की पुष्टि के किसी बाहरी व्यक्ति को अंदर जाने की अनुमति नहीं दी गई।
ईडी की कार्रवाई के दौरान विश्वविद्यालय का मुख्य द्वार सुरक्षा घेरे में नजर आया। छात्र-छात्राओं को जांच के बाद प्रवेश दिया जाता रहा, लेकिन बाहरी लोगों के प्रवेश पर सख्ती बरती गई। अधिकारियों को आशंका थी कि कार्रवाई की जानकारी मिलने के बाद बड़ी संख्या में समर्थक विश्वविद्यालय पहुंच सकते हैं। इसी संभावना को ध्यान में रखकर पहले से सुरक्षा योजना तैयार की गई थी। सुरक्षाकर्मियों को किसी भी तरह की भीड़ या विरोध की स्थिति से निपटने के लिए सतर्क रहने को कहा गया।
जौहर विश्वविद्यालय और आजम खान से जुड़े मामलों को लेकर पहले भी राजनीतिक और कानूनी विवाद सामने आते रहे हैं। ऐसे में ईडी की कार्रवाई ने एक बार फिर विश्वविद्यालय परिसर को चर्चा में ला दिया। कार्रवाई के दौरान विद्यार्थियों का विवरण दर्ज किए जाने का मामला भी विवाद का कारण बन गया। अधिवक्ता की आपत्ति के बाद विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर कुछ समय के लिए तनाव की स्थिति बनी रही, हालांकि पुलिस की मौजूदगी में स्थिति को नियंत्रित रखा गया।
मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारियों ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने को प्राथमिकता दी। पुलिस बल ने मुख्य द्वार के आसपास अनावश्यक भीड़ जमा नहीं होने दी। विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की आवाजाही जारी रही, लेकिन उन्हें पहचान संबंधी प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही अंदर प्रवेश मिल सका। छात्र-छात्राओं को सुरक्षा जांच के कारण कुछ परेशानी का सामना भी करना पड़ा।
ईडी की टीम अपनी कार्रवाई में जुटी रही और सुरक्षा व्यवस्था के चलते बाहरी गतिविधियों का असर परिसर के अंदर चल रही प्रक्रिया पर नहीं पड़ने दिया गया। अधिकारियों ने कार्रवाई से जुड़े दस्तावेजों या जांच के बिंदुओं के संबंध में तत्काल कोई विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की। इसलिए जांच के दौरान क्या दस्तावेज देखे गए या किन बिंदुओं पर पूछताछ की गई, इसकी आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।
विश्वविद्यालय के गेट पर विद्यार्थियों की निजी जानकारी दर्ज करने के विरोध ने अब एक अलग बहस छेड़ दी है। एक पक्ष इसे संवेदनशील कार्रवाई के दौरान अपनाया गया सुरक्षा उपाय बता रहा है, जबकि दूसरा पक्ष विद्यार्थियों की गोपनीयता और अधिकारों से जोड़कर देख रहा है। फिलहाल इस प्रक्रिया की वैधानिकता पर संबंधित अधिकारियों की ओर से कोई विस्तृत स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।
देर रात तक विश्वविद्यालय के बाहर पुलिस की तैनाती बनी रही। सुरक्षाकर्मी मुख्य द्वार की निगरानी करते रहे और परिसर में प्रवेश करने वाले प्रत्येक व्यक्ति की पहचान की जांच की गई। ईडी की कार्रवाई के साथ ही विश्वविद्यालय में सुरक्षा व्यवस्था और छात्र-छात्राओं की जानकारी दर्ज करने को लेकर हुआ विवाद दिनभर चर्चा का विषय बना रहा।