मंदाकिनी किनारे बसे 60 गांवों की कहानी हर दिन संकट से जूझते लोग
कभी बाढ़ कभी सूखा चित्रकूट के गांवों पर टूटी मुसीबतों की मार
चित्रकूट: मंदाकिनी नदी के किनारे बसे चित्रकूट के करीब 60 गांवों के लोगों के लिए नदी वरदान कम और संकट ज्यादा बनती जा रही है। कभी तेज बारिश के बाद बाढ़ का पानी घरों तक पहुंच जाता है तो कभी गर्मी में नदी सूखने लगती है। ग्रामीणों का कहना है कि सालभर उन्हें पानी और रोजी-रोटी की चिंता सताती रहती है।
मंदाकिनी किनारे रहने वाले लोगों की जिंदगी मौसम के उतार-चढ़ाव पर निर्भर हो गई है। बारिश के दिनों में नदी उफान पर आती है और खेत, रास्ते व घर प्रभावित होते हैं। वहीं गर्मी में जलस्तर गिरने से पेयजल और खेती की समस्या खड़ी हो जाती है।
बाढ़ आती है तो उजड़ता है आशियाना
ग्रामीणों के मुताबिक मानसून में मंदाकिनी का जलस्तर बढ़ते ही नदी किनारे बसे गांवों में डर का माहौल बन जाता है। कई परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ता है। खेतों में पानी भरने से फसलें खराब हो जाती हैं और पशुओं के लिए भी परेशानी बढ़ जाती है।
सूखे में पानी के लिए संघर्ष
बाढ़ का पानी उतरने के बाद भी ग्रामीणों की मुश्किलें खत्म नहीं होतीं। गर्मी के मौसम में नदी और आसपास के जलस्रोत कमजोर पड़ जाते हैं। ग्रामीणों को दूर से पानी लाने और खेती के लिए सिंचाई की समस्या से जूझना पड़ता है।
विकास कार्यों की मांग
स्थानीय लोगों का कहना है कि मंदाकिनी नदी से जुड़ी समस्याओं के स्थायी समाधान की जरूरत है। तटबंध, जल संरक्षण, बेहतर सिंचाई व्यवस्था और बाढ़ नियंत्रण के उपाय किए जाएं तो ग्रामीणों को राहत मिल सकती है।
नदी किनारे जीवन की मजबूरी
मंदाकिनी धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण नदी है, लेकिन इसके किनारे बसे लोगों के लिए प्राकृतिक परिस्थितियां लगातार चुनौती बनी हुई हैं। ग्रामीणों की मांग है कि उन्हें सिर्फ आपदा के समय राहत नहीं बल्कि स्थायी समाधान दिया जाए। चित्रकूट के इन गांवों की कहानी बताती है कि प्रकृति के करीब रहने वाले लोग किस तरह कभी बाढ़ तो कभी सूखे के बीच अपना जीवन आगे बढ़ाने को मजबूर हैं।